' मेरी फिल्म पसंद नहीं आई तो आपको बाद में कभी कॉफी पिला दूंगा'
फिल्म समीक्षक से फिल्म निर्देशक बने सुधीश कामथ की नई फिल्म गुड नाइट, गुड मॉर्निंग देखना ऐसा अनुभव है मानों आप चोरीछिपे एक लड़के और...आयोग करे, विपक्ष भरे
चुनाव आयोग द्वारा मायावती की मूर्तियों और हाथियों को ढकने का आदेश क्यों विपक्षी पार्टियों को भारी पड़ सकता है? अतुल चौरसिया का विश्लेषण...सदिच्छा का सत्यानाश
सैकड़ों करोड़ रु की जिस रकम से बिहार के स्कूलों की तस्वीर बदल सकती थी उसका ज्यादातर हिस्सा भ्रष्टाचारियों की जेब में चला गया. इर्शादुल...यह शहर नहीं दिल्ली है
100 साल की अल्हड़ राजधानी दिल्ली आज भी दिलवालों का शहर है या दिल के बीमारों का या फिर कुछ और? गौरव सोलंकी की रिपोर्ट ...नियुक्ति बनी नाक का संकट
वे कौन-से सवाल हैं जिनका अनुत्तरित रहना मध्य प्रदेश में लोकायुक्त नियुक्ति प्रक्रिया को संदिग्ध बना रहा है, बता रहे हैं बृजेश सिंह...चुनाव की चुनौतियां
चुनावी माहौल के दौरान उत्तराखंड में पार्टी विचारधारा और अनुशासन पर जिस तेजी से अवसरवाद हावी होता दिख रहा है उससे लगता है कि राज्य अपने अग्रज उत्तर प्रदेश को टक्कर देने की राह पर है. महिपाल कुंवर और मनोज रावत की रिपोर्ट...-
' राम तेरे बंदों से कांपते हुए '
गीतिकाराम तेरे बंदों से कांपते हुए,जिया किए राम-राम जापते हुए.जीवन के बोझ तले दबे-कुटे हम,दुनिया भर रंज-ग़म अलापते हुए.दूर खड़ी खुशियों की टोह-टोहकर,हासिल का इंच-इंच -
कर्मन की गति न्यारी
कर्ज की हमको दवा बताई कर्ज ही थी बीमारी, साधो!कर्मन की गति न्यारी.गेहूं उगे शेयर नगरी में खेतों में बस भूख उग रही मूल्य सूचकांक
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खुश रहने का सूत्र
माफ कीजिएगा, आप खुश होना ही नहीं चाहते. आपको तो बस चिकचिक-किचकिच करना है. क्या कहा! आप खुश होना चाहते हैं. मगर कैसे? आपके 'कैसे' -
गांधी-वेवेल वार्ता, स्वर्ग लोक में
देशभक्त, लेखक को माफ करें कि वेवेल (1943 से 1947 तक भारत का वायसरॉय) को भी स्वर्ग में दिखाया गया है, मगर मैं क्या करता
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ऐसे तो सौ भी भले होंगे
छोटे राज्य भला किसे पसंद नहीं आएंगे? पर आज वे जिस बड़े ढांचे में से तोड़कर बनाए जा रहे हैं उसके सारे दोष वे अपनी कुंडली में लेकर ही जन्म लेते हैं -
मातृभाषा
जैसे चींटियां लौटती हैं बिलों में कठफोड़वा लौटता है काठ के पास वायुयान लौटते हैं एक के बाद एक लाल आसमान में डैने पसारे हुए हवाई अड्डे की ओर ओ मेरी भाषा मैं
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‘स्वर्णा की कहानी नौकरानी से उघमी होने की कहानी है’
हम दोनों एक ही उम्र के थे और साथ-साथ बढ़े हुए थे. बचपन में हम आधी बनी इमारत के सामने मौजूद रेत के टीलों पर -
‘ जाहिदे तंग नजर ने काफिर मुझे समझा...’
जीवन में खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ कुछ ऐसे तीखे और कटु अनुभव भी होते हैं जिनके बाद लगता है कि शिक्षा, डिग्री और समाज के
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गौवध विरोधी आंदोलन : गुलजारीलाल नंदा का इस्तीफा
जिसने पहली बार इंदिरा गांधी को कांग्रेस पार्टी पर पकड़ मजबूत करने का मौका दिया -
डाकू गब्बरा सिंह : पं नेहरू के जन्मदिन का तोहफा
चंबल का डाकू जिसकी मौत की खबर तत्कालीन प्रधानमंत्री को उनके जन्मदिन के तोहफे के रूप में दी गई थी
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' यह विज्ञापन के दौर है जिसमें किताबों का बेवजह नाम हो जाता है'
आपकी पसंदीदा विधा कौन-सी है? शुरू में कविताएं लिखता था. अब आलोचना और संस्मरण लिखता हूं. हाल में हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की संस्मरणात्मक जीवनी लिखी -
'बहुत पढ़ने की चाहत नहीं है. बहुत चुनकर पढ़ता हूं.'
आपकी पसंदीदा विधा कौन-सी है?पढ़ने की मेरी यात्रा उपन्यास से शुरू हुई, बचपन से. तब चोरी-चुपके गुलशन नंदा और वेद प्रकाश के उपन्यास पढ़ता था.
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mo.khalid, 05/02/2012 04:54:38
mo.khalid
maen ulmacuncil ko tahe dil se sukriya ada kara hun aur maen is party se bahot santust hun aur kabhi bhi meri jarorat padi to ...
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abuobaid, 05/02/2012 04:44:58
abuobaid
maen ulmacouncil ke liye bhot bahot duaa karta hun
maen (abuobaid mo. khalid saefullah)
bilariyaganj azamgarh
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नरेंद्र तोमर , 04/02/2012 13:39:30
नरेंद्र तोमर
आज के इस बेहद निराश और हताश तक करने वाले राजनीतिक और सामाजिक माहोल में आप का यह कथन बिलकुल सही है,''आज की कांग्रेस उदारवादी, ...
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Kitchen Planner, 03/02/2012 22:11:15
Kitchen Planner
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