दो कविताएं
योग योग कहीं भी कभी भी एक लंबी सांस लीजिए थोड़ा धैर्य रखिए, दूसरे के अपशब्दों को उसके संस्कारों का छिछलापन मानकर भूल जाईये, उनके बारे में सोचिए जो आपको पसंद हैं, उनकी खुशी को महसूस करिए जिनकी सरलता से आपको खुशी मिलती हो, अब सांस छोड़ दीजिए और खुद के अंदर छिपी अथाह शांति को महसूस कीजिए... सरकारी स्कूल की दीवारें सरकारी स्कूलों की दीवारें अक्सर ज्यादा उंची नहीं होती बड़ा आसान होता है उन्हें यूं ही फांदा जाना मुझे अपने स्कूल की दीवार कभी ज्यादा ऊंची नहीं लगी सरकारी तंत्र की हवा आसानी से यहां आती जाती रही जाति..धर्म का एहसास मास्टरों के दिमाग से होता हुआ अक्सर मेरे अंदर घुसपैठ करता रहा भ्रष्टाचार को गुरु शिष्य परम्परा के लबादे में.. कई बार सरकारी स्कूल की दीवारें फांद कर आते देखा.. मास्टरो की डांट अक्सर स्कूल की दीवारें फांद कर उनके घरों में ट्यूशन पढ़ने के लिए मजबूर करती रही.. आज भी जब अपने स्कूल की ओर से गुजरता हूं तो अपने भीतर की एक छोटी दीवार का एहसास हो जाता है... सुबोध राय |
सुबोध एक निजी न्यूज़ चैनल में कार्यरत हैं.
'साहित्य की कोपलें ' उभरते हुए अंकुरों को खाद-पानी देने का एक छोटा सा प्रयास है. आप भी इस वर्ग के लिए अपनी रचनाएं (फोटो और संक्षिप्त परिचय के साथ) mailto:hindi@tehelka.comपर ईमेल कर सकते हैं या फिर नीचे लिखे पते पर भेज सकते हैं.
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Comments (29 posted):
padh kar bahut khushi hui.
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की भूख की याद आ गई...
एक लंबी सांस लीजिए
थोड़ा धैर्य रखिए,
दूसरे के अपशब्दों को
उसके संस्कारों का
छिछलापन मानकर
भूल जाईये......... भूलने में ही अपनी भलाई है.
बहुत अच्छा लिखा है.
After going through the poem I feel proud to remember that I am known to you. But I also astonished that this personality of yours was deeply hidden within yourself. Best of luck for your future and kudos for beautiful and meaningful lines.
अक्सर
स्कूल की दीवारें
फांद कर उनके घरों में
ट्यूशन पढ़ने के लिए
मजबूर करती रही..
wah-wah SUBODH ji
Gazab ki FiQr or Soch ki UDAAN aapki rachna main mehsoos hui
ZINDGI ke Talkh Tajurbe jab NeeV main Daale jaate hain to IMARAT
NAYAAB banti hai....
aisa hi kuch mehsoos hua mujhe
Bhiyaa jo laga vo seedhe-seedhe kehne ki jurrat kar li
MUBARAK-BAAD Kubul Kijiye
Aafaq Ahmed
Khaskar masterwala to bahut hi badhiyaa hai.
Likhte rahiyega.
thanks, subodh
Simply great!! it's really difficult to understand it as per u'r mantel level. But i tried my best. But still expect u'r explanation.
सुबोध जी , आपको बधाई .
kavi ke dil me sachchayi he.
kalam ki takat ko jante hue,
bade sadgi se awaj uthayi he.
THANKS A LOT
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