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ये कैसा क्रिकेट?

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लाहौर में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हमले के बाद दुनिया के इस हिस्से के सबसे पसंदीदा खेल पर इसका क्या असर पड़ सकता है, जानने का प्रयास कर रहे हैं शांतनु गुहा रे

गद्दाफी स्टेडियम से निकल कर पाकिस्तानी वायु सेना के अज्ञात हवाई अड्डे पर पहुंचने के कुछ ही सेकेंड्स के भीतर सारे श्रीलंकाई खिलाड़ी वहां स्थित एक मात्र टेलीफोन बूथ पर लाइन लगा कर खड़े हो गए, वहां अंतर्राष्ट्रीय काल करने की सुविधा थी. खिलाड़ियों के चेहरे से उड़ रही हवाइयां कुछ देर पहले उनके साथ हुए दिल दहलाने वाले हादसे की चुगली कर रही थीं. उपकप्तान कुमार संगकारा ने तहलका  को बताया, ‘हमें सबको बताना था कि हम जिंदा हैं.’

पाकिस्तान के राष्ट्रीय ताने-बाने को काफी हद तक लील चुकी इस आग ने अब क्रिकेट को भी अपना निशाना बना  लिया है

टीम के कोच ट्रेवर बेलिस ने इससे कुछ देर पहले ही एक क्रिकेट वेबसाइट से बातचीत में  धमाकों और मशीनगन से गोलियां चलने की आवाजों आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैं जमीन पर लेटा सोच रहा था कि मैं इस वक्त कुछ नहीं कर सकता.’

बेलिस के ये शब्द इस घटना के बाद पूरे उपमहाद्वीप में क्रिकेट के खेल में आने वाले ठहराव का संकेत देते हैं. सरेआम गोलियों की बौछार करते आतंकवादी, ड्यूटी पर मौजूद पुलिसवालों की मौत, खेल के मैदान से खिलाड़ियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उतरता हुआ सेना का हेलीकॉप्टर और जहां-तहां बिखरे खाली कारतूस के खोखों की तस्वीरों ने क्रिकेट की दुनिया को सदमे में डाल दिया है. स्टेडियम के भीतर पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान यूनिस खान ने जब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा,  ‘सर, अब हम क्या करें?’  तो कोई कुछ जवाब देने की स्थिति में ही नहीं था.

कुछ देर बाद ही परेशान-हाल यूनिस खान पांव पटकते हुए ऑफिस से बाहर निकले और गोलियों से बिंधी पड़ी बस को देखते हुए घर रवाना होने के लिए अपनी कार में जा बैठे.  उत्सुकतावश वहां खड़े किसी व्यक्ति ने उनसे पूछ लिया कि क्या सच में बस ड्राइवर ने बस का रास्ता बदल दिया था. यूनिस उसकी बात पर ध्यान दिए बिना ही बाहर निकल गए - और पाकिस्तान क्रिकेट अपने सबसे बुरे संकट में फंस गया. 

दुख और दहशत का अनुमान उन ब्लॉग्स से भी लगाया जा सकता है जो तूफान गुजरने के कुछ ही घंटों बाद इंटरनेट पर इस हादसे से जुड़ी चर्चाएं करने लगे थे. कराची के एक अखबार के मुताबिक शाम तक इनकी संख्या 7000 से भी ज्यादा थी और ये लगातार बढ़ती ही जा रही थी. ‘पाकिस्तान के राष्ट्रीय ताने-बाने को काफी हद तक लील चुकी इस आग ने अब क्रिकेट को भी अपना निशाना बना  लिया है,’ कराची के न्यूरोलॉजिस्ट साद शफाक़त भावुक होकर लिखते हैं शफाकत जावेद मियांदाद के जीवनी लेखक भी हैं.

‘क्रिकेट लगभग खत्म हो चुका है, 2011 विश्वकप की मेजबानी अब दूर की कौड़ी है’ पूर्व पाकिस्तानी कप्तान वसीम अकरम कहते हैं

हड़बड़ाए पीसीबी ने पहले तो ये कह कर पल्ला झड़ने की कोशिश की कि हमला रोकना प्रबंधन के नियंत्रण के बाहर था लेकिन बाद में जब ब्रिटिश अखबार गार्डियन ने खबर दी कि सरकारी मशीनरी को स्थानीय पुलिस की तरफ से विशिष्ट जानकारी दी गई थी जिसके मुताबिक आतंकवादी श्रीलंकाई टीम को निशाना बनाने की फिराक में थे, तब उन्होंने चुप्पी साध ली. पेपर ने 22 जनवरी के एक पत्र का हवाला दिया था जिसमें टीम के ऊपर हमले की योजना की बात कही गई थी लेकिन इसी दौरान पंजाब में राजनीतिक संकट खड़ा हो जाने की वजह से इस ओर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया. ‘किसी ने भी सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम की परवाह ही नहीं की’  पंजाब की बर्खास्त सरकार के महत्वपूर्ण सदस्य रहे परवेज राशिद ये बात द डॉन से कहते हैं.

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष डेविड मॉर्गन ने पाकिस्तान को वर्तमान में दुनिया का सबसे खतरनाक स्थान बताया है और ये भी कहा है कि अगर पाकिस्तान को कोई अंतर्राष्ट्रीय आयोजन करना है तो उसे अपने यहां स्थितियों में आमूल-चूल बदलाव लाना होगा. ‘पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट का तब तक सवाल ही नहीं पैदा होता जब तक कि वहां कोई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को नहीं मिलता’  लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में एक खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन में मॉर्गन ये कहते हैं.

क्रिकेट की नियामक इकाइयों में इस तरह के भय का सीधा असर आयोजकों पर भी पड़ रहा है. दुबई में टेन स्पोर्ट्स चैनल का संचालन करने वाले ताज टेलीविजन नेटवर्क (फिलहाल जी टेलीफिल्म्स का हिस्सा) के संचालकों ने आपस में बैठक करके इस पर विचार किया कि क्या पिछले साल पीसीबी के साथ हुए 14 करोड़ डॉलर के समझौते को बचाने का सबसे अच्छा तरीका ये है कि सारे मैच मध्य-पूर्व के किसी देश में आयोजित किए जाएं. ‘क्रिकेट लगभग खत्म हो चुका है, 2011 विश्वकप की मेजबानी अब दूर की कौड़ी है’ पूर्व पाकिस्तानी कप्तान वसीम अकरम कहते हैं.  

अजीब विडंबना है. दक्षिण एशिया - जहां इस खेल के  प्रति लोगों में हद से ज्यादा जुनून है - में ही क्रिकेट संकट में है. यहां बताने की जरूरत नहीं कि इस खेल को चलाने के लिए जरूरी अरबों डॉलर के प्राणदायी ईंधन की आपूर्ति यहीं से होती है. इंडियन प्रीमियर लीग के मुखिया ललित मोदी ने जैसे ही हमले की खबर सुनी वे खाना छोड़कर फोन पर व्यस्त हो गए. एक फोन उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी निकोलस स्टाइन को किया जिनकी कंपनी ने आईपीएल के पहले संस्करण के सुरक्षा प्रबंधन का जिम्मा संभाला था. मोदी जानना चाहते थे कि मौजूदा स्थितियों में जब खतरा इस हद तक जा पहुंचा है क्या स्टाइन का दल इससे निपट सकता है.

मोदी की चिंता की और भी वजहें थी. गृहमंत्री पी चिदंबरम ने उनसे पूछा था कि क्या अप्रैल से शुरू होने जा रहे आईपीएल के द्वितीय संस्करण को टाला जा सकता है. मोदी का शुरुआती रुख नकारात्मक था क्योंकि आगे मानसून का महीना है जिसमें टूर्नामेंट कराना संभव नहीं है दूसरे भारत को बीसम-बीस क्रिकेट का चैंपियंस कप भी आयोजित करना है. इसके बाद श्रीलंका में ट्राई सीरीज खेलनी है फिर जून में इंग्लैंड में होने वाला बीसम-बीस विश्व कप भी है. ‘फिर समय ही कहां बचता है?’ मोदी सवाल करते हैं. कोलकाता नाइट राइडर्स के जॉय भट्टाचार्य कहते हैं, ‘1000 करोड़ से ज्यादा रूपए दांव पर लगे हैं, ऐसे में एक झटके में टूर्नामेंट स्थगित कर देना कोई समझदारी नहीं है.’

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड जिसकी 2002 के पाकिस्तान दौरे के समय आतंकवाद से सीधी मुठभेड़ हो चुकी है, ने इस साल के अंत में होने वाले पाकिस्तान दौरे को रद्द कर दिया है. 2002 में कराची में उनके होटल के ठीक बाहर एक जबर्दस्त धमाका हुआ था और न्यूजीलैंड ने दौरा बीच में ही रद्द कर दिया था. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान के साथ अगले महीने होने वाली सीरीज को तो यूएई में कराने को सहमति दी है लेकिन वह अगले साल होने वाली टेस्ट श्रंखला को इंग्लैंड में करवाना चाहता है. इससे पहले भारत और वेस्टइंडीज ने भी पाकिस्तान के दौरे रद्द कर दिए थे. अतीत में टीमों का आतंकवाद से पाला दूर-दूर से ही पड़ा था पर श्रीलंकाई टीम को सीधे निशाना बनाने के बाद से पाकिस्तान बहिष्कार के गंभीर खतरे से घिर गया है. एक के बाद एक विदेशी टीमों के दौरा रद्द करने के  चलते अब पाकिस्तानी टीम को लंबे समय तक मेहमान टीम के रूप में ही घूमना पड़ेगा.

सवाल उठता है कि ऐसे में क्रिकेट का क्या होगा? कई तरफ से विरोध के बावजूद 2004 में पाकिस्तान दौरे को संभव बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाने वाले बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया इसे बेहद दुविधा की स्थिति मानते हैं, ‘हम फिर से शून्य पर पहुंच चुके हैं और मुझे लगता नहीं कि यहां से वापस लौटना आसान होगा’ वो कहते हैं. 

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