शख़्सियत
‘गालियों पर आपत्ति अभिजात साहित्यकारों को है’
कहानी, उपन्यास और संस्मरण में अनन्य योगदान देने वाले साहित्य अकादेमी सम्मान प्राप्त साहित्यकार डॉ काशीनाथ सिंह से डॉ अभिज्ञात की बातचीत.
‘जाति विरोधी साहित्य ही दलित साहित्य है’
डॉ. तुलसीराम उन चुनिंदा दलित चिंतकों में से हैं जो दलित साहित्य से लेकर उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मसलों पर सुलझी हुई राय रखते...‘90 फीसदी महिलाएं अपनी गुलामी का जश्न मनाती हैं’
स्त्री मुक्ति और आदिवासी संघर्ष का जिक्र करें तो रमणिका गुप्ता का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. अपने लंबे संघर्षमय जीवन के विभिन्न पड़ावों एवं एक लेखिका-सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में दोहरे जीवन की चुनौतियों के बारे में उनकी पूजा सिंह से बातचीत. ...‘निर्मम नहीं थे मेरे पिता’
ऑस्कर का मानद सम्मान पाने वाले फिल्मकार सत्यजित रे के बेटे संदीप रे बिल्कुल अपने पिता की तरह हैं- नपे-तुले और व्यवस्थित. निशि जापौन, उत्तोरन, बाम्बायर बाम्बेते और बक्शो रहस्य जैसी बांग्ला फिल्मों के जरिए पहचान बनाने वाले संदीप रहस्यवादी फिल्मों में खास रुचि रखते हैं. राजकुमार सोनी की उनसे बातचीत. ...‘दिल्ली के लेखक सत्ता के पिछलग्गू हैं ’
आज लघु पत्रिकाएं अपनी क्रांतिकारी विरासत से पीछा छुड़ाकर नव उदारवाद से कदम मिला रही हैं, लेकिन पंकज बिष्ट ने ‘समयांतर’ के जरिए लघु पत्रिका आंदोलन का दायित्व उठाया. पंकज बिष्ट से दिनेश कुमार की बातचीत...‘आज आलोचना चमचे पैदा करने का जरिया बन गई है’
अनिल यादव पेशे से पत्रकार हैं और प्रवृत्ति से घुमक्कड़ लेखक. उनकी हालिया प्रकाशित किताब ‘वह भी कोई देस है महाराज’ पूर्वोत्तर पर केंद्रित एक यात्रा वृत्तांत है. इसमें देश के ऐसे भूभाग की बातें और समस्याएं हैं जो हिंदी पट्टी और देश के दूसरे हिस्सों के लिए अब भी अबूझ पहेली की तरह हैं. किताब के जरिए अनिल अपने साथ पाठकों को भी सुदूर पूर्वोत्तर की सैर कराते हैं. विकास कुमार की उनसे बातचीत....सुर कल्पना
मूल रूप से असमिया और असम में ही पली-बढ़ी कल्पना पटवारी पर भोजपुरी का रंग कुछ ऐसा चढ़ा कि आज वे भोजपुरीभाषी इलाके के घर-घर...‘धूमिल के बाद कोई ऐसा नहीं जिसकी कविता पर आलोचना लिखी जा सके’
हिंदी साहित्य, विशेषकर कविता के नामचीन आलोचक नंदकिशोर नवल एक सितंबर को 75 साल के हो गए. इस खास मौके पर उनसे निराला की बातचीत. पहले से...जिसने धारावाहिकों का चेहरा बदल दिया
दो दशकों के दौरान भारत में सबसे चर्चित रहे कई धारावाहिकों के पटकथा लेखक राजेश जोशी आस्था अत्रे बनान को अपनी दुनिया बदलने की दास्तां बता रहे हैं...'मुझे नकल मर्डर बनानी पड़ी ताकि ओरिजिनल गैंगस्टर बना सकूं'
फिल्म निर्देशक अनुराग बसु से गौरव सोलंकी की बातचीत...- 'आप’ का क्या होगा?
- चिह्न पर प्रश्नचिह्न
- हरेक बात पे कहते हो तुम कि...
- ह्त्याग्रही गांधी!
- तो हमें तुम्हारी जरूरत ही क्या है मौलाना?
इस आलेख को पढ़ने के बाद मैंने तुरंत ही इसे अपने बुकमार्क सूचि में शामिल कर लिया।
संजय कुमार
सुरुचिपूर्ण, व्यवस्थित और ज्ञानवर्धक आलेख है।
सर, मैं आपके इस लेख की प्रशंसा किन शब्दों में करूँ, समझ में नहीं आ रहा है।
नए लेखकों के ...
संघ परिवार की गर्भनाल से बंधी भाजपा और अपने स्वार्थ की नाल लेकर भाजपा से बंधे वरुण गांधी से आप उम्मीद भी क्या कर सकते ...
एफएसएल के अतिरिक्त एनडीटीवी ने भी वरुण के भड़काऊ भाषणों वाली सीडी की जांच अमेरिका की एक स्वतंत्र फोरेंसिक लैब 'डिजिटल एविडेंस लीगल वीडियो सर्विसेज' ...
ये वही तहलका है ना, बंगारू लक्षमण का स्टिंग करने वाला ? इसकी खोजी पत्रकारिता केवल कांग्रेसी सेवा के लिय ही है , इन दस ...


