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चिम्मनभाई.....का हवाई अड्डा

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      हवाई अड्डे का नाम है चिम्मनभाई खान साहब फोटो स्टेट वाले का हवाई अड्डा...पहले ये जवाहर लाल नेहरुजी के नाम पर था।

      चिम्मन भाई कौन हैं, यह आप नहीं जानते। हम भी नहीं जानते थे, इस विश्वास मत से पहले। पर अब जानते हैं, अब तो पूरा देश जानता है।

      चिम्मनभाई उन तीन सांसदों में हैं, जिन्होने अपना समर्थन खास टाइम पर दिया।

      चिम्मनभाई के बाद खान साहब का नाम जोड़ना पड़ा, क्योंकि उनका वोट भी खास था। फिर झम्मूमल फोटो स्टेट वाले का नाम भी आया, क्योंकि उनका वोट भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरुरी था। झम्मूमल जी का योगदान लोकतंत्र में फोटोस्टेट मशीन का था। आपकी फोटो स्टेट और टाइपिंग की दुकान थी, जिस पर एक पोलिटिकल पार्टी के लैटर वगैरह टाइप होने आते थे। जो नेता टाइप कराने आता था, वह पार्टी से रकम ले लेता था, पर झम्मूमलजी को नहीं देता था। इसके बदले उसने झम्मूमल को नगर निगम के काऊंसिलर का टिकट दिलवा दिया। झम्मूमलजी ने निगम पार्षद होकर अपनी दुकान सड़क पर पांच फुट और बढ़ा ली। इससे उत्साहित होकर तमाम दुकानदारों ने भी यही किया और इस हल्ले में झम्मूमल पहले दुकानदारों के नेता हो गये और फिर विधायक। विधायक होने के बाद उन्होने सौ करोड़ रुपये के तीन घपले किये। जिनमें सीबीआई इन्क्वायरी चली। पार्टी ने बाहर निकाल दिया। पर वह बाइज्जत बरी हो गये, पहले बेइज्जत थे, अब बाइज्जत हो गये। इसके बाद नेचुरल प्रोग्रेस हुई और वह एमपी हो गये। फोटो  स्टेट की दुकानों के साथ, दामादों को पेट्रोल पंप दिलवाकर राजीखुशी जीवन व्यतीत करने लगे।

      जब वोटों की जरुरत पड़ी, तो झम्मूमलजी याद आये।

      झम्मूमलजी ने कहा कि एयरपोर्ट का नामकरण उनके नाम पर होना चाहिए।

      झम्मूमलजी के मसले पर कुछ विद्वानों ने कहा कि यह ठीक नहीं है, जवाहर लाल नेहरुजी के नाम पर, जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं ने नाम पर एयरपोर्ट, अस्पतालों, कालेजों  के नाम रखे गये हैं। ऐसी सूरत में झम्मूमलजी को इन नेताओँ के मुकाबले कैसे खड़ा कर दिया जाये।

      इस पर एक विद्वान ने कहा-अबे ये बता कि वोट कौन देगा, जयप्रकाश नारायण या नेहरुजी।

      जवाब आया कि झम्मूमलजी।

      इस तरह से झम्मूमलजी के नाम पर एयरपोर्ट बन गया।

      इस तरह से संभावना है कि निकट भविष्य में गेटवे आफ इंडिया का नाम चोरुमल चोरड़िया गेटवे आफ इंडिया हो सकता है। लोहिया अस्पताल का नाम शिबू सोरेन अस्पताल हो सकता है, शिबू सोरेन चाहें तो उनके बेटे या पुत्रवधू के नाम पर भी इस अस्पताल का नामकरण किया जा सकता है।

      सवाल वही है कि वोट कौन देगा-लोहियाजी या शिबू सोरेन।

      जल्दी ही हो सकता है कि बच्चों की किताबों में यह पढ़ाया जाये कि स्वतंत्रता संग्राम में किसने हिस्सा  लिया था, जी चोरुमल चोरड़ियाजी ने। नेहरु, गांधीजी, लोहियाजी, जयप्रकाशजी कौन थे, जी हमें नहीं मालूम। हाल के विश्वास मत में इन्हों का नाम नहीं आया, इनके तो वोट ही नहीं थे।

      चोरड़ियाजी का नाम सारे टीवी चैनलों पर आया।

      लाल किला किसने बनवाया था, जल्दी ही इस सवाल का जवाब भी होगा-चोरुमल चोरड़ियाजी ने।

      शटअप, वोट किसका जरुरी था, वोट किसने दिया शाहजहां ने या चोरुमलजी ने।

      गनीमत यह है कि अभी तक यह कानून नहीं पास कर दिया गया कि हम सबको अपने बाप का क्या नाम बताना पड़ेगा-चोरुमल चोरड़िया।

      खैर छोड़िये, यह बताइए, राष्ट्रपिता कौन-चोरुमल चोरड़िया।

      क्या पूछा-फिर महात्मा गांधी कौन थे।

      हमें क्या पता, हाल के चुनावों में तो उनका वोट ही नहीं था। 

      आलोक पुराणिक

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Comments (2 posted)

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dhiru 28/07/2008 14:41:07
bilkul theek,lakin kuch to aise hai apne baap ke naam par hawai adde ka naam rakhte hai aur vote bhi nahi deta.aur kaun se gandhi ke baat karte hai ab to sirf aur sirf ek gandhi hai Sonia gandhi
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jyoti mehlawat 19/08/2008 11:00:00
sir ! how r u? aap mujhe plz ye batao itne zabardast ideas aapko kahan se aate hai?
ekdam mast likha hai aapne.............
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