खेल
कर्म की वीरता, भाग्य की क्रूरता
क्रिकेट के इतिहास में राहुल द्रविड़ की क्या जगह होगी? क्या उन्हें एक सर्वश्रेष्ठ सहायक स्तंभ के रूप में याद किया जाएगा या फिर एक
वीरू जहां, जय है वहां
आखिर ऐसा क्या है जो वीरेंद्र सहवाग को सज्जनों के इस खेल का सबसे विध्वंसक खिलाड़ी बना देता है. सुरेश मेनन का आकलन...‘एक फोटो के आधार पर मीडिया ने आधारहीन खबरें छापीं’
विरेंदर सहवाग वैसी ही पारी बार-बार खेलना चाहते हैं जिसकी वजह से उन्हें मुल्तान का सुल्तान कहा जाने लगा. वह पारी उन्होंने 2004 में खेली ...कर्म की वीरता
टेस्ट क्रिकेट द्रविड़ के मिजाज से मेल खाता है. जैसे उनसे पहले गावस्कर और उनसे भी पहले विजय हजारे और मर्चेंट के मिजाज से खाता ...‘मुझे घिसट-घिसटकर चलते रहने की जरूरत नहीं है.’
क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर गुमनामियत के चंद दुर्लभ क्षणों के दौरान सैम पिलगर से टी-20 क्रिकेट, रिटायरमेंट और खेल के लिए अपने जुनून सहित तमाम मुद्दों पर बात कर रहे हैं...ऑफ साइड के देवता की दीनता
बोरिया मजूमदार मानते हैं सौरव गांगुली के बढ़िया खेल का मजा केवल फ्लैशबैक में ही लिया जा सकता है...आत्मविश्वास से लबरेज
क्या महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम भारत की अब तक की सर्वश्रेष्ठ टेस्ट टीम है? बता रहे हैं वरिष्ठ किक्रेट समीक्षक सुरेश मेनन ...ये कैसा क्रिकेट?
लाहौर में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हमले के बाद दुनिया के इस हिस्से के सबसे पसंदीदा खेल पर इसका क्या असर पड़ सकता है, जानने का प्रयास कर रहे हैं शांतनु गुहा रे...कलाई से निकली जादुई तान को सम्मान
दुनिया के सर्वाधिक आकर्षक बल्लेबाजों में शुमार जीआर विश्वनाथ को सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिए जाने का उत्सव मनाते शांतनु गुहा रे...खेल में बदलाव और बदलाव में खेलना
क्रिकेट का इतिहास देखें तो खेल में लगातार महत्वपूर्ण बदलाव आते रहे हैं और क्रिकेट ने इन्हें पूरी उदारता के साथ समाहित किया है. जीवन ...- यहां सेक्स टैबू है, स्त्री के लिए
- आतंक के मोहरे या बलि के बकरे ?
- कब जागेंगे हम?
- 'मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं है'
- एक हवेली, एक कहानी
This article shows that tehelka magazine openly support terrorist people working in India.Court work only on proof.This terrorist people are well train in ...
ALL MEN AND WOMEN ARE BIND WITH THE STARS AS PER THE CONDITION OF PLANET AT THE TIME OF BIRTH. HOW MUCH IS ONE ADVACE ...
mai samjhataa hoo. ki sabkuch ho lekin khoonkharaaba nahi hona chahiye, sabko bolne ka mauka milna chahiye kisi ki jameen par jabran kabjaa nahi hona ...
yah abheemanyu nahi balki arjun hai, jine bas apana lakshya dhayan hai or vah lakhchya hai ..imandar prashashan ..fir natija chahe kuch bhee ho !
Aaj se agar 100 saal baad electronic channels (khaskar Hindi) ka itihaas likha jaayega toh usmen is kaal ko bhooton, kutte-billiyon, Naach-gaanon aur thumkon ka ...


