70,000 लाओ, एके-47 ले जाओ
उत्तर प्रदेश में लगातार फैलती आतंकवाद की जहरीली जड़ों को खाद-पानी यहीं की मिट्टी से मिल रहा है. अनुराग त्रिपाठी और एतमाद खान उत्तर प्रदेश में कुछ हथियार तस्करों से मिलने में कामयाब हुए, जिनका कहना था--70,000 लाओ, एके-47 ले जाओ .
हथियार डीलर- बताओ आपको क्या चाहिए.
तहलका-हमें 40 एके-47 और एके-56, कुछ हथगोलों, नौ एमएम और प्वाइंट 32 बोर पिस्टलों की जरुरत है.
हथियार डीलर- ठीक है, आपको मिल जाएंगे.
तहलका- आपके रेट क्या हैं.
हथियार डीलर- एके आपको 70,000 रुपये में मिलेगी और 9एमएम और प्वाइंट 32 बोर सात से बारह हजार रुपये के बीच पड़ेंगी.
हो सकता है कि ये बातचीत आपको बॉलीवुड की किसी मसाला फिल्म जैसी लगे. आपको ये भी लग सकता है कि ये सौदा अराजकता से जूझ रहे किसी ऐसे देश में हो रहा होगा जहां हथियारों की सौदेबाजी और आतंक रोज का मामला है. मगर यदि हम आपको ये बताएं कि ये बातचीत भारत में हुई है तो आप कह सकते हैं कि जरूर ये अस्थिरता से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर जैसे किसी सीमावर्ती राज्य के किसी सुदूर इलाके में हुई होगी. लेकिन ये जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि ये सौदेबाजी दिल्ली से सिर्फ 120 किलोमीटर दूर मुजफ्फरनगर जिले के एक गांव में हुई है.
| तहलका की जांच टीम को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि उत्तर प्रदेश खासकर इसके मुजफ्फरनगर, मेरठ, आजमगढ़ और रामपुर जैसे कस्बों में हथियार बेचने वाले कई गिरोह सक्रिय हैं....हमारी टीम ने इस सनसनीखेज सूचना की सच्चाई जांचने का फैसला किया. |
नए साल के पहले ही दिन हथगोलों और ए के-47 राइफलों से लैस चार आतंकवादियों ने उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित एक सीआरपीएफ कैंप पर हमला किया और सात जवानों सहित आठ लोगों की हत्या कर दी. इस घटना के बाद विशेषज्ञ, केंद्र और राज्य सरकारें इस बारे में एकमत थे कि उत्तर प्रदेश तेजी से आतंक के एक नए गढ़ में तब्दील हो रहा है. लेकिन इस बारे में उनमें से कोई कुछ नहीं कह रहा था कि कैसे पिछले कुछ वर्षों के दौरान ये राज्य आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह और नेपाल से हथियारों की तस्करी के लिए सुगम रास्ता बन गया है.
तहलका की जांच टीम को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि उत्तर प्रदेश खासकर इसके मुजफ्फरनगर, मेरठ, आजमगढ़ और रामपुर जैसे कस्बों में हथियार बेचने वाले कई गिरोह सक्रिय हैं. हमें मिली जानकारी के मुताबिक ये गिरोह न सिर्फ प्वाइंट 32 रिवॉल्वर या देसी कट्टा जैसे छोटे हथियार बल्कि एके-47 और एके-56 जैसे कहीं बड़े और घातक हथियार बेच रहे थे.
हमारी टीम ने इस सनसनीखेज सूचना की सच्चाई जांचने का फैसला किया. हमने सोचा कि क्यों न तहकीकात की शुरुआत मुजफ्फरनगर से की जाए. नतीजे दहलाने वाले थे.
मुजफ्फरनगर पहुंचने पर हमारे स्थानीय सूत्र ने हमारा संपर्क राशिद खान नाम के एक व्यक्ति से करवाया. सूत्र के मुताबिक राशिद हथियार डीलरों और खरीददारों के बीच दलाल का काम करता था. हमने खुद को पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक गैंगस्टर का आदमी बताया था जो गैंग के लिए अत्याधुनिक हथियार खरीदना चाहते थे. राशिद ने ये जानने के लिए हमारी पड़ताल की कि कहीं हम पुलिस या मीडिया वाले तो नहीं हैं. मगर शायद पैसे का लालच हर चीज पर भारी पड़ा इसलिए उसे राजी होने में ज्यादा देर नहीं लगी. हमारे सूत्र ने बताया था कि राशिद तुरंत ही हमें हथियार डीलरों से मिलवा सकता है लेकिन क्योंकि हम पहली बार सौदे के लिए आए थे इसलिए उसका भरोसा हासिल करने के लिए हमें करीब एक हफ्ता इंतजार करना पड़ा.
पांचवें दिन हमारे सूत्र ने हमें फोन किया और मीटिंग के लिए तैयार रहने को कहा. हमें उससे शहर से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कैराना गांव के पास मिलना था. गौरतलब है कि इस इलाके में कैराना छोटे देसी हथियारों की फैक्ट्रियों के लिए कुख्यात है. मगर इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं थी कि यहां से अत्याधुनिक हथियार भी खरीदे जा सकते हैं. सूत्र से हमारी मुलाकात बस स्टैंड पर हुई जहां से वो हमें गांव की एक संकरी सड़क पर ले गया. पांच किलोमीटर तक चलने के बाद उसने गन्ने के एक घने खेत के पास हमसे गाड़ी रोकने को कहा.
हम खेत में घुसे और कुछ देर तक घने खेत में चलते रहे. थोड़ी देर बाद एक खुला इलाका आया. हमारे सूत्र ने यहां से आगे हमारे साथ आने से इनकार कर दिया. उसके मुताबिक राशिद जानता था कि हम वहां है और आगे का रास्ता बताने के लिए वो किसी को हमारे साथ भेज देगा. थोड़ी ही देर बाद खेतों से एक लड़का निकलता दिखाई दिया. हम उसके पास गए और ये बातचीत की.
तहलका- हमें राशिद ने भेजा है.
लड़का-आप कहां से आए हैं और आपको क्या चाहिए.
तहलका- हम यहां भाई जान (हथियार डीलर) से मिलने आए हैं.
लड़का- तो आप यहां उनसे मिलने आए हैं. क्या कोई हथियार भी साथ है.
तहलका. तुम्हीं क्यों नहीं देख लेते. हमारी जांच कर लो.
लड़का- देखता हूं. हमने पूछा कि हथियार कहां से आते हैं. तुरंत जवाब आया—पाकिस्तान. जब हमने कहा कि हर कोई यही कहता है तो मुखिया ने वही बात दोहराई और कहा कि हथियार नेपाल सीमा के जरिये पहले गोरखपुर आते हैं और वहां से राज्य के विभिन्न हिस्सों में डीलरों को उनकी सप्लाई होती है.
अच्छी तरह से हमारी तलाशी लेने के बाद लड़का हमें खेत में बने एक रास्ते पर ले गया. हम थोड़ी ही दूर बढ़े थे कि एक तेज आवाज ने हमें रास्ते से हटने और खेत में घुसने के लिए कहा. खेत में कुछ मीटर चलने के बाद हमें हथियारों से लैस चार लोगों ने घेर लिया. उनके चेहरे ढके हुए थे. हमने उनके मुखिया से बात की और बताया कि हमें राशिद ने भेजा है. हमने उससे पूछा कि वो लोग कौन-कौन से हथियार बेचते हैं और उनकी कीमत क्या है. इसके बाद जो बातचीत हुई वो लेख के शुरु में दी गई है. इससे हमें जानकारी मिली कि एके-47 और 56, 70,000 रुपये प्रति पीस और नौ एमएम व प्वाइंट 32 बोर सात से बारह हजार रुपये में उपलब्ध है.
हमने पूछा कि हथियार कहां से आते हैं. तुरंत जवाब आया—पाकिस्तान. जब हमने कहा कि हर कोई यही कहता है तो मुखिया ने वही बात दोहराई और कहा कि हथियार नेपाल सीमा के जरिये पहले गोरखपुर आते हैं और वहां से राज्य के विभिन्न हिस्सों में डीलरों को उनकी सप्लाई होती है. हमें बताया गया कि एके राइफलों के लिए हमें 15 दिन एडवांस में ऑर्डर देना होगा जबकि छोटे हथियार तुरंत उपलब्ध हो सकते हैं. ये हाल तब है जब राज्य में हालिया आतंकी घटनाओं के बाद इलाके में पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है. इसके बाद मुखिया ने हमें जोला नाम के एक गांव में एक आदमी से मिलने के लिए कहा. हमें उसी आदमी को ऑर्डर देना था.
जब हमने मुखिया से धंधे का हालचाल पूछा तो उसका कहना था कि इन दिनों बिक्री मंदी है लेकिन चुनावों के दौरान काम बढ़िया था. इसके बाद उसे हम पर कुछ शक सा हुआ. उसने कहा कि वो हमसे सिर्फ इसलिए बात कर रहा है क्योंकि हमें राशिद ने भेजा है नहीं तो हम उससे कभी नहीं मिल पाते. उसने ये भी कहा कि हमें जोला में संबंधित व्यक्ति को कुछ रकम एडवांस में देनी होगी और ये कितनी होगी इस बारे में वो राशिद को बता देगा. इसके बाद अगली मुलाकात के बारे में राशिद ही हमें बताएगा. मुखिया ने हमें चेतावनी भी दी कि हम ज्यादा सवाल न पूछें और जिस मकसद से आए हैं उसी पर ध्यान दें. इसके बाद वो अपने गैंग के साथ खेत में गायब हो गया.
इसके बाद हम भी गाड़ी की तरफ लौटे और अपने सूत्र के साथ जोला गांव की तरफ चल दिए. हमारे सूत्र ने राशिद को फोन किया जिसने हमें नजदीक ही स्थित एक ढाबे पर जाने के लिए कहा. जैसे ही हम वहां पहुंचे हमने देखा कि बाहर एक पुलिस वैन खड़ी है. हमने एक घंटे तक इंतजार किया. तभी हमारे सूत्र को राशिद का फोन आया. वो गुस्से में था और उसने आरोप लगाया कि हम पुलिस के आदमी हैं. हमारे सूत्र ने उसे समझाने की कोशिश की कि ऐसा नहीं है और पुलिस की गाड़ी का वहां होना महज एक संयोग था. काफी समझाने-बुझाने पर वो शांत हुआ. इसके बाद उसने कहा कि सौदा आगे बढ़ने से पहले हमें कुछ दिन और इंतजार करना होगा.
तीन दिन बाद हमारा इंतजार खत्म हुआ. दोपहर में हमारा सूत्र हमारे होटल आया और हमसे जोला चलने के लिए कहा. हम गाड़ी लेकर गांव के लिए रवाना हो गए. पिछली बार की तरह ही हमारे सूत्र ने हमें एक खेत के पास छोड़ दिया. हमें एक जीर्ण-शीर्ण इमारत में जाना था. हमें बताया गया था कि संबंधित व्यक्ति हमें वहीं मिलेगा. जब हम इमारत में पहुंचे तो हमारा सामना दो हथियारबंद लोगों से हुआ जिन्होंने चेहरा ढका हुआ था. शुरुआती बातचीत के बाद हमने कोशिश की की वो चेहरे से नकाब हटा दें ताकि हमारे छिपे कैमरे पर उनकी तस्वीर कैद हो सके. लेकिन कोशिश नाकाम रहने पर हम तुरंत मुद्दे पर आ गए और पूछा कि सौदा किस तरह होगा. हमें बताया गया कि एके राइफलों का बंदोबस्त करना तो फिलहाल मुश्किल होगा क्योंकि इस तरह की खरीद पर इन दिनों तगड़ी नजर रखी जा रही है. लेकिन उन्होंने हमें यकीन दिलाया कि जो भी हम चाहते हैं हमें मिल जाएगा.
आखिरकार हमने एक-47, एके-56, पिस्टल और हथगोलों का ऑर्डर दिया और एडवांस के रूप में उन्हें 15,000 रुपये दिए. उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि माल एक हफ्ते में तैयार होगा और जहां हम चाहें भेज दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि उनका एक साथी पहले ही एके राइफलों की एक खेप लेने के लिए नेपाल में है. उनके मुताबिक नेपाल में इन राइफलों के पुर्जे पहले अलग-अलग किए जाते हैं और तस्करी के जरिए उन्हें भारत भेजकर फिर से जोड़ा जाता है. उन्होंने हमें कुछ प्वाइंट 32 रिवॉल्वर भी दिखाए और मजाक करते हुए कहा कि अगर चाहें तो हम इनमें से एक को बतौर टोकन रख सकते हैं.
ये दो मुलाकातें इस बात की एक झलक देने के लिए काफी थीं कि उत्तर प्रदेश में अवैध हथियारों का धंधा किस तरह फल-फूल रहा है. ये अनुमान लगाना मुश्किल नहीं कि कई बड़े रैकेट राज्य में बिना किसी डर और बाधा के इसे अंजाम दे रहे हैं. हमारी ये तहकीकात राज्य की मशीनरी और पुलिस के काम करने के तरीकों पर भी कई सवाल खड़ा करती है. उनमें सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर बिना किसी खास दिक्कत के तहलका की टीम इन तक पहुंच सकती है तो पुलिस क्यों नहीं?
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कुल टिप्पणियां: 6
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प्रेषक : maheshgreat investigation
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प्रेषक : anil sharmaYour investigation report, puts an question mark on our intelligence & security system at :(a)Border level (b) state level. Serious concern matter for ciziten. GOOD JOB, KEEP IT UP.
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प्रेषक : Uttam BnaerjeeVery Good Article...Thums up for both of you..kepp it on.. It's hash Reality.
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प्रेषक : Neeraj Kumarइस लेख से यह साबित होता है कि राज्य में अपराधियों से पुलिस और राजनीतिज्ञ आपस में मिले हुए हैं क्योंकि उनकी मिलीभगत के अलावा इस तरह का काम नहीं हो सकता है ।
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प्रेषक : Ajayवाकई ये तहकीकात राज्य सरकार की आँख खोलने के लिए काफ़ी है, पर गहरी नींद में सोई सरकार शायद ही जागे. उत्तर प्रदेश शुरू से ही आपराधिक गतिविधियो के लिए कुख्यात रहा है, हालाँकि इस तहकीकात से लगता है की ये अब चरम पर पहुच चुका है लेकिन ये दुर्भाग्या ही है की सरकारो ने इसके दामन के बजाय इसे अपने राजनेटिक हिट साधने में बराबर का सांझिदार बना लिया है. अब जब पाकिस्तान का भी नाम सामने आ रहा है तो सरकार को सचेत हो जाना चाहिए वरना इसके ख़तरनाक परिणाम झेलने पद सकते हैं तहलका को एसी खोजी खबरो के साधुवाद






















