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सरोकारी आविष्कार

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दसवीं तक भी नहीं पढ़े एक शख्स का ऐसा आविष्कार, जिसने देश की दसियों हजार महिलाओं की जिंदगियां बदल कर रख दी हैं. पीसी विनोज की रिपोर्ट

प्रति घंटे 120 नैपकिन का उत्पादन करने वाली ऐसी करीब 100 मशीनें अब तक पूरे देश में लगाई जा चुकी हैं जिनमें से 29 तो सिर्फ हरियाणा में ही हैंकुछ दिन पहले तक विजया और लता नाम की बहनें कोयंबतूर में नाममात्र की तनख्वाह पर नौकरी किया करती थीं. पिछले साल नवंबर में उन्होंने जैसे-तैसे 85,000 रूपए इकट्ठा किए और उनसे एक स्थानीय कारीगर द्वारा ईजाद की गई मशीन खरीद डाली. बस तभी से मानो उनकी सारी आर्थिक परेशानियां छूमंतर हो गईं. इसका मतलब ये नहीं कि ये कोई नोट छापने की मशीन है. दरअसल इससे महिलाओं की सैनिटरी नैपकिन बनाई जाती है. ‘हमने एक तमिल पत्रिका में इसके बारे में पढ़ा था और तभी हमने इसे खरीदने का फैसला कर लिया था,’ लता कहती हैं. आज वो नैपकिन बेचकर महीने में 5000 रुपए से ज्यादा आसानी से कमा लेती हैं और उनका उत्पाद कोयंबतूर और आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में खासा सफल है. उनकी नैपकिन ‘टच फ्री’ के नाम से बाजार में उपलब्ध है. दोनों बहनें महीने में 7-8 हजार पैकेटों का उत्पादन करती हैं और एक पैकेट में आठ नैपकिन होते हैं. उनके आस-पास रहने वाली महिलाएं जहां सीधे-सीधे ही उनसे खरीददारी कर लेती हैं वहीं घरों, दफ्तरों और कॉलेजों में इसकी बिक्री करने के लिए उन्होंने कुछ सेल्सगर्ल्स भी रखी हुई हैं.

उनके घर से थोड़ी ही दूरी पर रहने वालीं अवकाशप्राप्त शिक्षिका राजेश्वरी ने भी इसी तरह का अपना एक छोटा सा कारखाना लगा रखा है. ‘हमारी नैपकिन बाजारों में बिकने वाली आम नैपकिन से मोटी होती है’ वो कहती हैं, ‘ये उन ग्रामीण महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है जिन्हें दिन-भर खेतों में काम करना पड़ता है, जिससे कि एक ही पैड पूरे दिन चल सके.’

 

ए मुरुगनंथम 

बेहद कम लागत में तैयार होने वाली इस सैनिटरी नैपकिन को बनाने वाली मशीन 47 वर्षीय ए मुरुगनंथम का आविष्कार है जिन्हें दसवीं कक्षा में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. प्रति घंटे 120 नैपकिन का उत्पादन करने वाली ऐसी करीब 100 मशीनें अब तक पूरे देश में लगाई जा चुकी हैं जिनमें से 29 तो सिर्फ हरियाणा में ही हैं. इसके अलावा इन मशीनों को उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड में भी लगाया जा रहा है. एक मोटे-मोटे अनुमान के मुताबिक मुरुगनंथम की ये मशीन आज देश भर में करीब ढाई लाख महिलाओं के काम आ रही है.

मुरुगनंथम को इस बात की जानकारी होने में ही दो साल लग गए कि सैनिटरी नैपकिन में प्रयोग होने वाली पैडिंग चीड़ के पेड़ के गूदे से बनती है न कि साधारण कपास सेअपने आविष्कार की जबर्दस्त सफलता के बावजूद मुरुगनंथम ने अपनी इस मशीन का पेटेंट अधिकार बेचने से साफ इनकार करते हुए एक निजी कंपनी का ब्लैंक चेक वापस कर दिया. उनका कहना था कि वो अपनी मशीन का उपयोग ग्रामीण और गरीब शहरी महिलाओं के बीच सफाई और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए करना चाहते हैं. मुरुगनंथम के मुताबिक देश के ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर महिलाएं सैनिटरी पैड के रूप में कपड़े का इस्तेमाल करती हैं जो कि असुरक्षित है और इससे तमाम तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है.

2006 में आईआईटी मद्रास ने मुरुगनंथम को ‘समाज के स्तर में सुधार के लिए किए गए आविष्कार’ की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से नवाजा था. उन्हें अक्सर बिजनेस स्कूलों में व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया जाता है. पिछले साल उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद में देश भर से उपस्थित हुए आविष्कारकों की बैठक को भी संबोधित किया था. मगर सफलता के इस मुकाम तक का संघर्ष आसान नहीं रहा. पिता के स्वर्गवास के बाद मुरुगनंथम के परिवार को काफी समय तक भीषण संघर्ष करना पड़ा था. उस दौरान कुछ सालों तक एक वेल्डिंग की दुकान में एक साधारण मैकेनिक का काम करने के बाद उन्होंने कोयंबटूर में अपनी खुद की खराद की दुकान खोली. चार सालों की अथक मेहनत के बाद उन्हें सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली मशीन बनाने में सफलता मिली. उन्हें इस बात की जानकारी होने में ही दो साल लग गए कि सैनिटरी नैपकिन में प्रयोग होने वाली पैडिंग चीड़ के पेड़ के गूदे से बनती है न कि साधारण कपास से.

जैसे कि मुरुगनंथम बताते हैं, ‘जब मैंने शोध करना शुरू किया तो मेरे परिवार वालों को लगा कि मैं पागल हो गया हूं. यहां तक कि इस दौरान मेरी मां मुझे छोड़ कर चली गई और मेरी बहन ने मुझे नजरअंदाज करना शुरू कर दिया.’ लेकिन आज मुरुगनंथम की सफलता पर सभी को बेहद गर्व का अनुभव होता है.       

Comments (16 posted)

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vinay 04/05/2012 10:42:25
pls send mob-no and adderess of murugatham viay bothra 09926478884
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bijay 14/04/2012 22:40:32
First time tahalka ne badhiya khabar dikhayi//murugan sir, i salute you/you r the real MITTI KE SHER//keep it up,God bless u//jai hind//
Reply Thumbs Up Thumbs Down
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Manish Bansal 31/01/2012 22:56:50
An effort that need do be rewarded at high level . We are giving padmshree..padmbhshan to people having political connection. .It is such type of people that need to awarded
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sneh 15/11/2011 15:50:58
kindly send full details and contact no to my ngo 7398713678/9044517493
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krishna murari yadav 20/08/2011 11:56:47
आपने बहुत अच्छा कम किया है मुरुग्नंथम. धन्यवाद. अब चिंता इस बात की है की कोई दुष्ट व्यक्ति आपकी मशीन में थोडा फेर बदल करके पेटेंट न करवा ले.क्योंकि पेटेंट प्रक्रिया पर आधारित होता है, उत्पाद पर नहीं.
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Sarika N.Bhoyar 18/10/2010 12:28:12
Its a very nice research from Mr.Murungnatham.Please send the contact no.for other communication
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Sanjeev Singhal 13/07/2010 06:03:30
Hamari Kendra sarkar ko aisey rojgar parak avishkaron key liye sarvochh samman deney chahiye,avam grih udyog ko badava dena chahiye, lekin issey Mantri aur burocrates ko koi amdani nahi hogi, ulta Deshwashi atam-nirbhar ho jayengey, isliyye..... Chup raho.
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Ghanshyam 10/06/2010 10:13:05
can any one give me the contact details means i want to buy this machine for business purposes.
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ajit dwivedi 04/03/2010 16:19:49
i want to know contact no. of murugnathm ji
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Rakesh Sain 06/10/2009 10:56:42
Madhuban Khushboo deta hai, saagar sawan deta hai. jeena uska jeena hai jo auron ko jeevan deta hai.

bahut achhe Murungantham bhai aur reporter ka bhi dhanyavad jinhon ne samaj mein ho rahe achhe kaam ko flash kiya hai. tehelka team ko dhanyavad
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mahendra singh 22/09/2009 13:12:50
i want to know contact no. of murugnathm ji.....
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satya sandesh dangi 14/09/2009 04:55:04
the work done by Murugnathamji is great in the field of selfemployement.great congratulations to him.do me a favour.
Please send me any address or contact no. related to this product. thanks a lot.
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Parmarth Suman 12/09/2009 09:56:29
This news must be spread around the india. I think lot of un-employed men/women will be benefitted from this.
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aditya 10/09/2009 07:27:58
murugnathamji ko badhaai...is desh ko apne netaaon se to koi umeed rahi nahi...gareebi duur karne ke bade bade vaade kar ye netaa chunaav jeet jaate hain...aur fir lagbagh har samay dilli ya videsh ke dore kate rehte hain...is desh se gareebi aur ashiksha hataane ke liye aisi hi aam logon ki darkaa hai. vaise to koi umeed nahi ki koi netaji tehalka padhte honge likin agar bhuule bhatke koi ye pad lein to unse vinti hai ki aap apne raichandon ke saath milkar bhi to itna soch nahi sakte kam se kam murugnathamji jaise log jo kuch karna chahte hain unhe thodi si aarthik madad hi muhaiya kara dein to unka is desh par ehsaan hoga.

tehalka ko unke prayaas aur hindi site par badhaai.
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abhishek 09/09/2009 06:54:34
padkar achha laga
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Saagar 03/09/2009 08:24:13
मुरुगनंथम को इस कड़ी मेहनत और सफलता पर बधाई... एक रिस्क ने रिस्क कवर कर दिया... वे वाकई रौशनी दिखाती लौ हैं...
बहुत अलग समाचार है...
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