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उत्तर तो आप ही दे सकते हैं

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‘तर्क-वितर्क दोनों करें बाहर प्रस्थान और शोर-शराबा दोनों रहें अंदर विराजमान. अति शीघ्र बताओ उस स्थान का नाम?’ यह यक्ष का पहला प्रश्न था. युधिष्ठिर ने उत्तर दिया, ‘हे देव! वह स्थान विधानसभा के नाम से जाना जाता है.’ ‘पूरा-पूरा उत्तर देने की आपकी यथासंभव चेष्टा होनी चाहिए. विधानसभा के साथ यदि संसद भी जोड़ देते, तो आपका उत्तर पूर्ण होता.’ यक्ष ने युधिष्ठिर को जोर की डांट लगाई.

अब बारी दूसरे प्रश्न की थी. यक्ष ने पूछा, ‘जिस प्रकार एक प्रसिद्ध कहानी में राक्षस की जान स्वयं में न बस कर एक तोते में बसती थी, इसी तर्ज पर बताओ कि आज नेता की जान कहां बसती है?’ ‘कहां बसेगी! कुर्सी में और कहां.’ यक्ष उछल कर बोला, ‘सही उत्तर.’ ‘क्या सही उत्तर!’  युधिष्ठिर क्रोधित-से हो गए. बोले, ‘देव! आप इतने आसान-आसान सवाल पूछ रहे हैं, जिनका उत्तर देश का बच्चा-बच्चा जानता है. कुछ मेरे स्तर का पूछिए न! आखिर मैं धर्मराज हूं.’

यक्ष कोई कठिन प्रश्न सोचने के चक्कर में स्वयं उलझ गया. आखिरकार उसका चेहरा चमका. यक्ष ने पूछा, ‘युधिष्ठिर तुमने एक अति चर्चित गाना, पप्पू कांट डांस साला तो अवश्य सुना होगा.’ युधिष्ठिर ने सहमति जताई. यक्ष आगे बोला, ‘तो एक बात बताओ, पप्पू स्मार्ट है, बलशाली है, हेन-तेन है, लड़कियां भी उस पर थोक के भाव मरती हैं. मगर इतना होने पर भी वह हंसी का पात्र क्यों बना? उसके यार-दोस्त उसके नृत्य कला के परिपूर्ण न होने पर उसे उलाहना क्यों दे रहे हैं?’ प्रश्न व्याख्यात्मक टाइप था. युधिष्ठिर ने गहरी सांस अंदर खींची और एक ही सांस में सब बोल गए, ‘देखो भोले यक्ष, आज के जुग में नाचना आना अति आवश्यक है. यदि आप नाचना नहीं जानते तो आपकी धर्मपत्नी, आपकी प्रेयसी, आपके परिजन, आपके मित्र नाखुश रहेंगे. इन्क्रीमेंट-प्रमोशन के लिए आपके बॉस का खुश होना अति आवश्यक है. और बॉस लोग प्रायः अपने इशारे पर आपके नाचने से ही प्रफुल्लित होते हैं. इसलिए विद्वानों ने कहा है कि आपको जग से लाज नहीं आनी चाहिए और इतनी जोर से नाचना चाहिए कि घुंघरू टूट जाने चाहिए.’ युधिष्ठिर का अति विस्तारित उत्तर सुन कर अपने ताल का यक्ष ने पानी पिया. फिर यक्ष ने एक और प्रश्न उछाला, ‘न मानव न जानवर, न सुबह  न रात को, न आसमान न धरती पर जिसे मारा न जा सके, बताओ वह क्या? युधिष्ठिर ने एक हाथ अपने सीने पर रखा और एक भारी आह भरी और बोले, ‘महंगाई डायन.’ युधिष्ठिर के काॅमनसेंस को देख कर यक्ष मन ही मन उनके प्रति गदगद हो गया. थोड़ी देर गदगदाने के बाद यक्ष ने युधिष्ठिर से कहा, ‘अब रैपिड फायर रांउड होगा. और तुम्हें जल्दी-जल्दी उत्तर देना पडे़गा. यक्ष ने प्रश्नों की झड़ी लगा दी. ‘किस चीज के खो जाने पर व्यक्ति को दुख नहीं होता?’ युधिष्ठिर तपाक से बोले, ‘ईमान.’ ‘यशलाभ का एकमात्र उपाय क्या है?’ ‘फिल्मी आइटम सांग करना.’ ‘हवा से तेज कौन चलता है?’ ‘ शेयर मार्केट का ब्रोकर.’ ‘धर्म से बढ़कर संसार में और क्या है?’ ‘मुनाफा’ ‘पब्लिक अकसर भ्रष्ट नेताओं को कोसती रहती है, तब ऐसे में कोई अपराधी चुनाव कैसे जीत जाता है? यह प्रश्न सुनते ही युधिष्ठिर चुप हो गये. अभी तक युधिष्ठिर इस प्रश्न का उत्तर सोच रहे हैं और यक्ष उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा है. क्या इस देश की जनता उत्तर देने में युधिष्ठिर की मदद नहीं कर सकती?

-अनूप मणि त्रिपाठी

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