जीवट का धनी
‘मुझे उन लोगों पर तरस आता है जो सुबह जल्दी नहीं उठते. इस वक्त प्रकृति आपमें एक विशेष ऊर्जा का संचार करती है. अगर आप इसे ग्रहण नहीं करते तो आपको पता ही नहीं कि आप कितनी अमूल्य चीज खो रहे हैं’
राम जेठमलानी, उम्र: 86, पूर्व कानून मंत्री और जाने-माने वकील
सुबह साढ़े पांच बजे उठना, नियमित रूप से बैडमिंटन कोर्ट पर पसीना बहाना और कभी-कभी सिर्फ एक ग्लास जूस के सहारे दिन में 14 घंटे तक काम करना..अब ऐसे में तो राम जेठमलानी को 86 साल का जवान ही कहा जा सकता है. रोज 65 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने वाले जेठमलानी को समझना मुश्किल है. हाल ही में उन्होंने ऐलान किया कि वे वकालत छोड़ रहे हैं. मगर इसी साल उन्होंने बिनायक सेन और संजीव नंदा जैसी दो बिल्कुल जुदा शख्सियतों को जेल की सलाखों से बाहर निकलवाया है. स्विस बैंकों में जमा भारतीय काले धन को वापस लाने के लिए जनहित याचिका हो या फिर गैस विवाद की अदालती लड़ाई में अनिल अंबानी का पक्ष मजबूत करने का, जेठमलानी चर्चा में बने रहते हैं. वे खूब यात्रा करते हैं और किसी जगह पर उनका लगातार दो दिन तक टिकना मुश्किल से ही होता है. वे कहते हैं, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि जिंदगी के आखिरी दिनों में देश का इतना बुरा हाल देखना पड़ेगा’ उनका सपना है कि नैतिक मूल्यों में पतन का ये दौर खत्म हो और यही सपना उन्हें चलते रहने की ताकत देता है.
शोमा चौधरी
दलनायक खलनायक
‘मैं कभी भी ऐसा बूढ़ा नहीं बनना चाहता था जो सबको अपने बलिदानों की अनंत कथा सुनाता रहे, दिन भर खिच-खिच करता रहे, महिला रिश्तेदारों के पीछे पड़ा रहे.’
राजेन्द्र यादव, उम्र: 80
साहित्यकार और नई कहानी आंदोलन के प्रणेता

हंस के संपादक उन्होंने 25 साल तक टाइपराइटर का इस्तेमाल किया. बाद में वे हाथ की लिखाई पर लौट आए इतिहास और बुढ़ापे पर राजेंद्र यादव के विचार आपस में जुड़े हुए हैं. वे कहते हैं, ‘अतीत मुझे कभी नहीं सताता. जो लोग बीते कल की महानता और स्वर्णयुग की बात करते हैं वे सब झूठ बोलते हैं. आदमी इतिहास से नहीं बल्कि सिर्फ अपनी गलतियों से सीखता है. मैं पीछे मुड़कर नहीं देखता.’
लोगों को झटके देते रहने वाली हिंदी साहित्य की इस चर्चित हस्ती के लिए मूल्य सिर्फ यथास्थिति बनाए रखने का एक अनुशासनात्मक तरीका हैं. बात चाहे जाति की हो या सेक्स की, यादव हमेशा से पाखंड के मुखर विरोधी रहे हैं. उन पर स्त्रीविरोधी होने और ओछी राजनीति करने के आरोप लगते रहे. 2004 में उनकी जीवनी, हमारे युग का खलनायक आई. यादव कहते हैं, ‘मैं कभी भी ऐसा बूढ़ा नहीं बनना चाहता था जो सबको अपने बलिदानों की अनंत कथा सुनाता रहे, जो दिन भर खिच-खिच करता रहे, महिला रिश्तेदारों के पीछे पड़ा रहे.’ पैरों में साइटिका की परेशानी से चलने-फिरने अब उन्हें थोड़ी मुश्किल होती है पर मानसिक रूप से वे पूरी तरह सक्रिय हैं. प्रेमचंद द्वारा स्थापित ‘हंस’ पत्रिका को उन्होंने 1986 में फिर से जिंदा किया था. उनकी शामें साहित्यिक बैठकों, दोस्तों के साथ गपशप और पीने-पिलाने में बीतती हैं. टीवी देखना उन्हें बहुत पसंद है और ‘सच का सामना’ देखने में उन्हें काफी मजा आया. बुढ़ापे के बारे में पूछने पर वे तुरंत एक चुटकुला सुनाते हैं, ‘किसी ने 80 साल की बूढ़ी औरत से पूछा, अम्मा, क्या ढलती उम्र में सेक्स की इच्छा खत्म हो जाती है? उस महिला ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, ‘मैं कैसे बता सकती हूं? मैं तो अभी सिर्फ 80 की हूं!’
तृषा गुप्ता
रफ्तार का सवार
हर हफ्ते वे अपने बेटों को ये कहना नहीं भूलते कि वे अपने कर्मचारियों और डीलरों के साथ मजबूत संबंध बनाएं. इसके अलावा वे सबको एक सफल व्यवसायी बनने के लिए प्रेरित करते हैं.
डा. बीएम मुंजाल, उम्र: 86
हीरो समूह के संस्थापक
मुंजाल आज भी विज्ञापनों में ध्यान खींचने वाली लाइनों के दीवाने हैं. 80 के दशक में हीरो होंडा का फिल इट, शट इट, फॉरगेट इट मशहूर हुआ था तो आज इसकी जगह धक धक गो, देश की धड़कन ने ले ली है.
‘मैं हमेशा लोगों से कहता रहता हूं, सपने मत देखिए अगर आप उन्हें हकीकत में नहीं बदल सकते,’ ये शब्द हैं 2.8 अरब डॉलर के व्यापारिक साम्राज्य के मुखिया और हीरो समूह के संस्थापक डा. बृजमोहन लाल मुंजाल के. दुनिया की नंबर एक दुपहिया निर्माता कंपनी का ये 86 वर्षीय मुखिया आज भी बोर्ड के सदस्यों द्वारा किसी नई तकनीक के बारे में बताए जाने पर उत्साह से भर जाता है. छह साल की उम्र में एक बार वे कमालिया (अब पाकिस्तान में) में नए-नए खुले एक गुरुकुल में सिर्फ ये जानने चले गए थे कि पारंपरिक स्कूल में आखिर होता क्या है. वे हर नई चीज में दिलचस्पी लेते हैं.
1947 में अमृतसर आने के बाद उनके परिवार ने अपना व्यवसाय शुरू किया. बाद में वे लुधियाना आ गए जहां उन्होंने साइकिल बेचने का काम शुरू किया. तीन दशक बाद उन्होंने अपने बेड़े में मोटरसाइकिल का कारोबार भी शामिल कर लिया. ‘क्रांतिकारी तकनीकें आज भी मुझे प्रेरणा देती हैं’ 1980 के दशक में फोर-स्ट्रोक्स तकनीक के दम पर टू-स्ट्रोक्स मोटरसाइकिलें बनाने वाले अपने प्रतिस्पर्धियों को पटखनी देने वाला ये शख्स कहता है.
व्यावसायिक प्रबंधन की जापानी व्यवस्था- जिसे कीरेत्सु सिस्टम के नाम से जाना जाता है- से मुंजाल बेहद प्रभावित हैं. हर हफ्ते वे अपने बेटों से ये कहना नहीं भूलते कि वे अपने कर्मचारियों और डीलरों के साथ मजबूत संबंध बनाएं और सभी को एक सफल व्यवसायी बनाने पर जोर दें. उन्होंने खुद अपने 40 डीलरों को बड़े कारोबारियों में बदला है और उनके बेटों ने उनसे एक कदम आगे बढ़कर इस आंकड़े को दोगुना और फिर तिगुना कर दिया है. आज भारत की सड़कों पर हीरो के 2 करोड़ के करीब दुपहिया दौड़ रहे हैं. और लगता नहीं कि मुंजाल का इस आंकड़े के दोगुना या शायद तीन गुना होने से पहले रुकने का कोई इरादा है.
शांतनु गुहा रे
मूल आलेख के लिए क्लिक करें अक्षय घट ऊर्जा के





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Bhoop SIngh,Jaipur
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