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‘ये जीत क्रिकेट के लिए है’'

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क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के प्रतिष्ठित चुनाव में प्रसून मुखर्जी को बुरी तरह हराने वाले बीसीसीआई और आईसीसी के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया की शांतुन गुहा रे से बातचीत.

सबसे पहले तो अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने पर आपकी प्रतिक्रिया. जिस दफ्तर में कभी आप बैठा करते थे वहां फिर से जाना कैसा लगा?

मुझे वो दिन याद आया जब खुद पर थोपे गए प्रतिबंध के बाद मैंने इस्तीफा दिया था. मैं कई रातों तक सो नहीं पाया था. मुझे खुशी है क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) के चुनाव में कभी न हारने का मेरा रिकॉर्ड बरकरार है. आखिरकार मुझे न्याय मिल गया है. बहुत बेइज्जत किया था...

इतनी बड़ी जीत से तो आप खुश होंगे?

सिर्फ मैं ही क्यों?  हर कोई खुश होगा. मुझे उन बेकार और बेबुनियाद विवादों को सुलझाने की भी खुशी है जिनसे मैं घिरा हुआ था और जिनकी वजह से खुद को निर्दोष साबित करने के लिए मुझे देश भर में कई जगहों के चक्कर काटने पड़े. प्रसन्नता इस बात की भी है कि मैंने अपने खिलाफ मुकदमों और फिर कैब चुनाव दोनों में जीत हासिल की. प्रसून मुखर्जी पर मेरी पिछली जीत सत्ता की खातिर थी. ये क्रिकेट के लिए है.

क्या ये मुख्यधारा में लौटने की दिशा में पहला कदम है?

मुझे ये कदम उठाना पड़ा. गंभीर संकट में फंसे बंगाल क्रिकेट को बचाने के लिए मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

मगर कई लोग कहेंगे कि ये आपका बीसीसीआई के अध्यक्ष पद की ओर पहला कदम है?

उन्हें मेरी शुभकामनाएं हैं. आप ही बताइये क्या मैं लोगों को सोचने से रोक सकता हूं?  आपसे ईमानदारी से कह रहा हूं, मेरे दिमाग में ऐसा कुछ नहीं है. मैं किसी दौड़ में शामिल नहीं हूं. मैं बंगाल में क्रिकेट को फिर से पटरी पर लाना चाहता हूं. इसे आईसीयू से बाहर लाने की जरूरत है.

बीसीसीआई सचिव निरंजन शाह ने कहा है कि आपकी जीत से बोर्ड के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

आप तो मुझसे कुछ कहलवा कर ही रहेंगे. लेकिन  मुझे इस पर कुछ नहीं कहना है.

मगर इतना तो आप मानेंगे कि बीसीसीआई के साथ आपका विवाद रहा है जिसकी कुछ निजी वजहें भी हैं.

ऐसा होना ही था? नहीं? मगर अब ऐसा कहना गलत होगा. मैं नहीं चाहता कि वो कैब की उपेक्षा करें. मैं नहीं चाहता कि शानदार ईडन गार्डन को उनकी उपेक्षा झेलनी पड़े. ये क्रिकेट के लिए सबसे बढ़िया जगहों में से है. हम चाहते हैं ये ऐसा ही बना रहे. इसकी हालत घर के पिछवाड़े जैसी न हो जाए. अगर आप कोलकाता को मैच नहीं देंगे तो आपका अपना स्टेडियम, आपका अपना ग्राउंड खत्म हो जाएगा. अब जबकि मैं वापस आ गया हूं, मैं जानता हूं कि कैब और बीसीसीआई के संबंधों को लेकर बहुत सी आशंकाएं हैं. मुद्दे दो तरह के हैंसामूहिक और व्यक्तिगत. सामूहिक रूप से हम बोर्ड से कहना चाहते हैं कि कृपया कैब को कष्ट न झेलने दें. मैं उनकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाऊंगा.

ईडन गार्डन में हुए आईपीएल मैचों के टिकटों का वितरण भी एक बड़ा मुद्दा था...

मैं कहूंगा कि ये एक बड़ा नहीं बल्कि छोटा सा मुद्दा था. मेरी नजर में आईपीएल एक असाधारण विचार और एक आश्चर्यजनक सफलता है. मैं भला आईपीएल के खिलाफ क्यों होऊंगा. बल्कि मुझे तो आईपीएल पर बीसीसीआई को हरसंभव सहयोग देने में खुशी होगी.

आप सौरव गांगुली के मुद्दे को कैसे सुलझाएंगे? वे दूसरे पाले में हैं.

मीडिया के लिए ये मुद्दा होगा, मेरे लिए ये कोई मुद्दा नहीं है. अगर कल सौरव मेरे पास बंगाल में क्रिकेट को बढ़ावा देने का कोई प्रस्ताव लेकर आते हैं तो मैं उन्हें सबसे पहले समर्थन दूंगा और उनके साथ काम करुंगा. ये मत भूलिए कि वे पूर्व भारतीय कप्तान और लोगों के आदर्श हैं.

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