'जब तक किस्सागोई है, किताबें लिखीं और पढ़ी जाएंगी'
आपकी मनपसंद लेखन शैली क्या है?
ऐसी कोई भी शैली जिसमें भाषा के प्रयोग का आनंद हो, किस्सागोई हो, कुछ टेढ़ी, महीन बुनावट की कसरत हो, सघन भाव संसार हो. फिर वह चाहे रेणु की शैली हो या पामुक की.
इन दिनों क्या लिख-पढ़ रही हैं?
उम्बेर्तो इको की बौदोलिनो, रेणु की परती परिकथा फिर से, बोर्खेज की बुक ऑफ सैंड, बीच-बीच में साईनाथ की एवरी वन लव्स अ गुड ड्रॉट और नैयर मसूद की कहानियां. अंग्रेजी में एक उपन्यास पर काम करने का इरादा है.
कोई महत्वपूर्ण रचना जो अलक्षित रह गई.
बहुत हैं. साहित्य समाज के जोड़-तोड़ ऐसे गूढ़ रहस्य हों, ऐसा तो नहीं है, फिर किन रचनाओं को रेखांकित किया जाए और किन्हें गुमनामी अंधेरों मे ठेल दिया जाये उनका उस रचना की विशिष्टता से बहुधा कोई सीधा तार नहीं भी होता है.
रचना जिसे बेमतलब की शोहरत मिली.
पीली छतरी वाली लड़की.
रचना या लेखक जो आपके बेहद करीब हों?
परती परिकथा, आधा गांव, गर्दिशे रंगे चमन, सांन्ग लाईंस, इस्ट ऑफ ईडेन, इस्तांबुल,
अ टेल ऑफ लव ऐंड डार्कनेस, जुलूस, मित्नो मरजानी, लाल टीन की छत, कहा पाऊ उसे, काला जल.
किताबें पढ़ने की परंपरा बनी रहे, इसके लिए क्या किया जा सकता है?
जब तक किस्सागोई है, किताबें लिखीं जाएंगी और फिर पढ़ी भी जाएंगी. शायद ये समझना ज्यादा जरूरी है कि किताबें अन्य दृश्य या श्रव्य माध्यमों को रिप्लेस नहीं करेंगी या इसका उल्टा, बल्कि सब विधाएं अपनी अपनी जगह बनाए रखेंगी, उनकी अपनी अहमियत होगी. आजकल कितनी किताबें छपती हैं, ये आंकड़े मेरी बात को ज्यादा सही तरीके से साबित करेंगे. आज के बाजारवादी समय में प्रकाशक घाटे का सौदा तो नहीं करते होंगे.
गौरव सोलंकी





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Comments (2 posted):
आखिर बेमतलब कि शोहरत होती क्या है? वर्ष १९४६ में कुरुर्तुल-एन-हैदर की "आग का दरिया" को PEN USA Translation Fund Award दिया गया था उसके एक लम्बे अन्तराल के बाद कहीं २००५ में यह अवार्ड फिर किसी हिंदी लेखक को दिया गया और यह उदय प्रकाश कि "पीली छतरी वाली लड़की" थी यह बेवजह हो सकता है जरूरी नहीं कि कोई अवार्ड किसी पुस्तक को पर्याप्त वजहों के बाद ही दिया जाए और वैसे भी अवार्ड किसी पुस्तक के उत्कृष्ट होने का प्रमाण नहीं होते है नहीं तो हर दिन जो अवार्ड के लिए मारामारी होती है वह ना होती
अभी हाल ही में दुनिया भर के तमाम भाषाओं के पुस्तकों के सन्दर्भ में लोगों से राय मांगी जा रही है उस लिस्ट में पीली छतरी वाली लड़की का अंग्रेजी संस्करण भी शामिल है लेकिन इसे भी सर्वोत्कृष्ट का पैमाना नहीं माना जा सकता आजकल तो किसी भी बुक स्टाल पर जाओ बेस्ट सेलर कि भरमार लगी रहती है
पीली छतरी वाली लड़की का अंग्रेजी एवं जर्मन भाषा में अनुवाद तो हुआ ही तमाम भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद हो चुका है हालाँकि आजकल प्रकाशक जिस पुस्तक का देखो उसी पुस्तक का अनुवाद कराकर मार्केट में लांच कर दे रहें हैं जैसे अमरीशपुरी पर लिखे गए किताब के इंग्लिश अनुवाद का विमोचन मान्यवर अरुण महेश्वरी ने विश्व पुस्तक मेले के दौरान अभिनेता इरफ़ान खान से कराया लेकिन मुझे एक बात पता नहीं चली कि आखिर यह पुस्तक मूल भाषा में कब छप कर आई
बहरहाल एक खबर आई थी कि पीली छतरी वाली लड़की पर न्यूजीलैंड में एक फिल्म भी बनायीं जा रही है प्रत्यक्षा जी अगर ये सब बेवजह हो रहा है तो एक बार इस बेवजह की वजह जरूर तलाशनी चाहिए और इस तलाश में शायद आपको पीली छतरी वाली लड़की की सार्थकता का एहसास हो जाए
मेरे द्वारा बताई गयी सारी बातें बेवजह हो सकती हैं लेकिन जितनी बार मैंने पीली छतरी वाली लड़की पढ़ी उतनी बार मेरें आँखों के सामने बाज़ार का 'दर्शन' घूमने लगा है
i m newly at here but peeli chatri wali............ jaroor padhna chahoonga. jis book ke baare main itna likha gya hai wo kuch to khas hogi.
please help me @yadu.amit@gmail.com
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