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   ‘तजुर्बे को मुद्दा बनाना हिलेरी की चूक’
जानी मानी पत्रकार और क्लिंटन दंपत्ति की जीवनीलेखिका टीना ब्राउन ने हाल में राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन की लड़ाई लड़ रही हिलेरी क्लिंटन के चुनाव प्रचार के दौरान उनके साथ 14 शहरों की यात्रा की. शोमा चौधरी को दिए एक साक्षात्कार में टीना बता रही हैं हिलेरी के व्यक्तित्व और उनके चुनावी अभियान की बारीकियों के बारे में.
क्लिंटन दंपत्ति की जीवनी लिखने में आपकी दिलचस्पी लंबे समय से थी या अचानक ही आपने ऐसा करने की सोची?
क्लिंटन दंपत्ति पिछले 16 साल से अमेरिका के राजनीतिक परिदृश्य में छाए रहे हैं और लगता है कि उनकी ये छाप आगे भी जारी रहेगी. उनमें कुछ बात है जो आपको लगातार मंत्रमुग्ध करती रहती है. जब भी आप ये सोचते हैं कि उनका आकर्षण खत्म हो रहा है तो उनमें से किसी एक के निजी या राजनैतिक जीवन में कोई नई हलचल होती है और वो फिर से चर्चा का विषय बन जाते हैं. मेरी दिलचस्पी उस मीडिया संस्कृति में भी है जो इन दोनों के जीवन से जुड़ी घटनाओं के फलस्वरूप पैदा हुई. मसलन बिल क्लिंटन पर चलाया गया महाभियोग जिसके दौरान इंटरनेट पर चटखारा संस्कृति को ताकत मिली.
हिलेरी के चरित्र को कैसे बयां करेंगी?
अभी मैं इस पर कुछ नहीं बोल सकती. इसका जवाब मैं तभी दे पाउंगी जब इस किताब का लेखन पूरा हो जाएगा.
आप हिलेरी के चुनाव अभियान में उनके साथ रही हैं. क्या है उनका मजबूत और कमजोर पक्ष?
उनकी ताकत है मुश्किल हालात में भी खुद को संयत रखने की अविश्वसनीय क्षमता. चुनावी अभियान को कवर कर रहे तमाम पत्रकारों से आप ये पूछ सकती हैं जिन्हें हिलेरी ने कभी कोई मौका नहीं दिया. वो तड़के चार बजे उठ सकती हैं और रात को 12 बजे के बाद भी अपना चुनावी अभियान जारी रखने में समर्थ हैं. पिछले हफ्ते मैंने उनके साथ यात्रा की और हमने चार दिन में 14 शहरों की यात्रा की. आप कहेंगे कि ओबामा ने भी तो ऐसा किया मगर ये भी तो देखिये कि वो उम्र में हिलेरी से 14 साल छोटे हैं.
हिलेरी की कमजोरी के बारे में मैं कहूंगी कि उनमें भावुकता की कमी है. यहां के लोग भावुकता के पीछे इस कदर पागल हैं कि जब न्यू हैंपशर में बोलते हुए हिलेरी की आंखों में आंसू भर आए तो अमेरिका की महिलाओं में उन्हें वोट देने के लिए जैसे होड़ लग गई. दो साल पहले जब हिलेरी ने चुनाव लड़ने का फैसला किया था तब उन्होंने सोचा था कि राष्ट्रपति पद की दौड़ में पहली बार एक महिला होने का अपवाद उनका मजबूत पक्ष होगा मगर पहली बार एक एफ्रो-अमेरिकन भी इस दौड़ में शामिल हो गया और ये अपवाद हिलेरी के अपवाद पर भारी पड़ गया. हिलेरी ने तजुर्बे को मुद्दा बनाकर चूक की जबकि अमेरिकी अनुभव को ज्यादा भाव नहीं देते हैं. ये एक ऐसा देश है जो नवीनता के प्रति ज्यादा आकर्षित होता है. 1960 में निक्सन ने जॉन एफ कैनेडी के खिलाफ भी अनुभव को मुद्दा बनाया था और हम जानते ही हैं कि फिर क्या हुआ.
और ओबामा की ताकत और कमजोरी?
ओबामा एक कुशल वक्ता हैं और उनकी वाणी का प्रभाव कुछ ऐसा है कि लोग अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते. दूसरा उनकी मिश्रित नस्ल की पृष्ठभूमि उन्हें वास्तविक अर्थों में 21वीं सदी के नागरिक की छवि प्रदान करती है. वो आकर्षक होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी हैं और ये बात दोनों उम्मीदवारों में होने वाली बहसों के दौरान झलकती भी है.
उनकी कमजोरी- दसवीं रैली के बाद उनका ‘हम ही वो बदलाव हैं जो हम देखना चाहते हैं’ नारा अपनी चमक खोने लगा है. ओबामा को लेकर पैदा हुआ पागलपन अब ठंडा हो रहा है. ओबामा को लेकर लोगों की भावनाएं इतनी बेकाबू हो गई थीं कि लोग अब पीछे मुड़कर देखते हैं और खुद से ही पूछते हैं, “वो क्या था?”
हिलेरी को सबसे ज्यादा समर्थन कहां से मिल रहा है?
50 साल से ऊपर की उम्र वाली महिलाओं से. ओहायो में उनकी जीत में इन महिलाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी. मेरे मुताबिक ये वो अदृश्य महिलाएं हैं जो उस युवा संस्कृति के चलते खुद को ठुकराया हुआ महसूस करती हैं जिसमें हम यहां जी रहे हैं.. वो पाती हैं कि हर तरफ उनका निरादर हो रहा है. विज्ञापन कंपनियों को उनकी संख्या जानने में कोई दिलचस्पी नहीं. टीवी चैनल जवां चेहरों की तलाश में रहते हैं. रोज़गारदाता उनकी बजाय नए चेहरों को प्राथमिकता देना चाहते हैं. फिल्मों में उनके लिए भूमिकाएं नहीं लिखी जातीं. इसलिए अगर उन्हें ऐसा महसूस होता है कि मीडिया में मौजूद लोग हिलेरी को दबाने की कोशिश कर रहे हैं तो उन्हें बहुत गुस्सा आता है. और वो सही भी हैं. मीडिया कवरेज असाधारण रूप से ओबामा के पक्ष में रहा है. सबसे मुश्किल सवाल हमेशा हिलेरी से पूछे जाते हैं और सबसे ओछी टिप्पणियां भी उन्हीं के लिए बचा कर रखी जाती हैं.
मगर ये भी दिलचस्प है कि इन महिलाओं की बेटियां हिलेरी के साथ खड़ी नहीं दिखतीं. ज्यादातर युवा महिलाओं की पहली पसंद ओबामा हैं. मुझे लगता है कि ये हिलेरी के चुनाव अभियान की कमी है. मुझे लगता है कि हिलेरी को अपनी रैलियों में मांओं और बेटियों, दोनों को आकर्षित करने की जरूरत है. मेरी बेटी 17 साल की है और वो हिलेरी को पसंद करती है. मगर उसे लगता है कि हिलेरी महिला शक्ति की भावनाओं को उतनी मजबूती से नहीं उभार पातीं.
हिलेरी के चुनावी अभियान की अहम बातें क्या रही हैं?
मुझे लगता है कि सबके लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति उनके लगाव की बात हर किसी की समझ में आ रही है. जब वो बहसों के दौरान इस बारे में बात करती हैं तो उनका रुख काफी दृढ़ होता है. ज्यादातर आलोचक भी ये महसूस करते हैं कि स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर हिलेरी की योजना ओबामा से ज्यादा अच्छी है और इससे सभी अमेरिकियों के लिए बीमा सुरक्षा कवच सुनिश्चित किया जा सकेगा. मैं पिछले हफ्ते उनके साथ थी और एक रैली के दौरान जब हिलेरी ने पूछा कि कितने लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है तो बड़ी संख्या में लोगों ने हाथ खड़े कर दिए. ये काफी चौंकाने वाली बात थी.
उनकी सबसे बढ़िया और बुरे कदम?
उनके सबसे बढ़िया कदम अब तक वो रहे हैं जिनकी योजना उन्होंने पहले से नहीं बनाई थी. न्यू हैंपशर में उनके आंसुओं को इनमें से एक कहा जा सकता है. दूसरी तरफ इराक युद्ध के समर्थन में अपना वोट देने का फैसला उनके लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है. आप देख सकते हैं कि जब भी ओबामा हिलेरी को इसकी याद दिलाते हैं तो वो मुश्किल में पड़ जाती हैं. चुनावी अभियान में उनसे कई गलतियां हुई हैं पर फिर भी कई मायनों में वो उस छवि से कहीं बेहतर उम्मीदवार हैं जो उनकी चुनावी अभियान से बनी है.
हिलेरी और ओबामा की प्रतिद्वंदिता पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन रही है. इससे अमेरिका की किस तरह की छवि उभर रही है?
हिलेरी और ओबामा,जिनके नाम की पहले दूर-दूर तक कोई चर्चा नहीं थी, की ये प्रतिद्वंदिता अमेरिकी व्यवस्था के लचीले और मौलिक रूप को दर्शाती है. इस व्यवस्था के सहारे हम अतीत की गलतियों को सुधारकर पूरी तरह से अलग एक नया परिदृश्य बनाने के लिए शुरुआत कर सकते हैं.
























