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प्रियंका गांधी राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार लगती हैं. लेकिन कांग्रेस में इसे लेकर कोई उत्साह ही नहीं दिखाई देता. क्या इसकी मुख्य वजह पार्टी के लिए उनका राहुल गांधी से भी ज्यादा उपयोगी होना है? शुभम उपाध्याय की रिपोर्ट
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' मेरी फिल्म पसंद नहीं आई तो आपको बाद में कभी कॉफी पिला दूंगा'

फिल्म समीक्षक से फिल्म निर्देशक बने सुधीश कामथ की नई फिल्म गुड नाइट, गुड मॉर्निंग देखना ऐसा अनुभव है मानों आप चोरी‌छिपे एक लड़के और...
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आयोग करे, विपक्ष भरे

चुनाव आयोग द्वारा मायावती की मूर्तियों और हाथियों को ढकने का आदेश क्यों विपक्षी पार्टियों को भारी पड़ सकता है? अतुल चौरसिया का विश्लेषण...
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सदिच्छा का सत्यानाश

सैकड़ों करोड़ रु की जिस रकम से बिहार के स्कूलों की तस्वीर बदल सकती थी उसका ज्यादातर हिस्सा भ्रष्टाचारियों की जेब में चला गया. इर्शादुल...
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यह शहर नहीं दिल्ली है

100 साल की अल्हड़ राजधानी दिल्ली आज भी दिलवालों का शहर है या दिल के बीमारों का या फिर कुछ और? गौरव सोलंकी की रिपोर्ट ...
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नियुक्ति बनी नाक का संकट

वे कौन-से सवाल हैं जिनका अनुत्तरित रहना मध्य प्रदेश में लोकायुक्त नियुक्ति प्रक्रिया को संदिग्ध बना रहा है, बता रहे हैं बृजेश सिंह...
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चुनाव की चुनौतियां

चुनावी माहौल के दौरान उत्तराखंड में पार्टी विचारधारा और अनुशासन पर जिस तेजी से अवसरवाद हावी होता दिख रहा है उससे लगता है कि राज्य अपने अग्रज उत्तर प्रदेश को टक्कर देने की राह पर है. महिपाल कुंवर और मनोज रावत की रिपोर्ट...
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    ' राम तेरे बंदों से कांपते हुए '

    गीतिकाराम तेरे बंदों से कांपते हुए,जिया किए राम-राम जापते हुए.जीवन के बोझ तले दबे-कुटे हम,दुनिया भर रंज-ग़म अलापते हुए.दूर खड़ी खुशियों की टोह-टोहकर,हासिल का इंच-इंच
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    कर्मन की गति न्यारी

    कर्ज की हमको दवा बताई  कर्ज ही थी बीमारी,  साधो!कर्मन की गति न्यारी.गेहूं उगे शेयर नगरी में खेतों में बस भूख उग रही मूल्य सूचकांक
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    ऐसे तो सौ भी भले होंगे

    छोटे राज्य भला किसे पसंद नहीं आएंगे? पर आज वे जिस बड़े ढांचे में से तोड़कर बनाए जा रहे हैं उसके सारे दोष वे अपनी कुंडली में लेकर ही जन्म लेते हैं
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    मातृभाषा

    जैसे चींटियां लौटती हैं बिलों में कठफोड़वा लौटता है काठ के पास वायुयान लौटते हैं एक के बाद एक लाल आसमान में डैने पसारे हुए हवाई अड्डे की ओर ओ मेरी भाषा मैं
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