‘ड्रोन हमले पाकिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ हैं’
पाकिस्तान की पूर्व सूचना मंत्री शेरी रहमान, हरिंदर बवेजा को बता रही हैं कि पाकिस्तान में अमेरिका की जोर-जबरदस्ती की कूटनीति कारगर नहीं होगी
तालिबान से पाकिस्तान को किस हद तक खतरा है?
असल समस्या अफगानिस्तान में चल रही विद्रोही गतिविधियों के कारण पैदा हो रही है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर एक तरफ से निगरानी नहीं के बराबर है. दोनों देशों की सीमा पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है ताकि अफगानिस्तान से यहां आ रही हथियारों और नशीले पदार्थों और आतंकियों की खेप को रोका जा सके. इसमें कोई दोराय नहीं कि पाकिस्तान को आतंकवादियों से खतरा है और पाकिस्तान उनका पहला निशाना है फिर भी इस बात का मतलब ये नहीं निकाला जाना चाहिए कि देश की राजधानी पर आतंकियों का कब्जा हो जाएगा या फिर परमाणु हथियार जो कि पूरी तरह से सुरक्षा के घेरे में हैं इनके हाथों में पड़ जाएंगे.
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हाल ही में कहा था कि भारत, पाकिस्तान के लिए खतरा या दुश्मन नहीं है. क्या आप इस बात से सहमत हैं?
60 साल का मनमुटाव देखने के बाद तो भारत को दुश्मन नहीं ही होना चाहिए. मुंबई हादसे से पैदा हुए हालात से निपटने के लिए हमें शांति और आपसी बातचीत को बढ़ावा देने की जरूरत है.
राष्ट्रपति जरदारी ने माना है कि मुंबई हमले के तुरंत बाद पाकिस्तानी सेना के दबाव के चलते आईएसआई प्रमुख को भारत नहीं भेजा गया. आखिर पाकिस्तानी सेना की चिंताएं क्या थीं?
जांच के लिए ऐसा कोई पूर्वनिर्धारित समझौता नहीं है जिसके तहत आईएसआई प्रमुख के स्तर के व्यक्ति को भारत भेजने की जरूरत हो. पाकिस्तान चाहता है कि भारत और इसके अलावा जो सात देश इस घटना से संबंधित हैं, उसे अपराधियों के खिलाफ और पुख्ता सबूत मुहैया कराएं. इस आतंकी मुकदमे से और भी देश जुड़े हैं इसलिए बिना पर्याप्त सबूतों के इस पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता.
ओबामा का हाल ही में जरदारी को अमेरिका बुलाना क्या कूटनीतिक दबाव डालने की कवायद थी?
मुश्किलों से निपटने के लिए जोर-जबरदस्ती की कूटनीति को एक बेहतर जरिया नहीं माना जा सकता.
क्या आप मानती हैं कि पाकिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले बंद होने चाहिए?
पाकिस्तानी जनता इन्हें देश की जमीन पर एक शिकारी की हिंसक गतिविधि के तौर पर देखती है. जनता की राय में ड्रोन हमले पाकिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ हैं. भले ही ये हमले सटीक रहते हों और इनकी वजह से अल कायदा के आतंकी भागते रहते हों मगर फिर भी इस सैन्य कार्रवाई से फायदे की बजाय नुकसान ही ज्यादा हुआ है. अमेरिका को इस रणनीतिक विकल्प को ही समूची रणनीति मानकर नहीं चलना चाहिए. इससे बेहतर विकल्प तलाशे जा सकते हैं.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के एक साल के कार्यकाल को आप कैसे देखती हैं?
इस सरकार के सामने ऐसी चुनौतियां थीं जिनसे निपटना लगभग नामुमकिन था. ये तो नहीं कहा जा सकता कि घरेलू राजनीति के मोर्चे पर सरकार हर तरह से सफल रही मगर बावजूद इसके सरकार की कुछ उपलब्धियां रही हैं. मसलन आतंकवाद के खिलाफ एक आमराय कायम करने, सामाजिक सुधार लाने और लगभग बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था को संभालने के मोर्चे पर सरकार ने क काफी काम किया है. पाकिस्तानी जनता अपनी सरकार के साथ एकजुटता से खड़ी है.
क्या नवाज शरीफ को वापस सरकार में शामिल होना चाहिए?
हां बिल्कुल. नवाज शरीफ पाकिस्तानी लोकतांत्रिक व्यवस्था के एक अहम हिस्सेदार हैं. यदि उनकी पार्टी कैबिनेट में आती है तो ये देश के लिए बेहतर होगा. पाकिस्तान के लिए ये मुश्किल वक्त है. देश में राजनीतिक स्थिरता और नवाज शरीफ की पार्टी की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी से पाकिस्तान अपने सामने खड़ी चुनौतियों का मुकाबला बेहतर ढंग से कर सकता है.
आप पाकिस्तान की सूचना मंत्री थीं. लेकिन आपने इस्तीफा दे दिया क्यों?
हमारी पार्टी ने मीडिया की आजादी का वादा किया था भले ही वह हमारे खिलाफ खबरें क्यों न दिखाए. (लेकिन ऐसा नहीं हुआ). मुझे अपने फैसले का कोई अफसोस नहीं है.




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