पत्रिका
तहलका विशेष
“तहलका स्टिंग की चर्चा”: News18 से लेकर Times Now तक, तहलका...
तहलका की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के क्रिकेट में फिक्सिंग के अंडरकवर मामले की अपनी रिपोर्ट पब्लिश करने के चार दिन बाद, यह कहानी इंडियन क्रिकेट और उससे भी आगे चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है। News18, नवभारत टाइम्स, ABP लाइव, हिंदुस्तान टाइम्स, मनीकंट्रोल, टाइम्स नाउ, बिजनेस स्टैंडर्ड, भास्कर इंग्लिश, News9 लाइव और याहू स्पोर्ट्स उन बड़े आउटलेट्स में से हैं जिन्होंने इस जांच पर रिपोर्ट की है, और उनमें से कई ने तहलका की जांच को चेन्नई सुपर किंग्स में चल रहे विवाद का मुख्य सोर्स बताया है। इसका असर तुरंत हुआ है। CSK ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और 25 सितंबर को अपनी बोर्ड मीटिंग और एनुअल जनरल मीटिंग में इस मामले को उठाने के लिए तैयार है, जिसमें प्लेइंग-XI लीक और मैच-फिक्सिंग के आरोपों पर "सही कार्रवाई" का वादा किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय
मक्का की ओर ड्रोन का सऊदी दावा, हूतियों का इनकार; यमन...
नई दिल्ली — 17 सितंबर, 2026 — सऊदी अरब ने 15 सितंबर को दावा किया कि मक्का की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को इंटरसेप्ट कर लिया गया। हूतियों ने पवित्र स्थलों को निशाना बनाने से इनकार किया है। घटना के बाद मुस्लिम देशों में प्रतिक्रिया तेज हुई है, लेकिन ड्रोन हमले के सऊदी दावे के सार्वजनिक सबूतों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। सऊदी अरब के मुताबिक, 15 सितंबर को मक्का, जेद्दा और ताइफ में कुछ समय के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया था। नागरिकों को संभावित हवाई खतरे को देखते हुए सावधानी बरतने को कहा गया।
राजनीति
आम आदमी के हक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: वंदे मातरम्, कैंसर...
सुप्रीम कोर्ट में पिछले दो दिनों में आम लोगों के अधिकार और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े तीन अहम मामले चर्चा में रहे। इनमें वंदे मातरम् गाने को लेकर आपराधिक कार्रवाई, कैंसर की जरूरी दवाओं की कीमत और दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) से जुड़े मामले शामिल हैं। वंदे मातरम् मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है, कैंसर दवा मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को है और दिल्ली एसआईआर (SIR) मामले में चुनाव आयोग से जवाब और स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है। इसलिए फिलहाल कोर्ट की टिप्पणियों और आगे आने वाले संभावित असर को समझना ज्यादा जरूरी है।
राज्यवार
ओबीसी के प्रभावशाली जातियों पर राजनीति करने वाले दलों को लगेगा...
अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नींव पर खड़े सियासी दल किनारे लग चुके हैं। अब नंबर उन दलों का है जो ओबीसी के प्रभावशाली जातियों के रहनुमा के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी और बिहार की राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख हैं। जातीय जनगणना की बाट जोह रहे ऐसे दलों को रोहिणी आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के साथ ही बड़ा झटका लग सकता है। केंद्र सरकार उचित समय और मौके पर इस रिपोर्ट को संसद में रखकर इसके सिफारिशों को लागू करने का फैसला ले सकती है। संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक ओबीसी को नौकरी और शिक्षण संस्थानों में 27 फीसदी आरक्षण मिलता है। मंडल आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद कई राज्यों में सियासी दलों ने खुद को ओबीसी चैंपियन के रूप में स्थापित किया।
सावधान! वोट नहीं दिया तो कट जाएगा नाम? समझिए बंपर वोटिंग...
पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में बंपर वोटिंग महज चुनावी उत्साह नहीं, बल्कि वजूद बचाने की जंग ज्यादा नजर आ रही है! राजनीतिक के...
आप से बात
राखी के धागे में देशभक्ति का रंग, बाजार में ‘स्वदेशी’ की...
बृज खंडेलवाल
ढोलक की थाप, रंग-बिरंगी राखियां और मिठाइयों की खुशबू से बाजार गुलजार हैं। दुकानों पर बहनें राखियां चुन रही हैं, बच्चे उत्साह में...
पहलगाम का असली संदेश और सीख?
पूर्व सैन्य कमांडरों ने पहलगाम में हुए हालिया आतंकवादी हमले का कारण ख़ुफ़िया जानकारी और सुरक्षा तैयारियों में भारी विफलता बताया है। जम्मू-कश्मीर में...
टैरिफ : झटका या अवसर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ पर अचानक यू-टर्न ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को गहरा झटका दिया है। चीन को छोड़कर अन्य सभी देशों...
न्यायमूर्ति के घर में नक़दी का अजीब मामला
विलियम शेक्सपियर ने 'जूलियस सीज़र’ में लिखा था कि 'सीज़र की पत्नी को संदेह से परे होना चाहिए।’ यह पंक्ति इस अपेक्षा को रेखांकित...





































































