‘प्रमोद को लगता था कि वे कुछ भी कर सकते हैं’
ब्रेन हेमरेज से कुछ ही दिन पहले प्रवीण महाजन ने राना अय्यूब को बताया था कि उनके भाई प्रमोद महाजन की ‘दुर्घटनावश’ हुई मौत एक लंबी पीड़ा की परिणति थी
पत्नी की बीमारी की वजह से आप पेरोल पर जेल से बाहर आए हैं. क्या इस वक्त का इस्तेमाल आप अपने बचाव के लिए करेंगे?
मैं अपना केस सुप्रीम कोर्ट तक लड़ूंगा. किसी ने मुझे प्रमोद को गोली मारते हुए नहीं देखा है, जैसा कि प्रचारित किया जा रहा है. मेरी भाभी तो उस वक्त घर में मौजूद भी नहीं थीं. यह सिर्फ एक दुर्घटना थी लेकिन ऐसी थी जिसे प्रमोद टाल सकते थे.
कैसे? आप वहां रिवॉल्वर लेकर क्यों गए थे?
यह एक लंबी पीड़ा की परिणति थी. मेरी भाभी रेखा महाजन को सारी बातें पता हैं. उन्हें मुझपर दूसरे किसी भी व्यक्ति से ज्यादा भरोसा था. उन्होंने ही मुझे प्रमोद के अवैध यौन संबंधों के बारे में बताया था जिसकी वजह से वे टूट चुकी थीं. जब प्रमोद के पास पहले से ही दो फ्लैट थे तो उन्हें किसी और के घर में रहने की क्या जरूरत थी?
उस दिन जो कुछ हुआ क्या आपको उसका दुख है?
जो हुआ गलत हुआ, लेकिन यह एक दुर्घटना थी. सब कुछ 15 मिनट के भीतर ही हो गया.
क्या आप मानते हैं कि प्रमोद की मृत्यु की वजह से भाजपा को नुकसान हुआ? क्या वे भाजपा की वर्तमान दुर्दशा को कुछ हद तक कम कर सकते थे?
प्रमोद भाजपा के लिए बहुत कीमती थे. वही भाजपा के लिए व्यापारिक घरानों से चंदा इकट्ठा करते थे. पार्टी में शीर्ष पर बैठे लोग उनका इस्तेमाल मोटा पैसा जुटाने के लिए करते थे और इसका इस्तेमाल अपने निजी उद्देश्यों के लिए करते थे. दिल्ली ने उन्हें (प्रमोद महाजन को) बिगाड़ दिया था, उन्हें घमंडी बना दिया था. उन्हें लगता था कि वे सब कुछ कर सकते हैं. वे दिनोंदिन असुरक्षा से घिरते जा रहे थे. गुस्सा उनके स्वभाव का हिस्सा बन गया था.
क्या प्रमोद आपसे चंदे के बारे में बात करते थे? आप किन शीर्ष नेताओं की बात कर रहे हैं?
उनके बारे में सभी जानते हैं. सबको पता था कि पैसा आ रहा है. कैबिनेट से निकाले जाने के बाद वे पार्टी से काफी नाराज थे जिसके लिए उन्होंने इतना कुछ किया था. वे हमेशा डरते थे कि कहीं मैं सच न बोल दूं. वे हमेशा मुझे संदेह की निगाह से देखते थे, लेकिन मुझसे प्यार भी बहुत करते थे. तहलका के उस खुलासे के बाद जिसमें बंगारू लक्ष्मण को पैसा लेते हुए दिखाया गया था, उन्होंने मुझसे कहा, ‘मैं इसमें शामिल नहीं हूं लेकिन मेरी पार्टी के लोग मुझे इसमें घसीटना चाहते हैं, इसलिए तुम इस बारे में अपना मुंह मत खोलना.’
क्या आप मानते है कि आपके पास सब कुछ उनकी बदौलत है?
हां, मैं मानता हूं. यहां तक कि यह घर भी उन्होंने ही मुझे दिलाया था. उन्होंने मेरी आर्थिक सहायता की और मेरी शादी भी करवाई. मेरे परिवार की देखभाल भी वही करते थे.
और बदले में वे आपसे क्या अपेक्षा करते थे?
बदले में वे मुझसे वफादारी चाहते थे. चाहते थे कि मैं उनका पक्ष लूं. बिना किसी सवाल-जवाब के. वे कहा करते थे, ‘तुम मेरे भाई हो, फिर रेखा की तरफदारी क्यों करते हो?’ उनके तौर तरीकों से परिवार पर असर पड़ रहा था. राहुल भी अपने पिता के ही नक्शेकदम पर चल रहा है.
क्या परिवार के दूसरे सदस्यों के बीच आपस में संपर्क होता है?
नहीं. मेरी पत्नी और दो बच्चे ही मेरा सहारा हैं. वे अच्छे-बुरे समय में मेरे साथ रहे हैं. लेकिन मेरे दिल में अभी भी रेखा भाभी और उनके बच्चों के लिए सहानुभूति है. बच्चे भी गलत दिशा में चले गए. प्रमोद कभी भी अपने बच्चों को राजनीति में नहीं आने देते. उन्हें मालूम था कि राहुल गलत रास्ते पर जा रहा है पर उन्हें अपनी ही जिंदगी से फुरसत नहीं थी. बहुत से सवाल बिना जवाब के ही रह गए हैं. विवेक मोइत्रा (प्रमोद के सचिव) प्रमोद की मौत के महीने भर बाद ही ड्रग के चलते मौत के शिकार हो गए. उन्हें सच्चाई पता थी. आज किसी को भी नहीं पता कि वास्तव में क्या हुआ था.




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