Home | स्तंभ | अन्य स्तंभ | तहलका-फुल्का

तहलका-फुल्का

image

दुर्गति न कर दे यह ‘गति’

यह कैसी बयार बह रही है! किस दिशा से बह रही है! वह उतावली है या हम! वह उड़ा रही है हमें या हम स्वयं
Full story
image

इसे अपनी कहानी कदापि न समझें !

बजबजाता नाला. बजबजाते नाले के ऊपर मंडराता मच्छरों का झुंड. मंडराते हुए झुंड में तैरती उनकी आवाजें. तैरती आवाजों में कुछ आक्रोश के स्वर तो...
Full story
image

पाषाणों का आधुनिक काल

एक जगह अलग-अलग दिशाओं से आए हुए तीन पत्थर पडे़ थे. उनमें से एक गोल था, एक चकोर और एक नुकीला. थोड़ी ही देर में...
Full story
image

ऊपर से देखने में अच्छा दिखता है . . .

‘वहां से अपना देश कैसा दिख रहा है?’ प्रधानमंत्री ने पूछा. ‘ठीक-ठाक ही दिख रहा है.’ अंतरिक्ष यात्री ने ठंडी प्रतिक्रिया दी. प्रधानमंत्री निराश होकर...
Full story
image

‘अंधेरे का लाभ’

बचपन में जब बडे़-बुजुर्ग दूरदर्शन पर समाचार सुनते थे, तो विकल्प के अभाव में हमें भी उन सभी के साथ समाचार देखना पड़ता था. (उस...
Full story
image

अखिल भारतीय अश्रुमहोत्सव

एक ढेला उठाइए और उसे सनसना दीजिए! जिसे लगा देखिए वह आंसू बहा रहा है. अरे, अब अपराधबोध से ग्रस्त न हो जाइए! जो रो...
Full story
image

भांति-भांति के भूत

जैसे भांति-भांति के लोग होते है, वैसे ही भांति-भांति के भूत. इसलिए एक भूत गंभीर है तो दूसरा हंसोड़. दोनों का नेचर अलग, मगर समस्या...
Full story
image

कोने से हाशिये तक!

दृश्य-एक  लड़के के पिता जी के मित्र आए हुए थे. अब वे जा रहे हैं. लड़के के पिता जी ने ‘उधर से’ जाने से मना कर...
Full story
image

जाऊं कि न जाऊं!

जाऊं कि न जाऊं! जाने पर खतरा है न जाने पर भी खतरा! करूं तो क्या करूं! जाने दो, छींटाकशी तो रोज की बात है....
Full story
image

आम और आम

आम आदमी से यह देश पटा पड़ा है, जैसा कि हम सब जानते हैं. यत्र तत्र सर्वत्र आम ही आम नजर आते हैं. खास लोगों...
Full story