भाभी हुई किताबी

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घर में रोक लगी तो क्या हुआ? देश की बहुचर्चित भाभी बरास्ते फ्रांस देश-दुनिया के दरवाजे पर फिर से दस्तक दे रही है. एडलिन बर्टिन की रिपोर्ट

वयस्क कार्टून श्रंखला सविता भाभी डॉट कॉम के जरिए पहली संपूर्ण देसी वयस्क महिला चरित्र सविता भाभी से भारतीयों का पहला परिचय मार्च 2008 में हुआ था. सविता भाभी ने बोझिल-उबाऊ भारतीय घरेलू महिला के एक शोख, चंचल और कामुक पहलू को दुनिया के सामने रखा. एलेक्सा के आंकड़ों ने इसकी सफलता की जो मीनारें खड़ी की थीं, उसके सामने बड़ी-बड़ी वेबसाइटें पानी भरने लगी थीं. 2009 में भारत सरकार ने इसपर अश्लील होने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा दिया. अब इस पॉर्न स्टार को भारत से हजारों मील दूर फ्रांस में शरण मिल गई है.

निश्चित रूप से ये मेड इन इंडिया मार्का एक फूहड़ नकल है, जिसमें सारी चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, मसलन इसके रंग या फिर सविता भाभी की असामान्य छातियां. लोग इसे देखना ही पसंद करते हैं’ 

यौन उत्कंठा से सराबोर, साड़ी में लिपटी सविता भाभी ने 2008 में इंटरनेट पर पदार्पण के साथ ही देश-विदेश में सनसनी मचा दी थी. पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से इसपर आ रहा जबर्दस्त ट्रैफिक इसका सबूत था. इस आसमान छूती लोकप्रियता का खामियाजा भी इसे जल्दी ही भुगतना पड़ा. इस वेबसाइट पर प्रतिबंध लगा दिया गया. सरकार ने यह कदम इन आरोपों के आधार पर उठाया था कि यह परंपरावादी भारतीयों की भावनाओं को चोट पहुंचाती है. सविता भाभी की विषय सामग्री को देखें तो, उसके पास खूब समय था और उसके पति ज्यादातर बाहर ही रहते थे. इसका इस्तेमाल वह नए-नए लोगों के साथ मौज-मस्ती करने में करती थी. ऐसे में उसपर विरोध के सुर पैदा होना अस्वाभाविक नहीं था.

लेकिन इस सम्मोहिनी के बढ़ते कदम को रोक पाना इतना आसान नहीं था- सविता भाभी वापस आ गई है. लेकिन इस चरित्र की वापसी एक अलग अंदाज में हुई है- कागज-कलम के सहारे. सविता भाभी एक और लोकप्रिय माध्यम कॉमिक्स का अवतार ले चुकी है. कॉमिक्स के अवतार में उसे पेश करने का श्रेय गया है यौन विषयक सामग्री के प्रकाशन में अव्वल मानी जाने वाली फ्रांसीसी कंपनी एडिशंस ब्लैंके को. एडिशंस ब्लैंके के मुखिया फ्रैंक स्पेंगलर के मुताबिक उन्हें सविता भाभी का चरित्र पहली ही नजर में भा गया, ‘वह बहुत ही खूबसूरत, मजेदार और वास्तविक है. सविता मस्ती से सराबोर महिला है जो यौन सुख बांटना और पाना पसंद करती है.

स्पेंगलर ने इसे देखने के बाद तुरंत ही लंदन स्थित इसके भारतीय मुखिया से संपर्क किया जिन्हें सारी दुनिया देशमुखके नाम से जानती है. अगले कुछ दिनों के दौरान उनके बीच मेल के जरिए बातचीत जारी रही. स्पेंगलर कहते हैं, ‘हमारी सिर्फ एक बार ही मुलाकात हुई है. वे बहुत सशंकित थे. उनका नाम बताना मेरे लिए संभव नहीं है.एडिशंस ब्लैंके कहती है कि उन्होंने देशमुख से अधिकार हासिल करने के लिए 1,500 यूरो (करीब एक लाख रुपए) एडवांस में दिए और साथ ही रॉयल्टी के तौर पर कमाई का छह फीसदी देने का वादा भी. फिलहाल इसके मुद्रित संस्करण की लोकप्रियता ठीक-ठाक है- 4,000 प्रतियां छपी थीं जिनमें से 2,000 पहले ही बिक चुकी हैं. स्पेंगलर मानते हैं कि निश्चित रूप से यह उतना सनसनीखेज नहीं है जितना यह इंटरनेट पर हुआ करता था.

नए अवतार में सविता भाभी की दो नई  कॉमिक्से आई हैं- बॉलीवुड इन लव  और लव इन बॉलीवुड. इनकी कीमत 13 यूरो (880 रुपए) के करीब है. हर इश्यू में दो कहानियां हैं. स्पेंगलर बताते हैं, ‘हम मई-जून में तीसरा इश्यू प्रकाशित करने पर विचार कर रहे हैं. अगर बिक्री बढ़िया रही तो बिलकुल नई कहानियों का प्रकाशन भी करेंगे, मौजूदा इश्यू पहले से ही इंटरनेट पर आ चुका है.’ हालांकि फ्रांस में पॉर्न कॉमिक्स इतनी ज्यादा लोकप्रिय नहीं हैं लेकिन फ्रांसीसी उत्सुकतावश सविता भाभी तरफ खूब आकर्षित हो रहे हैं. स्पेंगलर कहते हैं, ‘निश्चित रूप से ये मेड इन इंडिया मार्का एक फूहड़ नकल है, जिसमें सारी चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, मसलन इसके रंग या फिर सविता भाभी की असामान्य छातियां. लोग इसे देखना ही पसंद करते हैं.और वैसे भी एडिशंस ब्लैंके के सामान्य व्यापार की तुलना में भाभी पर दांव लगाने में कम जोखिम है.

लेकिन सविता भाभी के कारनामों का एक बड़ा प्रशंसक वर्ग आप्रवासी भारतीय हैं जिनके लिए कॉमिक्स श्रंखला सिर्फ एक अतिरिक्त माध्यम भर है. वैसे भाभी को अब भी इंटरनेट पर देखा जा सकता है. बस पता-ठिकाना थोड़ा अलग है. वेबसाइट का नाम है- किर्तु डॉट कॉम. और भाभी की लोकप्रियता का नया आयाम यह है कि हाल के दिनों में स्पेनी और फ्रांसीसी प्रशंसकों ने भी इसके कल्पनाकार को पत्र लिखकर अपनी-अपनी भाषाओं में इसके संस्करण लाने की मांग की है.  

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