ख़ूबसूरत लड़कियां
खूबसूरत लड़कियां नहीं मिलतीं आसानी से होती हैं कई प्रतियोगिताएं मिस सिटी से मिस यूनिवर्स तक अब मिसेज भी होने लगी हैं इसके बावजूद नहीं मिलतीं उनके चेहरे पर लिपे होते हैं प्रायोजकों के लेप हर अंग पर लिपटी होती हैं आयोजकों की चिंदियां फिर भी नहीं होतीं वे खूबसूरत उनके चेहरे पर चमकता है बाजार अंतत: खारिज हो जाती हैं अगले साल खूबसूरत लड़कियां नहीं मिलती प्रतियोगिताओं से खूबसूरत लड़कियां जूझती हैं जीवन से उनके चेहरे पर चमकती हैं पसीने की बूंदें उनके दिल में होती है निश्छलता नहीं जानतीं वे बाजार भाव वे बिकाऊ नहीं होतीं राजू कुमार |
'साहित्य की कोपलें ' उभरते हुए अंकुरों को खाद-पानी देने का एक छोटा सा प्रयास है. आप भी इस वर्ग के लिए अपनी रचनाएं (फोटो और संक्षिप्त परिचय के साथ) hindi@tehelka.com पर ईमेल कर सकते हैं या फिर नीचे लिखे पते पर भेज सकते हैं.
तहलका हिंदी, एम-76, एम ब्लॉक मार्केट, ग्रेटर कैलाश-2, नई दिल्ली-48





Comments (66 posted)
कुछ बाते हैं जो यहां कुछ सवाल खड़े करती हैं । जैसे-
1.माँडल भी किसी की बहन,बेटी,बीवी,मां होती हैं।
2.उनकी नजरों में यही सफलता हैं कि लोग उन्हें जाने और उनकी तारिफ करें।
3.खुबसुरत लड़कियों का स्वभाव ही हैं कि वे ऐसी चींजो की तरफ ज्यादा आकर्षित होंती हैं।
4.बहुत सी लड़कियां वैसे तो फुली आधुनिक होती हैं पर दिल से,स्वभाव से और मन से अच्छीं होती हैं।
बिल्कुल मेरे और आपके परिवार की हर खुबसुरत लड़की की तरह।
saadhuwad.
js tomar
(1) jamino ke
(2) kamino ke
aur do hi chijo ke bhaav kam hue hai
(1) haseeno ke (ek se ek khoobsurat balaao ko tv,cinema aur internet par free me nangi dekho)
(2) paseeno ke
jo hindustan ki ijjat ko mitti mai milane ki kasam kha cuke hai
khubsurti chere par nakli hai par man to badsurti mai pura hi rang gya hai kavita usko nikhar sakti hai
thank u
-डा० जगदीश व्योम
NEVER LOVE A LOVE THAT HURTS, NEVER HURT A LOVE THAT LOVES.
बहुत अच्चा है प्रिये
कि तुम परलोक में हो
हमने और भी तलाशा है
हर रोज़ दो- चार इसी शहर में
तुम कितनी आसानी से मिल जाती हो
हमारी खून कि प्यास बुझाने को
और हमें "ठंडा गोश्त" पसंद भी नहीं
हे प्रिये तुम धन्य हो ,
पहले मेरी कुंठा के काम आई
फिर मेरी सनक के
और सबसे अधिक तो टी.आर.पी के
अब मै तुम्हारी कहानी बेचुंगा
फिर हम सब तुम्हे दोबारा सिल्वर स्क्रीन पर क़त्ल करेंगे
दिन में चार बार तुम्हारी अस्मत से खेलेंगे
दफ्तर में और चौराहे पर उसके कला पहलु पर चर्चा भी होगी
और उसी बीच दो चार और मिल जाएँगी
नै कहानी बेचने को
इसी शहर में आसानी से
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