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हिंदू हिंसा हिंसा न भवति

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भगवा आतंक का चेहरा उजागर होने के बाद मठों और धर्माचार्यों द्वारा की जा रही राजनीतिक बयानबाजी देश और संविधान के समक्ष एक नए संकट का संकेत दे रही है.

स्वामी निश्चलानंद पुरी के शंकराचार्य हैं. विधिवत. यानी न तो उनने पीठ को धाम घोषित कर रखा है, न वे स्वयं घोषित शंकराचार्य हैं. पुरी का पीठ सर्वमान्य चार धामों में से एक है और आदि शंकराचार्य की दी गई व्यवस्था के अनुसार निश्चलानांद शंकराचार्य हैं. उनके धाम और पद को लेकर कोई विवाद नहीं है. यानी वे फर्जी धाम के फर्जी शंकराचार्य नहीं हैं. इसलिए आस्थावान हिंदू अगर उम्मीद करें कि स्वामी निश्चलानंद धर्म की समझ और पद की जिम्मेदारी से ही बोलेंगे तो स्वाभाविक ही है.

लेकिन उनने अभी कहा कि हिंदू उग्रवादी बने तो तीसरा महायुद्ध हो जाएगा. ‘‘मैं पिछले सत्रह सालों से कहता आ रहा हूं कि हिंदुओं को इतना मजबूर न किया जाए कि एक दिन वे हथियार उठाने को बाध्य हों. आज विदेशी षड्यंत्र इस तरह गहरे फैल गया है कि हिंदुओं के गंगा, राम सेतु, राम मंदिर जसे मानबिंदुओं को अपमानित करने के लिए हिंदू ही विदेशी एजेंट बन कर सामने खड़े हो गए हैं’’ - स्वामी निश्चलानंद का यह कथन एक हिंदी अखबार में छपा है. शंकराचार्य ने कहा कि हिंदुओं को उग्रवादी बनाने को इसी तरह मजबूर किया गया तो संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल हो न हो, एक लाख में एक हिंदू तो ऐसा होगा ही जो राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठा लेगा. हमारे देवी-देवती राम, कृष्ण, काली, दुर्गा सबने शस्त्रों से ही दुष्टों का संहार किया. उनके हाथों में हथियार रहते हैं. इससे अगर उन्हें भी उग्रवादी माना गया तो फिर मुझे भी अपने आप को उग्रवादी मानने में कोई आपत्ति नहीं होगी.

स्वामी निश्चलानंद ने कहा - साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के घर से कोई आपत्तिजनक सामान नहीं मिला न जांच में कोई जानकारी मिली. फिर भी उन्हें घोर प्रताड़ना दी जा रही है जबकि संसद पर हमला करने वाले जेलों में मजा काट रहे हैं.

पुरी के शंकराचार्य का इतना बड़ा उद्धरण मैंने दिया तो इसलिए कि वे प्रवीण तोगड़िया नहीं है. विश्व हिंदू परिषद के इस नेता को एक टीवी चैनल ने भाषण देते हुए दिखाया कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर का तो चार-चार बार नार्को टैस्ट किया गया जबकि डान सलेम का एक बार भी नहीं किया गया. प्रवीण तोगड़िया कैंसर के विशेषज्ञ डॉक्टर हैं लेकिन तथ्यों से उनका कोई लेना-देना नहीं है. वे नहीं जानते कि सलेम का नार्को टैस्ट कितनी बार हुआ. लेकिन प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नार्को टैस्ट को बदनाम करने और हिंदू को गुस्सा दिलाने के लिए कि उनकी एक साध्वी का तो चार बार नार्को टैस्ट किया जाता है जबकि अबु सलेम जैसे अपराधी सरगना मुसलमान का एक बार भी नहीं. प्रवीण तोगड़िया सरासर झूठ बोल रहे थे क्योंकि सब जानते हैं कि अबु सलेम का नार्को टैस्ट और ब्रेन मैपिंग सब कुछ हुआ है. तोगड़िया विश्व हिंदू परिषद के नेता हैं और उनसे हिंदू भी उम्मीद नहीं करते कि सांप्रदायिकता भड़काने में तथ्यों और सच्चाई का ध्यान रखेंगे.

प्रवीण तोगड़िया जसे ही योग गुरु रामदेव हैं. वे भी कहते फिर रहे हैं कि चार-चार बार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नार्को टैस्ट उन्हें प्रताड़ित करने के लिए किया गया है. एक साध्वी का तो चार बार लेकिन आतंकवादियों और नेताओं का नार्को टैस्ट तो एक बार भी नहीं करवाया जाता. साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मामले में जांच में कुछ नहीं निला इसलिए मामला संदिग्ध हो जाता है. बेचारे रामदेव भी प्रचारक हैं. संघ के या विहिप के नहीं योग के. और प्रचारक को भी तथ्यों और सच्चाई से कम ही लेना-देना होता है. उन्हें नहीं मालूम कि आतंकवादियों और नेताओं का नार्को टेस्ट करवाया जाता है या नहीं. उन्हें यह भी नहीं मालूम कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर की जांच में से क्या तथ्य निकल कर आए हैं. अगर कुछ नहीं निकला होता तो क्या न्यायालय उन्हें हिरासत में रखने की अनुमति देता. मुंबई के आतंकवादी निरोधी दस्ते ने साफ कहा है कि हमने एक भी ऐसा व्यक्ति गिरफ्तार नहीं किया है जिसके खिलाफ हमारे पास सबूत नहीं हैं.

लेकिन रामदेव और स्वामी निश्चलानंद दस्ते की एक भी बात पर एतबार नहीं करते. उन्हें तो भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह पर ही विश्वास है जो कहते चले आ रहे हैं कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर की जांच में कुछ नहीं निकला है तभी तो बार-बार उनका नार्को टैस्ट करवाया जा रहा है. राजनाथ सिंह का कहना फिर भी समझ जा सकता है क्योंकि वे तो मालेगांव बम विस्फोट में संघ परिवारी संगठनों और कार्यकर्ताओं के शामिल होने के तथ्यों का राजनीतिकरण कर रहे हैं. मालेगांव के आरोपियों को बचाने का एक यही तरीका वे जानते हैं. उन्हें यह करना इसलिए जरूरी है कि उनकी पार्टी ही लगातार प्रचार करती आई है कि यह इस्लामी आतंकवाद है. और देश के सारे मुसलमान आतंकवादी हों या नहीं पकड़े गए सभी आतंकवादी मुसलमान हैं. ओर चूंकि कांग्रेस को मुसलमानों के वोट चाहिए इसलिए उसकी सरकार आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करती.

मालेगांव बम विस्फोट की जांच इस प्रचार को झूठा ठहराती है और बताती है कि मुसलमान बहुल इलाकों में हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं. जांच में ऐसी साई निकल कर आए तो आतंकवाद के विरुद्ध संघ वालों का प्रचार ही झूठ नहीं लगता यह बात भी सामने आती है कि सिर्फ मुसलमान ही आतंकवादी नहीं होते हिंदूवादी संगठन भी हिंदुओं को आतंकवादी बना रहे हैं. यह तथ्य स्थापित हो जाए तो आतंकवाद भारत नामक राष्ट्र को तोड़ने वाला मुसलमान षड्यंत्र नहीं रहता. वह उग्रवाद और कट्टरवाद की करतूत हो जाता है जिसमें हिंदू-मुसलमान उग्रवादी संगठन समान रूप से लगे हुए हैं.

अब हिंदू संगठन ऐसी जांच को झूठी और कांग्रेस की साजिश बताए बिना रह नहीं सकते. सिर्फ इसलिए नहीं कि इससे उनके मुसलमान विरोध की राष्ट्रवादी हवा निकल जाती है. इसलिए भी कि हिंदुत्व और हिंदुत्ववादी संगठन अपने सभी सिद्धांतों और कार्यो के लिए जो प्रखर राष्ट्रवादी औचित्य दिया करते हैं वह भी झूठा और निराधार साबित होता है. मैं बता चुका हूं कि संघ और हिंदुत्व की आस्था में हिंदू ही राष्ट्र है. बाकी सब बाहर के समुदाय हैं. इसलिए हिंदुओं के सारे काम उनकी परिभाषा में राष्ट्रीय कार्य हैं. और इसलिए हिंदू अगर बम भी फोड़ रहे हैं तो यह तो राष्ट्र और धर्म की रक्षा में किया गया राष्ट्रीय कार्य है. जरा समझिए कि शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने क्या कहा है. ¨हिंदूवादी संगठन नहीं भी हों तो भी मजबूर किए गए तो लाख में एक हिंदू तो ऐसा निकलेगा जो राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठा लेगा.

यानी मालेगांव में प्रज्ञा सिंह ठाकुर और उनके साथियों ने बम विस्फोट कर के जो छह मुसलमानों को मारा और नब्बे को घायल किया तो यह तो राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए किया क्योंकि मुंबई, दिल्ली, बंगलूर, अमदाबाद आदि में मुसलमानों ने बम विस्फोट कर के राष्ट्र पर जो हमला किया उसका जवाब तो देना था. आपको याद होगा कि कभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता रहे राम माधव ने मालेगांव बम विस्फोट में पकड़ी गई साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और उनके साथियों के बारे में क्या कहा था. उनने बड़ी गंभीरता से कहा कि समाज को सोचना चाहिए कि प्रखर राष्ट्रवादी संगठनों से जुड़े लोग ऐसे काम करने को क्यों मजबूर होते हैं? क्योंकि वे राष्ट्र पर होते निरंतर हमलों को सह नहीं पाते और एक दिन हमलावरों को उन्हीं के तरीकों से जवाब देते हैं. यानी वे जो बम विस्फोट आदि की हिंसा करते हैं वह राष्ट्र को तोड़ने वाला आतंकवाद नहीं होता. वह राष्ट्र की रक्षा के लिए किया गया राष्ट्रीय कार्य है. यानी हिंदू हिंसा हिंसा न भवति. यह तो राष्ट्र रक्षा है.

इसीलिए आप देखिए कि ¨हदुत्ववादी अखबारों में लेख लिख कर बता रहे हैं कि मालेगांव जैसी घटनाएं तो वाजिब हिंदू क्रोध की अभिव्यक्ति हैं. हिंदू रोज-रोज देखते हैं कि जिहादी जहां चाहें तब बम विस्फोट करते हैं और हिंदुओं-बेकसूर हिंदुओं को मौत के घाट उतार देते हैं. पुलिस और खुफिया एजेंसियां कुछ नहीं कर पातीं. राज्य की रक्षा एजेंसियां कुछ नहीं करतीं. कांग्रेस और दूसरी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को मुसलमान वोट चाहिए क्योंकि उनके बिना वे सत्ता में नहीं आ सकती. आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे तो मुसलमान नाराज हो जाते हैं. उन्हें संतुष्ट रखने के लिए आतंकवाद के खिलाफ नरम रवया अपनाया जाता है. सख्त कानून नहीं बनाए जाते. लेकिन मारे जाते हैं हिंदू. वे कब तक सहन करें. उनका गुस्सा फूटता है तो मालेगांव होता है. हिंदुओं को ऐसी हिंसा करने को मजबूर किया जाता है. बाबरी मस्जिद गिरा कर और गुजरात कर के जिन राष्ट्रवीरों ने भारत के मुसलमानों के पास कोई चारा नहीं छोड़ा वही कह रहे हैं कि हिंदू आतंकवाद के कारण समझने की कोशिश करो.

सांप्रदायिक विचारधारा में माननेवाले हिंदुत्ववादी कहें कि हिंदू मजबूर किए जा रहे हैं तो आप समझ सकते हैं कि उन्हें अपनी सांप्रदायिक हिंसा को सही बताने का कारण चाहिए. लेकिन जब पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद अपना धर्म और अपना धार्मिक दायित्व भूल कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाषा में बोलने लगे और चेतावनी दें कि हिंदू उग्रवादी हुए तो तीसरा महयुद्ध हो जाएगा तो आप जैसे धर्मिक निष्ठा वाले हिंदू क्या करें? शंकराचार्य को कहें कि स्वामी अपने मठ में रहो. हमारे धर्म और राष्ट्र को हम देख लेंगे.  

Comments (5 posted):

तरुण गुप्ता on 21/11/08 10:33:34
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मुझे अभी तक एक बात समझ नही आती कि लोग अवधारणाओं और उसके प्रकारों को गढ़ने में इतने मशगूल क्यों हैं ? कि उन्हें ये भी ख्याल नहीं रहता कि वे उसी डाल को काट रहें हैं जिस पर कि वे बैठे हैं, और सब की तो छोड़िये इन लोगो ने आतंकवाद तक को भी नहीं बक्शा । उसके भी प्रकार निकाल लिये .। मुस्लिम आतंकवाद तो था ही , अब हिन्दू और ईसाई आतंकवाद भी आ गया ।
किस ने क्या कहा ये तो समझ आता है पर माफ कीजिये मुझे लेखक का दृष्टिकोण समझ नहीं आया। लेकिन इतने ज्वलंत मुद्दे पर आपने लिखा इसके लिये आप प्रशंसा के योग्य हैं।साथ ही एक सुझाव देना चाहूँगा कि ज्वलंत मुद्दों पर लिखते समय अपना कॉनसेप्ट क्लियर रखें ।
तोगड़िया ने क्या कहा , बजरंग दल का क्या मानना है , मुसलमान इस बारे में क्या सोचते है इन सबसे अलग एक लेखक का काम हैं सबके मत तो दे लेकिन साथ ही यह भी बताये कि वह इससे सहमत है या असहमत । एक महाशय ने आप पर कमेंट किया उन महाशय को इतनी अक्ल होनी चाहिये कि हर बात ( चाहे वह गाली ही क्यों न हो ) कहने का एक सही लहज़ा एक सही तरीका होता है । उन्हें यह सीखना चाहिये । अधिकतर भारतीय मुसलमान यह सीख रहें हैं । ज़रुरत बजरंग दल ,वी.एच.पी और संघ के समर्थक अधिकतर लोगों को इसे सीखने की है । और यदि वे इसे नहीं सीख सकते तो अपनी कट्टर संस्थाओं के साथ लगे सम्मानीय शब्दों (बजरंग , हिंदू , स्वयंसेवक आदि )का तो कम से कम अपमान न करें । ये मेरी उनसे ग़ुजारिश है ।
vinod mishra on 22/11/08 08:26:33
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हिंदू आतंकवाद और सेकुलरिस्म यानि खौफ की सियासत

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एक ही झटके में मालेगाँव धमाके के आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ,कर्नल पुरोहित और दूसरे आरोपियों को समझौता ब्लास्ट ,अजमेर शरीफ ब्लास्ट ,और देश में दूसरे धमाके का सरगना करार दिया जा रहा है । ठीक उसी तरह जब देश के अन्य भागों में सीरियल ब्लास्ट का सिलसिला जारी रहा और हर बार पुलिस मास्टर मैयंड को पकड़ लेने की दावा करती रही । ध्यान रहे कि पिछले दो वर्षों में २४ बड़े धमाके हुए हैं जिनमे कई मामले में अभीतक कोई गिरफ्तारी भी नही हुई है , तो कई मामले मे पुलिस चार्जशीट तक दायर नही कर सकी है , तो कई आरोपी सबूत के अभाव में कोर्ट से बरी कर दिए गए हैं । ये एक झलक है राज्य के खास पुलिस दस्ते और सीबीआई के इन्वेस्टीगेशन का । लेकिन ये जाँच प्रक्रिया सियासी पार्टियों के लिए मुद्दे जरूर बनते रहे हैं । मुंबई पुलिस और उसके ऐ टी एस ने इस बार एक मुद्दा बनाया है देश के सेकुलरिस्ट पार्टियों के लिए । यानि अभिनव भारत , विश्व हिंदू परिषद् ,बजरंग दल , आर एस एस और बीजेपी तथाकथित सेकुलर पार्टियों के निशाने पर है । मुंबई पुलिस अभीतक दस आरोपियों को गिरफ्तार किया है लेकिन हिंदू आतंकवाद का मामला राजधानी दिल्ली से निकलकर ब्रिटिश पार्लियामेंट तक गूंजने लगा है । यानि अन्तर राष्ट्रीय आतंकवाद में ये हिंदू आतंकवाद भी एक हिस्सा बन गया है । मीडिया मे लगातार विश्लेसन किया जा रहा है और बीजेपी को बैक फ़ुट पर होने की बात की कही जारही है । जाहिर है लाल कृष्ण आडवानी से लेकर उनके तमाम सहयोगी मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठा रहे है । सियासत का ये भी एक हिस्सा है । लेकिन सबसे अहम् बात इस बहस में छुट जाती है । क्या ये हिंदू आतंकवाद देश के सेकुलरिस्म की ताक़त है ? क्या इस देश में सेकुलरिस्म इसलिए कायम है क्योंकि सेकुलरिस्म हमारे संविधान में दर्ज है ? क्या तथाकथित सेकुलरिस्ट पार्टिया ने इस सेकुलरिस्म को अक्षुण बना रखी है ?ये हिंदू आतंकवाद का शब्द उन तथाकथित सेकुलरिस्ट पार्टियों ने चर्चा में लाया है जिनका muslim वोट से सीधा ताल्लुकात है । यानि संदेश है कि इस हिंदू आतंकवाद के खात्मे के लिए सेकुलर पार्टी को सत्ता में आना जरूरी है । यानि देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ ८५ करोड़ हिन्दुओं के साजिश को रोकना होगा ... । उग्र हिन्दुवाद और बीजेपी की ग़लत निति के कारण विवादित बाबरी मस्जिद गिराया गया । जिसका नतीजा आपके सामने हैं ..देश में बढ़ी आतंकवाद का यह मुख्या वजह माना जा सकता है । हो सकता है कि बाबरी मस्जिद गिराने का वाकया भावावेश का नतीजा हो लेकिन उस प्रचंड हिंदू उग्रवाद के कारन सबसे ज्यादा नुकसान बिहार और उत्तरप्रदेश को ही उठाना पड़ा । यानि तमाम सामाजिक आर्थिक विकास सेकुलर -कोम्मुनल वोट के नीचे दव गए । और इस घटना के बाद जो राजनितिक चेहरे और चरित्र हमारे सामने आए वह कमोवेश पुरे मुल्क के सामाजिक -आर्थिक प्रगति को प्रभावित कर रहे हैं । रही बात सेकुलरिस्म की तो हमें यह बात समझनी चाहिए की इस देश में जबतक हिंदू बहुसंख्यक हैं तभी तक इस देश का सेकुलरिस्म कायम है । वेस्ट से लेकर अरब तक पश्चिम एशिया से लेकर साउथ एशिया तक जहाँ भी दूसरे धर्मों की बहुतायत है धर्म का सीधा हस्तक्षेप राज्य पर है । मैं कतई धर्म का राज्य में हस्तक्षेप का समर्थक नहीं हूँ । लेकिन सेकुलरिस्म के खोखले दावे भारतीय समाज को दोहने पर खड़ा कर दिया है । आज भी देश के ६ लाख से ज्यादा ग्रामीण अंचलों में muslim त्यौहार और हिंदू त्योहारों में हर समुदायों की बराबर भागीदारी होती है । आज भी इन ग्रामीण अंचलों में ताजिया के लिए निकले जलूस में ज्यादा हिंदू नौजवानों की संख्या होती है । पीर फ़कीर के दरगाहों पर आज भी वहां muslim से ज्यादा तादाद हिन्दुओं की होती है । इस्लामिक आतंकवाद यहाँ कभी बहस का मुद्दा नहीं होता क्योंकि आतंक का कोई मजहब नही होता ॥ लेकिन जिस तरह से साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित का नाम लेकर हिन्दू आतंवाद को जोर शोर से प्रचारित किया जाता है यह भारत के गंगा -यमुनी तहजीब के लिए एक बड़ा खतरा जरूर हो सकता है । सियासत के लिए देश को दाव पर लगाने का यह सिलसिला बंद होनी चाहिए ।
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तथाकथित साधू-साध्वियों की आतंकवाद में लिप्तता यह दर्शाती है के आर.एस.एस. के बोए बीज से बने पेड़ कैसे फल दे रहे हैं. बजरंग दल, वी. एच. पी. और शंकराचार्य तो केवल बहाना है वस्तुतः देश में ऐसे हिन्दुओ की कोई कमी नही है जो संघ की विचारधारा से प्रभावित हैं और इस देश की तमाम समस्याओं के लिए मुसलमानों को दोषी ठहराते हैं. ऐसे लोग देश के इतिहास, समाज आदी की अपनी एक गली-सडी समझ रखते हैं और उस पर अंधभक्ति रखते हैं. जैसे १९३० के नाजी आतंकवाद का निशाना यहूदी थे और उसकी जर्मनी में शुरुआत बहुत पहले हो गयी थी वैसे ही ये कट्टर हिंदू भी देशभक्ति के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाकर एक ऐसे भारत की परिकल्पना करते हैं जिसमे सिर्फ़ हिंदू रीती-रिवाज़ हों और बाकी समुदाय भी हिन्दुओं को ही सबसे बेहतर कौम मानते हों या फिर देश छोड़ दें. इन को सिर्फ़ एक हिटलर की तलाश रहती है जो इन्हे मुसलमानों को मारने या भगाने का वायदा करे, ये उसे कभी बाल ठाकरे में ढूंढते हैं कभी किसी नरेंद्र मोदी में. यदि केन्द्र सरकार इस "साध्वी" और स्व-घोषित शंकराचार्य जैसे खतरनाक लोगो के आगे घुटने टेकने लगी तो इस देश की कोई मजबूत जड़ हिल जायेगी.
Ali on 24/11/08 12:06:56
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mujhe yeh baat samajh main nahi aati hai ki aaj chahe woh print media ho ya electronic media, sabhi yeh batane ki koshish kar rahe hain ki Advani, Rajnath aur Togadia jaise log hi hindu hain aur woh jo kah rahe hain wohi sare hindu ki awaz hai. Jab ki asliyat iske bilkul ulat hai. Main jitne bhi educated aur majority hindu se mila hoon sabhi yahi kahte hain ki yeh log hindu ke naam par apni dukan chala rahe hain jaise kuch log muslim ke naam par kar rahe hain. Mere aaj bhi 90% friends hindu hain aur maine kabhi bhi yeh feel nahi kiya ke unhe koi problem ho, woh bhi utne hi proud hain hamari dosti par jitna main unki dosti par hoon. Yahan sirf ek problem hai ki aaj hamare politicians ko desh se zyada apni kursi ki chinta hai aur unhe kisi bhi halat par kausi chahiye chahe woh kitne hi logon ke khoon se sani ho. Aaj zarrorat is baat ki hai ki hum hindu aur muslim dono apni rishtey aapas main zyada mazboot karain aur ek dosre ko personally samjhne ki koshish karen, kyonki hamen azadi bahut mushkil se mili hai aur hamen har haal main ise bachaye rakhna hai.
Vaidyakhatmal on 30/11/08 10:38:40
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Rajiv ne Babari masjidka darvajaa kya khoolvayaa,tamam musibatoNka darvaja khulvaya.
Advani,Bajpai company ne masjid to tori saath me pure deshme dange karvakar laghumatiyoNko,berahmise maaraa.Khaskar mumbai,surat.Amdavad mein.
202 me train jalwakar apna organised terror chalaya. rakha.burhe,bachche ,ex mp.shayar,pregnanat woman kisiko na chhora.Rape,murder,arson pe Inam bante gaye.Babubajrangi ,Kodnanai navaze gaye.
Suoreme courtka vswas Gujarat Judiciary se hat gaya.Firbhi Modi ko sharm na aai.
In logone aag to laga di ab Mohansingh ko buzhane ke liye kahte hain,aur pichhese agh lagate rahenge.
In me kisiko ab tak prosecute naheeN kiyagaya.
Tehalkane sting operation ,khufia vedeo se saaf sabut pesh kiye.
Magar aek terror ka vish chakra naheN roka,
Ab iski bahdh aa rahi hai.
Pakistan apne mulk mein hamle rok naheen paata,Hame kyaa mada karega,
jara sochke socho.
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