मुखपृष्ठ | तहक़ीक़ात | झूठे सपनों का सौदागर

झूठे सपनों का सौदागर

image

भारत में हजारों करोड़ रुपए के गैरकानूनी लॉटरी व्यवसाय के बारे में तो बहुत से लोग जानते हैं लेकिन इसे चलाता कौन है यह कम ही लोगों को मालूम होगा. सैंटियागो मार्टिन नाम के इस शख्स और उसके अवैध कारोबार की पड़ताल कर रहे हैं शांतनु गुहा रेइस धंधे से जुड़े लोगों का मानना है कि अवैध लॉटरी कारोबार चलाना इस कारोबार को कानूनी तरीके से चलाने की तुलना में ज्यादा आसान है. प्रवर्तन निदेशालय की शाखा फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) के वरिष्ठ अधिकारी इस बात की पुष्टि करते हैं कि लॉटरी टिकटों की अवैध बिक्री से मिले पैसे को हवाला के जरिए दूसरे देशों में भेज दिया जाता है 

देर रात का वक्त है. बाकी दुनिया भले ही गहरी नींद की गिरफ्त में हो मगर कोलकाता की कूरियर कंपनियों के लिए ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को दो पल की भी फुर्सत नहीं. तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक के गुमनाम-से कस्बों के रेलवे प्लेटफॉर्मों पर खड़े ये लोग कई थैलों को जल्दी-जल्दी ट्रेन के डिब्बों से बाहर खींचने में व्यस्त हैं. जूट के इन थैलों में कोई मामूली चीज नहीं. इनमें भरी हैं आम आदमी को तुरत-फुरत बड़ा आदमी बनाने के सपने दिखाने वाली कागज की लाखों पर्चियां, यानी करोड़ों रुपए कीमत के लॉटरी टिकट. जल्दी ही प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहे लड़कों के झुंड इन थैलों से टिकटों के बंडल निकालकर आपस में बांट लेते हैं. इसके बाद साइकिलों पर सवार होकर वे इन बंडलों को सुबह होते-होते उन जगहों तक पहुंचा देते हैं जहां अपनी किस्मत बदलने की उम्मीद लगाए लोग इनका इंतजार कर रहे हैं. इसके साथ ही करोड़ों रुपए के अवैध लॉटरी टिकटों की बिक्री का धंधा शुरू हो जाता है.

और यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है. ऐसा रोज होता है. देश में 12 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर बाकी जगहों पर लॉटरी कारोबार प्रतिबंधित है. लेकिन रोक के बावजूद इन जगहों पर लॉटरी टिकटों की अवैध बिक्री धड़ल्ले से होती है. यहां इन्हें चाय की गुमटियों, पान-सिगरेट की दुकानों और अखबारों के वेंडरों से खरीदा जा सकता है.  दिलचस्प है कि भारत में हर साल लॉटरी टिकट खरीदने के लिए औसतन जो 13,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं उनका 60 फीसदी हिस्सा यानी करीब 7,200 करोड़ रुपया इसी तरह की अवैध बिक्री से आता है.

हजारों करोड़ रुपए के इस अवैध लेकिन संगठित कारोबार के बारे में सबसे पहला और स्वाभाविक सवाल यही उठता है कि आखिर इसके पीछे है कौन? लोगों को बड़ा आदमी बनने के झूठे सपने दिखाने वाले इस सौदागर का नाम है सैंटियागो मार्टिन. 42 साल के इस म्यांमार निवासी का लॉटरी से उतना ही पुराना रिश्ता है जितनी उसकी उम्र. रंगून में जिस दिन मार्टिन का जन्म हुआ, उसी दिन उसके मां-बाप की एक हजार डॉलर की लॉटरी लगी थी. मार्टिन के साथ अरुणाचल प्रदेश में काम कर चुके टी अरुमयागम इस बारे में कहते हैं, ‘यह इस बात का सबूत था कि वह अपने मां-बाप के लिए भाग्यशाली है.’ फिलहाल कोयंबटूर मे रह रहे अरुमयागम आगे बताते हैं, ‘मार्टिन आज का रॉबिन हुड है. सिर्फ इन तीन राज्यों (तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक) में जहां लॉटरी प्रतिबंधित है उन्होंने दो हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया है.’ कोयंबटूर में उनके टी स्टाल को मार्टिन के आदमी अकसर इस तरह के अवैध लॉटरी टिकट बेचने के लिए इस्तेमाल करते हैं. जब हम अरुमयागम से कहते हैं कि यह गैरकानूनी है? तो वे कहते हैं, ‘वे दुकान के नजदीक टिकट बेचते हैं, दुकान के भीतर नहीं.’

अरुमयागम का जवाब बताता है कि वे खुद को सुरक्षित मानते हैं. ऐसा ही कुछ 7,200 करोड़ रुपए के अवैध लॉटरी रैकेट के बारे में भी माना जाता है. दरअसल, इस धंधे से जुड़े लोगों का मानना है कि अवैध लॉटरी कारोबार चलाना इस कारोबार को कानूनी तरीके से चलाने की तुलना में ज्यादा आसान है. प्रवर्तन निदेशालय की शाखा फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) के वरिष्ठ अधिकारी इस बात की पुष्टि करते हैं कि लॉटरी टिकटों की अवैध बिक्री से मिले पैसे को हवाला के जरिए दूसरे देशों में भेज दिया जाता है. विडंबना देखिए कि किसी जमाने में लॉटरी का अवैध कारोबार ‘सिर्फ’ 300 करोड़ रुपए का ही था. मगर जसे-जसे कई राज्य इसपर रोक लगाते गए यह आंकड़ा भी तेजी से बढ़ता गया. यानी लोगों से लॉटरी की लत छुड़ाने के मकसद से लगाई गई रोक का कोई फायदा नहीं हुआ.

एफआईयू अधिकारियों के मुताबिक मार्टिन के अवैध कारोबार से जुड़ा एक और पहलू यह है कि साप्ताहिक टिकट पर पैसा जीतने वालों की रकम का एक बड़ा हिस्सा वह खुद हड़प लेता है. पहले विजेताओं को जीत की रकम का 75 फीसदी हिस्सा मिलता था, मगर अब यह आंकड़ा 55 फीसदी हो गया है. लेकिन मार्टिन के माफिया से संबंधों के चलते कोई विजेता इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा पाता है. सूत्रों का कहना है कि मार्टिन की अगली योजना अब अमेरिकी पासपोर्ट लेने और देश छोड़कर वहां बसने की है.

पहले विजेताओं को जीत की रकम का 75 फीसदी हिस्सा मिलता था, मगर अब यह आंकड़ा 55 फीसदी हो गया है. लेकिन मार्टिन के माफिया से संबंधों के चलते कोई विजेता इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा पाता हैलॉटरी कारोबार के इस बादशाह के बारे में एक दिलचस्प बात यह भी है कि उसे देखने का दावा कोई नहीं करता. हालांकि कहा जाता है कि एक बार चेन्नई के गोल्फकोर्स में टहलते हुए उसकी फोटो खींची गई थी. उस समय वह अपने साथी सुरेश के साथ था. सुरेश के बारे में कहा जाता है कि वह मार्टिन के पैसे का लेन-देन देखता है. मार्टिन ने लॉटरी के अवैध कारोबार की शुरुआत म्यांमार से की थी. वह अपने भाई के साथ रंगून और उसके आसपास के इलाकों में दो अंकों वाले लॉटरी टिकट बेचा करता था. यहां उसके ग्राहक इन दो अंकों को किस्मत पलटने की शुरुआत मानकर छोटे-छोटे दांव खेला करते थे. 1980 के दशक में म्यांमार में अवैध लॉटरी राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया. नतीजतन दोनों भाईयों को देश छोड़ना पड़ा. इसके बाद मार्टिन अपने परिवार के साथ स्थायी रूप से भारत आ गया. उसने अरुणाचल प्रदेश से अपना लॉटरी कारोबार फिर शुरू किया. यहां मार्टिन ने धीरे-धीरे पुलिस और आयकर विभाग में निचले और मध्य स्तर के अधिकारियों में पैठ बनानी शुरू की.

सरकारी अधिकारियों से अपने संबंधों के दम पर मार्टिन ने जल्दी ही सातों उत्तर-पूर्वी राज्यों में अपना कारोबार फैला लिया. भारत में पंजाब, केरल, सिक्किम और महाराष्ट्र की तरह इन राज्यों में भी लॉटरी वैध है. इसके बाद मार्टिन किन्हीं अज्ञात वजहों से कोयंबटूर आ गया. तमिलनाडु पुलिस के मुताबिक उसने यहां अपने जीजा और सबसे भरोसेमंद साथी जॉन ब्रिट्टो के साथ मिलकर काम शुरू किया. ब्रिट्टो मार्टिन के लिए बेहद काम का आदमी साबित हुआ. उसने लॉटरी से मिले अवैध पैसे को हवाला के जरिए विदेशी बाजार में निवेश करना शुरू कर दिया. मार्टिन का अवैध कारोबार इस समय बेरोक-टोक चल रहा था. लेकिन लॉटरी का यह सम्राट अपनी छवि को बदलना चाहता था. पहचान और सम्मान पाने के लिए मार्टिन ने अब तमिलनाडु और पड़ोसी राज्यों की राजनीतिक पार्टियों से मेल-जोल शुरू कर दिया. मगर 2005 में सीपीएम के एक अखबार देशाभिमानी के बारे में जब एक दूसरे अखबार ने दावा किया कि मार्टिन ने इसे दो करोड़ रुपए दिए हैं और इससे विवाद खड़ा होने लगा तो उसके बाद से मार्टिन लगभग अज्ञातवास में चला गया.

वैसे यह पहली घटना नहीं थी जब ऐसी कोशिशों पर मार्टिन को अपने कदम वापस खींचने पड़े हों. इससे पहले उसने जब दक्षिण भारत में संगीत के लोकप्रिय टीवी चैनल एसएस म्यूजिक को खरीदा था तब भी अखबारों में उसकी पृष्ठभूमि से जुड़ी कई खबरें आई थीं. इनमें कहा गया था कि तमिलनाडु में अवैध लॉटरी टिकट बिक्री के मामले में सीआईडी और चेन्नई अपराध शाखा ने मार्टिन से गहन पूछताछ की है. इस मामले में चेन्नई में एक एफआईआर भी दर्ज की गई थी जो बताती है कि मार्टिन और उसके साथियों ने सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया था. इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय ने चेन्नई पुलिस से मार्टिन और उनके सहयोगियों पर कार्रवाई करने को कहा था.

लेकिन यह काम इतना आसान नहीं था. दरअसल, तब तक मार्टिन कुछ राजनीतिक पार्टियों में शीर्ष स्तर के लोगों से संपर्क बना चुका था. आखिरकार वह मद्रास उच्च न्यायालय से 25 लाख रुपए के मुचलके पर जमानत हासिल करने में कामयाब रहा. सार्वजनिक पहचान पाने की दिशा में मार्टिन की कोशिशें भले ही विफल रही हों मगर राजनीतिक गलियारों में उसके संपर्क कायम हो चुके हैं. पिछले दिसंबर वह चेन्नई में आयोजित एक बैठक में हिस्सा लेने आया हुआ था. यह बैठक सत्ताधारी डीमके ने बुलाई थी जो चाहती थी कि इस साल अगस्त में होने वाली वर्ल्ड तमिल कॉन्फ्रेंस की स्वागत कमेटी में मार्टिन भी हो. तहलका से बातचीत में डीएमके के एक वरिष्ठ नेता का कहना था, ‘दक्षिण भारत के राजनीतिक गलियारों में स्वीकार्यता पाने की यह एक और कोशिश थी, वैसे नई दिल्ली स्थित एक प्रभावशाली कांग्रेस नेता से भी मार्टिन के सीधे संबंध हैं.’ दिलचस्प तथ्य यह भी है कि मार्टिन ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ लॉटरी ट्रेड एंड अलाइड इंडस्ट्री का महत्वपूर्ण सदस्य है. यह संस्था फिक्की से संबद्ध है.

‘लॉटरी टिकट कहां और कैसे पहुंचते हैं यह पता लगाना बेहद मुश्किल काम है, हमारे पास इस बात के रिकॉर्ड हैं कि टिकट फर्जी लोगों को फर्जी पतों पर भेजे जाते हैं. जब तमिलनाडु और कर्नाटक में लॉटरी वैध थी तब मार्टिन यहां लॉटरी का सबसे बड़ा कारोबारी था. बाद में जब लॉटरी पर रोक लगी तो वह अवैध रूप से काम करने लगा'

कई लोगों का मानना है कि मार्टिन की ये कोशिशें उन मुसीबतों से बचने की जुगत हैं जिनका उसे कदम-कदम पर सामना करना पड़ता है. लेकिन जैसा कि हर अवैध कारोबार से जुड़े व्यक्ति के संबंध में होता है, मार्टिन के वकील श्री रामालू अपने मुवक्किल को ऐसा निर्दोष व्यक्ति बताते हैं जो लोगों की भलाई के लिए पैसा खर्च करता है. रामालू कहते हैं कि मार्टिन का काम तो बस दूसरे राज्यों के एजेंटों को लॉटरी टिकट बेचना है और यह पूरी तरह से कानूनी तरीके से होता है.

मार्टिन का अवैध लॉटरी कारोबार जिस चतुराई से संचालित होता है वह किसी को भी हैरत में डाल सकती है. ईटानगर में यह बियानी ट्रेडर्स के नाम से चलता है. इस नाम की वजह से कई लोग मजाक में यह भी कहते हैं कि यदि मार्टिन रिटेल कारोबार के क्षेत्र में काम करता तो वह जाने-माने रिटेलर किशोर बियानी (बिग बाजार, पैंटालून और मेगामार्ट के संचालक) को कब का पीछे छोड़ देता. बियानी ट्रेडर्स के पास उन राज्यों के लिए लॉटरी टिकट छापने का लाइसेंस है जहां पर ये वैध हैं. अवैध लॉटरी का कारोबार यहीं से शुरू होता है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं कि बियानी ट्रेडर्स इस लाइसेंस की आड़ में उन राज्यों के लिए लॉटरी टिकट छापता है जहां ये अवैध हैं. ये टिकटें हैदराबाद (श्रीनिधी सिक्योरिटी प्रिंटर्स और केएल हाई टेक सिक्योर प्रिंटर्स), पटाखों के लिए मशहूर शिवकाशी (महालक्ष्मी प्रिंटर्स), बेंगलुरु (साई सिक्योरिटी प्रिंटर्स), चेन्नई (वराम पिंट्रर्स) और दिल्ली (साई सिक्योरिटी प्रिंटर्स और न्यू टेक प्रिंटर्स) में छापे जाते हैं. इसके बाद टिकट कूरियर से कोलकाता भेजे जाते हैं जहां लॉटरी वैध है. लेकिन इनका एक छोटा सा हिस्सा ही अधिकारियों और एजेंटों को मिलता है. ज्यादातर टिकट उन राज्यों में भेज दिए जाते हैं जहां लॉटरी पर रोक है.

इस बारे में बात करते हुए नई दिल्ली अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी अशोक के. सिंह कहते हैं, ‘लॉटरी टिकट कहां और कैसे पहुंचते हैं यह पता लगाना बेहद मुश्किल काम है, हमारे पास इस बात के रिकॉर्ड हैं कि टिकट फर्जी लोगों को फर्जी पतों पर भेजे जाते हैं. जब तमिलनाडु और कर्नाटक में लॉटरी वैध थी तब मार्टिन यहां लॉटरी का सबसे बड़ा कारोबारी था. बाद में जब लॉटरी पर रोक लगी तो वह अवैध रूप से काम करने लगा.’

अवैध लॉटरी कारोबार से जुड़े स्याह पहलू और भी हैं. जिसे लत होती है वह लॉटरी का टिकट किसी भी तरह खरीदना चाहता है. इसलिए 1, 2, 10 या 25 रुपए के टिकट 10 से 15 गुने दाम पर बेचे जाते हैं. इसके बाद यदि कोई इनाम जीत भी जाए तो उसे पूरी रकम कभी नहीं मिलती. अभी तक कई लोग इन टिकटों के चक्कर में बर्बाद हो चुके हैं. ऐसे ही लोगों के लिए कर्नाटक में स्वयं सहायता समूह चलाने वाले आर अशोकन कहते हैं, ‘फिर भी लोग टिकट खरीदते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे बड़ी रकम जीतेंगे और फिर उनकी सारी मुसीबतें पलभर में गायब हो जाएंगी.’ अशोकन आगे बताते हैं कि बड़ी रकम जीतने वालों को मार्टिन और उसके आदमी पुलिस वालों की मिली भगत से अकसर बेवकूफ बना देते हैं.

पं बंगाल, जहां मार्टिन का रैकेट सबसे मजबूत है, में पुलिस उसके कारोबार को लेकर हाल ही में सतर्क हुई है. पिछले दिनों आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के कुछ अधिकारियों ने राज्य भर में मार्टिन के कार्यालयों पर छापे मारे थे. लेकिन छापों में क्या मिला अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. कोलकाता में हमसे बात करते हुए एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी बस इतना ही कहते हैं, ‘हम अभी ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते.’ कहा जाता है कि 2007 में जब प. बंगाल पुलिस मार्टिन के रैकेट की कड़ी निगरानी करने लगी तो वह सिलीगुड़ी के रास्ते भूटान भाग गया था. हालांकि इस दौरान मार्टिन कोलकाता आता-जाता रहा. पं बंगाल सीआईडी के अधिकारी इस बात की पुष्टि करते हैं  कि 2008  में वह कोलकाता के ईडन गार्डंस में आयोजित एक आईपीएल मैच देखने आया था. इस बारे में बात करते हुए नाम न छापने की शर्त पर सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ‘उसका एक और मुखौटा है : लॉटरी कंपनियों का प्रतिनिधि, वह कानून से बचने के लिए अकसर इस पहचान का इस्तेमाल करता है.’

एफआईयू अधिकारियों के मुताबिक मार्टिन हर दिन तकरीबन 1.45 करोड़ टिकट बेचता है. वह 28 सिक्किम, 17 तमिलनाडु और 6 अरुणाचल लॉटरियों का डिस्ट्रीब्यूटर है. प. बंगाल और पूवरेत्तर राज्यों में मार्टिन सबसे ज्यादा सक्रिय है. हाल ही में भूटान ने भारत में अपनी बंपर लॉटरी बेचने के लिए मार्टिन लॉटरी एजेंसी लिमिटेड को सब-डिस्ट्रीब्यूटर बनाया है. अवैध लॉटरी के बढ़ते कारोबार की शिकायतें मिलने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में प. बंगाल सरकार को आदेश दिया था कि छपाई से लेकर वैध गंतव्य तक पहुंचने तक लॉटरी टिकटों की कड़ी निगरानी की जाए. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जिन राज्यों में लॉटरी वैध है वहां बिना बिकी टिकटों का हिसाब रखा जाए. भारत में लॉटरी नियमों के मुताबिक बिना बिकी टिकटों पर इनाम निकालना अवैध है और हर बार ड्रॉ निकलने के पहले एजेंटों का ये टिकटें जमा करना अनिवार्य है. हालांकि होता इसका उलटा है, बिना बिके टिकट कभी वापस नहीं होते और इनाम अकसर इन्हीं टिकटों पर निकलते हैं. जिसका मतलब है इनाम मार्टिन और उसके साथियों के पास जमा टिकटों पर मिलता है. प. बंगाल सीआईडी के डीआईजी और स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल अनुज शर्मा कहते हैं, ‘हमें तकरीबन हर दिन ऐसी शिकायतें मिलती हैं कि इनाम का नंबर बिना बिकी टिकटों में निकला. इसके अलावा जाली टिकटों के मामले भी होते हैं: जब लॉटरी विजेता इनाम लेने जाता है तो उसे पता चलता है उसका इनाम कोई और लेकर चला गया.’ शर्मा कहते हैं कि विजेताओं को पूरा पैसा न मिलने की खबरें मिलती रहती हैं मगर कोई भी मार्टिन और उसके गुर्गो के डर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराता.’

मार्टिन की गतिविधियों से परेशान प. बंगाल के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता ने हाल ही में एक राज्य कैबिनेट को बताया था कि कैसे इन रैकेटों की वजह से सरकार द्वारा चलाई जा रही लॉटरियों को चपत लग रही है. दासगुप्ता कहते हैं, ‘हमने सतर्कता आयोग से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है.’  वैसे भारत में लॉटरियों में धोखाधड़ी के आरोप कोई नई बात नहीं हैं. पिछले साल अरुणाचल प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग पर स्वतंत्रता दिवस को हुए लॉटरी ड्रॉ में हेराफेरी के आरोप लगने के बाद राज्य में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे.

अब सवाल यह है कि बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन? सबूतों की बात करें तो कम से कम कागजों पर तो मार्टिन के खिलाफ ढेरों सबूत हैं. उसके खिलाफ लॉटरी टिकटों की अवैध बिक्री, कर चोरी और हवाला से जुड़े 61 मामले हैं. इसके बावजूद वह आज भी कानून के घेरे से बाहर है. असम से कांग्रेसी सांसद और लॉटरी कारोबार के एक और दिग्गज मणि कुमार सुब्बा से मार्टिन के संबंध जग जाहिर हैं. हालांकि मार्टिन के सहयोगियों का दावा है कि इस कारोबार में वह सुब्बा से मीलों आगे है. वैसे सुब्बा की फर्म एमएस असोसिएट्स पर भी गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप हैं. भारतीय महालेखा परीक्षक और नियंत्रक का एमएस असोसिएट्स पर आरोप है कि वह 25 हजार करोड़ के मेघालय लॉटरी घोटाले और नागालैंड लॉटरी घोटाले जिसमें विजेताओं को मिलने वाली पांच हजार करोड़ की रकम गायब कर दी गई थी, में शामिल है. अनुज शर्मा कहते हैं, ‘मार्टिन भी इसी तरह काम करता है, लेकिन सुब्बा के उलट उसका कारोबार पूरे देश में है.’

यह अवैध कारोबार अब दूसरे राज्यों की पुलिस की नजरों में भी आ रहा है. पिछले महीने पंजाब में अपराध जांच एजेंसी (सीआईए) ने पंजाब लॉटरी की बजाय अवैध लॉटरी टिकटें बेचने वाली दो दुकानों पर छापे मारे थे.  अवैध लॉटरी टिकटों की बिक्री हो रही थी. इनपर पं बंगाल का पता छपा था. अखबार द ट्रिब्यून से बात करते हुए मोहाली के एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर का कहना था, ‘वे गैरकानूनी टिकट बेच रहे थे. सरकारी खजाने को हर महीने लाखों का चूना लग रहा था. छापे पड़ने के बाद वैध लॉटरी की बिक्री बढ़ गई. 2008 में जहां हर महीने 8.9 करोड़ रुपए के टिकट बिक रहे थे वहीं 2009 में यह आंकड़ा 23 करोड़ को पार कर गया.’ भाजपा महासचिव और दिल्ली में ‘सिंगल डिजिट लॉटरी’ पर प्रतिबंध लगवाने में अहम भूमिका निभाने वाले विजय गोयल कहते हैं, ‘कांग्रेस लॉटरी बिक्री के पक्ष में थी क्योंकि इससे उन्हें कर मिलता था. अब प्रतिबंध लगने के बाद पूरे भारत में अवैध लॉटरी टिकटों की बिक्री में तेजी आ गई है.’

गोयल मानते हैं कि इसका सिर्फ एक समाधान है कि संसद में लॉटरी प्रतिबंधित करने वाला विधेयक लाया जाए. जब तक यह नहीं होता तब तक दूसरों की बेवकूफी, लालच और तयशुदा बदकिस्मती से मार्टिन की दुनिया आबाद रहेगी.

Comments (4 posted):

chandra kant shukla on 23/02/10 01:17:55
avatar
sahi hai bhai is desh mea imandar aadmi to do vakt ki roti hi kha le to bahut hai.
radhey shyam dixit on 09/03/10 07:15:13
avatar
very good story, keep it up tahalka....un logon se guzarish ki is story ko padhne ke bad lottery ke chakkar mein katai na pade.
Rajesh Shukla on 13/04/10 06:21:03
avatar
HAMARE DESH KI YAHI TO BADKISMATI HAI..YAHA EK 100 Rs KE CHORI KARNE WALO KE PICHE PURA POLICE MAHKAMA LAG JATA HAI.. LEKIN IS CURRAPTION KE DUNIYA KE BADE MAGARMACCHO PAR HAATH DALANE ME PURE MAHAKAME KE PHATI HAI
poonam on 07/05/10 05:52:58
avatar
shantanu ji aapki story lajawab he. tehelka apni esi storys ke liye hi bemisal he.
Post your comment comment
Please enter the code you see in the image:
  • email Email to a friend
  • print Print version
  • Plain text Plain text
Rate this article
4.67