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समंदर : दो कविताएं

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1-

समंदर की लहरें भी

बहुत कुछ कह जाती हैं

आते जाते....

मसलन,

जिंदगी हारने का नाम नहीं,

मेरी ही तरह उठो

और आगे बढो

मंजिल के करीब पहुंच

तुम गिर जाओ तब भी

मत हारो हौसला...

मसलन,

दूर, बहुत दूर

चले जाने के बाद भी

बुलंदी के साथ

वापस आना सीखो

और अपने आगोश में ले लो

समय को भी तुम......!

2- 

जिंदगी भी तो कुछ कुछ

समंदर की लहरों की मानिंद

चलती है,

कभी-कभी हौले

तो कभी तेज

थपेडे दुख के

और झोंके सुख के

वैसे ही जैसे

ज्वार और भाटे

हां, एक बात

जुदा होना चाहिए

जिंदगी और समंदर में,

कभी जिंदगी में

समंदर सा

खारापन  न हो

कयोंकि फिर

मजा नहीं रह जाता

जीने का.....!

                                                        अतुल श्रीवास्तव

राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ के रहने वाले अतुल, एक निजी न्यूज़ चैनल में पत्रकार हैं.

'साहित्य की कोपलें ' उभरते हुए अंकुरों को खाद-पानी देने का एक छोटा सा प्रयास है. आप भी इस वर्ग के लिए अपनी रचनाएं (फोटो और संक्षिप्त परिचय के साथ) hindi@tehelka.com पर ईमेल कर सकते हैं या फिर नीचे लिखे पते पर भेज सकते हैं.

तहलका हिंदी, एम-76, एम ब्लॉक मार्केट, ग्रेटर कैलाश-2, नई दिल्ली-48

Comments (11 posted)

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sharad 04/09/2010 18:54:54
अतुल जी ...
मेरी जिंदगी के काफी पल समुन्द्र के आचल में ही गुजरे.
कभी समुद्र का धीर गंभीर शांत रूप , तो कभी रौद्र रूप,
समुद्र के साथ रहकर भी मुझे जिन्दगी का वह मानवीय
स्वरुप इतना समुद्र जैसा दार्शनिक होगा, अंदाज न था.
आपने अपने शब्दों में जीवन के कठोर तथ्य को पिरोकर
जीवन को गर्व से जीने के लिए ऐसा अनमोल उदाहरण
पेस किया है, वह अति सुन्दर है....

बाबा शरद
बनारस
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Amit Sharma 10/08/2010 09:32:27
Both of them are good... Good work.
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shifa 02/09/2008 12:09:34
kitni achchi kavita hai!
pehle kabhie nahi padhi thi!
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Dr.Chandrakumar Jain 01/09/2008 10:03:34
संवेदना के तारों में
जिंदगी की झंकार सिरजती
भावः पूर्ण रचनाएँ....बधाई अतुल.
ज़िंदगी और समंदर की चर्चा के बीच
ज़िंदगी के लिए समंदर से भी गहरा
अर्थ तलाश लेना मामूली बात नहीं है !
=============================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन
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nikhil 29/08/2008 17:38:31
www.hindyugm.com
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निखिल आनंद गिरि 29/08/2008 17:37:23
अतुल जी,
अच्छी कविता लगी...हमारे प्रयासों पर भी नज़र डालें और हमसे जुड़ें.....

निखिल आनंद गिरि
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mesay 28/08/2008 03:16:58
Wah..bahut khoob.
Bahut hi mazaa aagaya
wah mere yaar aur is tarah acchhe kavitayen likha karen!!
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sanjana 20/08/2008 18:04:59
बहुत सुंदर कविताएं आपने लिखी हैं अतुल जी. अभी शहरोज की भी www.raviwar.com में कविताएं देख रही थी. युवा वर्ग सुंदर कविताएं लिख रहा है.
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durgesh shukla 19/08/2008 12:43:23
bahut achchha laga
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sushil kumar chhoker 01/08/2008 15:30:11
बहुत खूब। जिंदगी के थपडो को समंदर से जोड़ क्या कमाल का लिखा है। पढ़कर अच्छा लगा।
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sharad kumar 28/07/2008 10:48:12
समुंदर की दो तरह से व्याख्या अच्छी लगी. समुंदर के पहले रूप में कवि ने जीने की कला को समुंदर के साथ जोडकर अच्छा प्रयास किया है साथ ही दूसरी आेर जिंदगी में सुख आैर दुख को एक ही सिक्के के दो पहलू बताते हुए जीवन को बहुत अच्छी तरह से परिभाषित किया है.
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