Tehelka Hindi: 'बहुत पढ़ने की चाहत नहीं है. बहुत चुनकर पढ़ता हूं.' 'बहुत पढ़ने की चाहत नहीं है. बहुत चुनकर पढ़ता हूं.' ================================================================================ Sanjay Dubey on 20/01/2011 13:32:00 आपकी पसंदीदा विधा कौन-सी है? पढ़ने की मेरी यात्रा उपन्यास से शुरू हुई, बचपन से. तब चोरी-चुपके गुलशन नंदा और वेद प्रकाश के उपन्यास पढ़ता था. फिर गोदान और देवकीनंदन खत्री की पूरी सिरीज पढ़ी. उपन्यासों के अलावा कविताएं भी पसंद हैं. इन दिनों क्या पढ़ रहे हैं? मैं दूसरे उपन्यास की तैयारी कर रहा हूं. इसी सिलसिले में पढ़ाई चल रही है. 12वीं शताब्दी में तब के लेवॉन्त (अब लेबनान) में एक बड़ा युद्ध हुआ था, जिसमें एक तरफ से मिस्र और दूसरी तरफ से संयुक्त सेना लड़ी थी. संयुक्त सेना का नेतृत्व खत्ती सिलेस ने किया था और दुनिया की कोई भी जाति ऐसी न थी जिसने इस युद्ध में हिस्सा न लिया हो. इस युद्ध के केंद्र में भी वही सवाल था कि क्या एक संप्रभु राष्ट्र को सबकी संप्रभुता हर लेने का अधिकार है. संयोग से उस इलाके में शक्तियों का वैसा ही समीकरण आज भी बना हुआ है. आपकी पसंदीदा कृतियां कौन-सी हैं? गोदान, राग दरबारी और रांगेय राघव का शोधपरक लेखन मुझे बहुत पसंद है. वैश्विक साहित्य में मादाम बोवेरी, सरवांतेस का दोन किखोते तथा दोस्तोयेव्स्की का क्राइम ऐंड पनिशमेंट बहुत पसंद हैं. ऐसी रचनाएं या लेखन जिन पर लोगों की नजर नहीं गई? आजकल जो लिखा जा रहा है, मुझे उसको पढ़ने का मौका नहीं मिल पाता. पुराने लेखकों में मुझे लगता है कि हर लेखक को उसकी जगह मिल ही गई थी. बेवजह मशहूर हुईं रचनाएं और लेखक? मैं इस चीज से बचा हुआ हूं. मुझमें बहुत पढ़ने की चाहत नहीं है. बहुत चुनकर पढ़ता हूं. पढ़ने की रवायत बनी रहे इसके लिए क्या किया जाए? यह समस्या हिंदी में ही है. बांग्ला, मराठी, उड़िया, कन्नड़, गुजराती में लोग आज भी पढ़ रहे हैं. दरअसल हमारे यहां लोगों ने अपने भोगे हुए यथार्थ को ही महान बताकर लिखने का चलन बना दिया है. रेयाज उल हक