तहलका हिन्दी: कितनी लंबी यात्रा ================================================================================ Sanjay Dubey on 02/04/2009 09:20:00 हर तरह के संघर्षों के बावजूद सरोकारी पत्रकारिता का एक विचार आज भी सांसें ले रहा है सौ ग्राम सिनेमा ================================================================================ Sanjay Dubey on 03/05/2012 05:49:00 जब बोफोर्स का जिन्न 25 साल बाद और ऑपरेशन वेस्टएंड (तहलका कांड) का 11 साल बाद बड़े धूम-धमाके के साथ बोतल से बाहर आ गया संकट और सवाल ================================================================================ Sanjay Dubey on 16/05/2012 02:53:00 कांग्रेस का कहना है कि वह पीछे नहीं देखेगी, आगे बढ़ेगी. लेकिन मुश्किल यह है कि न उसके पास पीछे देखने लायक कुछ बचा है ‘सत्यमेव जयते’ का सच ================================================================================ Sanjay Dubey on 16/05/2012 04:03:00 अफसोस, सत्य फिर पराजित होता दिख रहा है आजाद भारत के निर्माताओं ने पता नहीं क्या सोचकर राष्ट्र का आदर्श वाक्य चुना : ‘सत्यमेव जयते’. इसके ‘चश्मे पर बारीक नज़र’ ================================================================================ Sanjay Dubey on 02/03/2012 05:17:00 चश्मे को लेकर पचासों तरह के भ्रम हैं तथा हजारों सलाहें चलती हैं. मैं जानता हूं. मुझे दी गई हैं. लानतें भी, सलाहें भी. बचपन ‘आने वाला पल जाने वाला है’ ================================================================================ Sanjay Dubey on 07/05/2012 06:46:00 बॉलीवुड में ‘अंडरवर्ल्ड’ की स्थानीय रेल से ज्यादा पटरियां मिल जाएंगी. लेकिन गुण देखने चलेंगे तो गुणों की एक सुंदर अविरल बहती नदी भी मिलेगी. अनुपम मिश्र का आलेख प्रश्नों से घिरे परीक्षण ================================================================================ Sanjay Dubey on 22/03/2012 07:15:00 व्यापक जनहित में दवा परीक्षण जरूरी होते हैं, लेकिन उनके कुछ उसूल और कायदे भी तो हों. डॉ एके अरुण का आलेख अपराध और दंड ================================================================================ Sanjay Dubey on 30/11/2011 05:49:00 अकसर देखा गया है कि चैनलों को दूसरों के दुख या परेशानी या कष्ट की खिल्ली उड़ाने में बहुत मजा आता है. लेकिन कहते हैं साधो, वश नहीं भीड़ पर ================================================================================ Sanjay Dubey on 06/07/2011 06:08:00 रामदेव और उनके अनुयायियों के साथ पिछले महीने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई सरकारी ज्यादती के प्रसंग में गांधी का व्यक्तिगत सत्याग्रह अनायास ही फतवा है, फरमान नहीं ================================================================================ Sanjay Dubey on 06/12/2010 20:42:00 फतवा सभी पक्षों की बात सुनकर, सबूतों का मूल्यांकन करने के बाद, सुझाव के तौर पर दिया जाना चाहिए