साक्षात्कार
‘सिर्फ कपूर होने की वजह से हम स्टार नहीं बने’
भारतीय सिनेमा अपने 100 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है. इस एक सदी में इसकी पहचान रहे चेहरों की बात की जाए तो
‘यांत्रिक माध्यमों ने लेखन की गंभीरता खत्म कर दी’
जाने-माने कवि और आलोचक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को बीती 18 फरवरी को साहित्य अकादेमी का नया अध्यक्ष निर्वाचित किया गया. वे इस पद पर प्रतिष्ठित होने वाले हिंदी के पहले साहित्यकार हैं. पूजा सिंह की उनसे बातचीत. ...हिंदी का अहित इसके अध्यापकों ने किया’
भारत भवन के संस्थापक और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति रहे वाजपेयी की पहचान ललित कलाओं के आलोचक, स्तंभकार और अच्छे प्रशासक के तौर पर भी है. कुछ समय पहले पटना में निराला की उनसे हुई बातचीत....‘गिरोहों की जकड़बंदी से मुक्ति हो साहित्य ’
उदय प्रकाश हिंदी के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखकों में से हैं. अपने रचनात्मक जीवन तथा मौजूदा सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर पूजा सिंह से उनकी..."मथुरा रेप केस के बाद बलात्कार संबंधी कानूनों को मजबूत किया गया."
प्रकाशन और कई किस्म के सामाजिक हस्तक्षेप के जरिए भारतीय स्त्री विमर्श को एक नई दिशा देने वाली उर्वशी बुटालिया को आज भारतीय नारीवाद की एक पुरजोर आवाज के तौर पर पहचाना जाता है. भारतीय महिला आंदोलनों के बिखराव और उनकी वर्तमान दिशा पर प्रियंका दुबे ने उर्वशी के साथ विस्तार से बातचीत की...‘आरोपों पर कोई प्रमाण दिखाए तो उसी दिन लेखन छोड़ दूंगी’
‘मैं बोरिशाइल्ला’ और ‘मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ’ नामक दो उपन्यास लिखकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुई महुआ माजी इन दिनों विवादों में हैं. उनकी सबसे चर्चित कृति ‘मैं बोरिशाइल्ला’ को लेकर रांची के ही एक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्रवण कुमार गोस्वामी ने साहित्यिक गलियारों में उफान मचाया है. इस विषय पर महुआ माजी से अनुपमा की बातचीत के मुख्य अंश....“यहां कोई चिंतित ही नहीं है”
कृष्णनाथ के तीन बसेरे हैं. अगर बनारस नहीं होते तो बेंगलुरू के निकट जेकृष्णमूर्ति फाउंडेशन के हरिदवनम संस्थान में रहते हैं. यदि दोनों जगह नहीं हैं तो फिर हिमालय के किसी कोने में घूमते हैं. कृष्णनाथ से निराला की विविध विषयों पर हुई बातचीत....‘यह एक लड़की के लिए लड़ रहे दो लड़कों की कहानी नहीं है. यह विचारधारा की लड़ाई है’
रिलीज के पहले ही नक्सलवाद जैसे विषय पर बनी फिल्म चक्रव्यूह अच्छी-खासी चर्चा और बहस पैदा कर रही है. इससे पहले की अपनी दो फिल्मों...‘जरूरी नहीं कि जो नीतीश कहें उससे सबकी सहमति ही हो’
जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी, निराला को बता रहे हैं कि पार्टी के अलग-अलग नेताओं का अलग-अलग सुर उनकी पार्टी का लोकतांत्रिक...‘मुझे नामवर सिंह और मैनेजर पांडेय के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं’
राजेंद्र यादव से साक्षात्कारों की अब तक चार किताबें आ चुकी हैं. उनसे साक्षात्कार लेने वाले की असल चुनौती दोहराव से बचना है. यहां यह...- 'आप’ का क्या होगा?
- चिह्न पर प्रश्नचिह्न
- हरेक बात पे कहते हो तुम कि...
- ह्त्याग्रही गांधी!
- तो हमें तुम्हारी जरूरत ही क्या है मौलाना?
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इस आलेख को पढ़ने के बाद मैंने तुरंत ही इसे अपने बुकमार्क सूचि में शामिल कर लिया।
संजय कुमार
सुरुचिपूर्ण, व्यवस्थित और ज्ञानवर्धक आलेख है।
सर, मैं आपके इस लेख की प्रशंसा किन शब्दों में करूँ, समझ में नहीं आ रहा है।
नए लेखकों के ...
संघ परिवार की गर्भनाल से बंधी भाजपा और अपने स्वार्थ की नाल लेकर भाजपा से बंधे वरुण गांधी से आप उम्मीद भी क्या कर सकते ...
एफएसएल के अतिरिक्त एनडीटीवी ने भी वरुण के भड़काऊ भाषणों वाली सीडी की जांच अमेरिका की एक स्वतंत्र फोरेंसिक लैब 'डिजिटल एविडेंस लीगल वीडियो सर्विसेज' ...


