खेल

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कोई दूसरा नहीं

मुरलीधरन भी अपने खेल की सरहद फलांगकर उस आकाशगंगा का हिस्सा हो गए हैं जिससे खेलों की मनुष्यता बनती है, उसकी विराटता झांकती है
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फुटबॉल की एक समृद्ध नर्सरी

कभी फुटबॉल की नर्सरी कहे जाने वाले देहरादून में इस खेल को फिर से जिंदा करने की कोशिशें हो रही है. मनोज रावत की रिपोर्ट...
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वो भूली दास्तां...

कभी भारत एशिया की सबसे तगड़ी फुटबॉल टीम हुआ करता था और यह टीम 1950 के विश्व कप में हिस्सा लेते-लेते रह गई थी. भारतीय फुटबाल के उन स्वर्णिम दिनों को याद कर रहे हैं नोवी कपाड़िया...
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खेल की खामोश क्रांति

झारखंड के एक छोटे-से गांव में सौ से भी ज्यादा आदिवासी लड़कियां और फ्रैंज गेसलर भारत में फुटबॉल का सुनहरा भविष्य गढ़ने की कोशिशों में लगे हैं. शांतनु गुहा रे की रिपोर्ट...
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जहां 'गोल' है जहां

सारी दुनिया की तरह भारत में भी इन दिनों फुटबॉल विश्व कप का खुमार है. यह विशेष प्रस्तुति देश के उन उजले कोनों को देखने की कोशिश है जो अपने यहां इस खेल पर छाई नाउम्मीदी की घनी बदरी में कहीं-कहीं पर नजर आते हैं....
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खेल खतम, पैसा हजम

आईपीएल घोटाले की बढ़ती प्रेतछाया के बीच ललित मोदी का कोई दांव नहीं चल पा रहा. क्यों? बता रहे हैं शांतनु गुहा रे ...
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क्रिकेट की कप्तानी में देश की कहानी

कप्तान के तौर पर धोनी की असाधारण सफलता को अगर व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो देश में आ रहे और आने वाले बदलाव के संकेत साफ नजर आते हैं...
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कर्म की वीरता, भाग्य की क्रूरता

क्रिकेट के इतिहास में राहुल द्रविड़ की क्या जगह होगी? क्या उन्हें एक सर्वश्रेष्ठ सहायक स्तंभ के रूप में याद किया जाएगा या फिर एक ...
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वीरू जहां, जय है वहां

आखिर ऐसा क्या है जो वीरेंद्र सहवाग को सज्जनों के इस खेल का सबसे विध्वंसक खिलाड़ी बना देता है. सुरेश मेनन का आकलन...
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‘एक फोटो के आधार पर मीडिया ने आधारहीन खबरें छापीं’

विरेंदर सहवाग वैसी ही पारी बार-बार खेलना चाहते हैं जिसकी वजह से उन्हें मुल्तान का सुल्तान कहा जाने लगा. वह पारी उन्होंने 2004 में खेली ...
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