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तुम्हारी बाँहों में मछलियाँ क्यों नहीं हैं और नॉस्टेल्जिया

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मेरा मन है कि मैं उसे कहानी सुनाऊँ। मैं सबसे अच्छी कहानी सोचता हूं और फिर कहीं रखकर भूल जाता हूं। उसे भी मेरे बालों के साथ कम होती याददाश्त की आदत पड़ चुकी है। वह महज़ मुस्कुराती है।

फिर उसका मन करता है कि वह मेरे दाएँ कंधे से बात करे। वह उसके कान में कुछ कहती है और दोनों हँस पड़ते हैं। उसके कंधों तक बादल हैं। मैं उसके कंधों से नीचे नहीं देख पाता।

- सुप्रिया कहती है कि रोहित की बाँहों में मछलियाँ हैं। बाँहों में मछलियाँ कैसे होती हैं? बिना पानी के मरती नहीं?

मैं मुस्कुरा देता हूं। मुस्कुराने के आखिरी क्षण में मुझे कहानी याद आ जाती है। वह कहती है कि उसे चाय पीनी है। मैं चाय बनाना सीख लेता हूं और बनाने लगता हूं। चीनी ख़त्म हो जाती है और वह पीती है तो मुझे भी ऐसा लगता है कि चीनी ख़त्म नहीं हुई थी। मैं सबसे अच्छी कहानी सोचता हूं और फिर कहीं रखकर भूल जाता हूं। उसे भी मेरे बालों के साथ कम होती याददाश्त की आदत पड़ चुकी है। वह महज़ मुस्कुराती है।

- तुम्हारी बाँहों में मछलियाँ क्यों नहीं हैं?

- मुझे तुम्हारे कंधों से नीचे देखना है।

- कहानी कब सुनाओगे?

- तुम्हें कैसे पता कि मुझे कहानी सुनानी है?

- चाय में लिखा है।

- अपनी पहली प्रेमिका की कहानी सुनाऊँ?

- नहीं, दूसरी की।

- मिट्टी के कंगूरों पर बैठे लड़के की कहानी सुनाऊँ?

- नहीं, छोटी साइकिल चलाने वाली बच्ची की। और कंगूरे क्या होते हैं?

- तुम सवाल बहुत पूछती हो।

वह नाराज़ हो जाती है। उसे याद आता है कि उसे पाँच बजे से पहले बैंक में पहुँचना है। ऐसा याद आते ही बजे हुए पाँच लौटकर साढ़े चार हो जाते हैं। मुझे घड़ी पर बहुत गुस्सा आता है। मैं उसके जाते ही सबसे पहले घड़ी को तोड़ूंगा।

मैं पूछता हूं, "सुप्रिया और रोहित के बीच क्या चल रहा है?"

- मुझे नहीं पता...

मैं जानता हूं कि उसे पता है। उसे लगता है कि बैंक बन्द हो गया है। वह नहीं जाती। मैं घड़ी को पुचकारता हूँ। फिर मैं उसे एक महल की कहानी सुनाने लगता हूं। वह कहती है कि उसे क्रिकेट मैच की कहानी सुननी है। मैं कहता हूं कि मुझे फ़िल्म देखनी है। वह पूछती है, "कौनसी?"

मुझे नाम बताने में शर्म आती है। वह नाम बोलती है तो मैं हाँ भर देता हूं। मेरे गाल लाल हो गए हैं।

उसके बालों में शोर है, उसके चेहरे पर उदासी है, उसकी गर्दन पर तिल है, उसके कंधों तक बादल हैं।

- कंगूरे क्या होते हैं?

अबकी बार वह मेरे कंधों से पूछती है और उत्तर नहीं मिलता तो उनका चेहरा झिंझोड़ने लगती है।

मैं पूछता हूं - तुम्हें तैरना आता है? वह कहती है कि उसे डूबना आता है।

मैं पूछता हूं - तुम्हें तैरना आता है?

वह कहती है कि उसे डूबना आता है।

और मैं आखिर कह ही देता हूं कि मुझे घर की याद आ रही है, उस छोटे से रेतीले कस्बे की याद आ रही है। मैं फिर से जन्म लेकर उसी घर में बड़ा होना चाहता हूं। नहीं, बड़ा नहीं होना चाहता, उसी घर में बच्चा होकर रहना चाहता हूं।

मुझे इतवार की शाम की चार बजे वाली फ़िल्म भी बहुत याद आती है। मुझे लोकसभा में वाजपेयी का भाषण भी बहुत याद आता है। मुझे हिन्दी में छपने वाली सर्वोत्तम बहुत याद आती है, उसकी याद में रोने का मन भी करता है।

उसमें छपी ब्रायन लारा की जीवनी बहुत याद आती है। गर्मियों की बिना बिजली की दोपहर और काली आँधी बहुत याद आती है। वे आँधियाँ भी याद आती हैं, जो मैंने नहीं देखी लेकिन जो सुनते थे कि आदमियों को भी उड़ा कर ले जाती थी। अंग्रेज़ी की किताब की एक पोस्टमास्टर वाली कहानी बहुत याद आती है, जिसका नाम भी नहीं याद कि ढूंढ़ सकूं। मुझे गाँव के स्कूल का पहली क्लास वाला एक दोस्त याद आता है, जिसका नाम भी याद नहीं और कस्बे के स्कूल का एक दोस्त याद आता है, जिसका नाम याद है, लेकिन गाँव नहीं याद। वह होस्टल में रहता था। उसने 'ड्रैकुला' देखकर उसकी कहानी मुझे सुनाई थी। उसकी शादी भी हो गई होगी...शायद बच्चे भी। वह अब भी वही हिन्दी अख़बार पढ़ता होगा, अब भी बोलते हुए आँखें तेजी से झिपझिपाता होगा।

लड़कियों के होस्टल की छत पर रात में आने वाले भूतों की कहानियाँ भी याद आती हैं। दस दस रुपए की शर्त पर दो दिन तक खेले गए मैच याद आते हैं। शनिवार की शाम का 'एक से बढ़कर एक' याद आता है, सुनील शेट्टी का 'क्या अदा क्या जलवे तेरे पारो' याद आता है। शंभूदयाल सर बहुत याद आते हैं। उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम क्रिएटिव हो और मैं उसका मतलब जाने बिना ही खुश हो गया था। एक रद्दीवाला बूढ़ा याद आता है, जो रोज़ आकर रद्दी माँगने लगता था और मना करने पर डाँटता भी था। कहीं मर खप गया होगा अब तो।

वह कंगूरे भूल गई है और मेरे लिए डिस्प्रिन ले आई है। उसने बादल उतार दिए हैं। मैंने उन्हें संभालकर रख लिया है। बादलों से पानी लेकर मेरी बाँहों में मछलियाँ तैरने लगी हैं। हमने दीवार तोड़ दी है और उस पार के गाँव में चले गए हैं।

कुछ देर बाद वह कहती है – मिट्टी के कंगूरों पर बैठे लड़के की कहानी सुनाओ।

मैं कहता हूं कि छोटी साइकिल चलाने वाली लड़की की सुनाऊँगा। वह पूछती है कि तुम्हें कौनसी कहानी सबसे ज़्यादा पसन्द है?

मैं नहीं बताता।

गौरव सोलंकी

(ब्लॉगिंग की दुनिया में सक्रिय गौरव सोलंकी एक आई टी कंपनी में कार्यरत हैं.)

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Comments (15 posted)

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Razia 04/09/2008 10:15:29
ये कहानी बडी ग़हराइ से लिखी गइ है।हमारे आसपास बनते-बिगडते रिश्तों की शायद यही सच्चाइ है।गौरव को अभिनंदन। दिल को छू लेने वाली कहानी के लिये।
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javed akhtar:chholase 08/09/2008 16:13:14
aajab kalpana hai jeesa padna ka bad ajeeb khyalt aata hai thanks GAURAV
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uday 18/09/2008 16:25:36
लगे रहो, सफलताएँ मिलेंगी ।
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menka 06/10/2008 09:28:32
gaurav aapne bahut achcha likha hai.... best of luck....
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raish ahmad lali 17/10/2008 22:41:53
bhai gaurav, bahut achha laga padhkar. aapke shabdon me puri taswir aankhon ke samne ghum gayee. laga jaise sab kuch saamne hai. meri bilkul apni yaadon sa. puri kahani ka flavour itna behtarin hai ki kya kahun? aap masino se khelne wale hain, lekin jazbaton ki itni gehraai, laajawab. aur likhen aisa hi.
raish ahmad lai
print journalist
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gaurav 26/11/2008 07:50:04
gaurav , acha likhte ho
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chandan pandey 27/12/2008 08:21:52
good.
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nirmla.kapila 06/02/2009 08:28:12
bahut sunder kahani hai ham bhi is me doob gaye they
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abhinav jha 10/02/2009 05:36:14
मैं पूछता हूं - तुम्हें तैरना आता है? वह कहती है कि उसे डूबना आता है।
adbhut
subhkamnao ke sath
Abhinav jha
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Neeraj badhwar 13/02/2009 14:23:11
बहुत अच्छा लिखा है।
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