राजनीति का हम्माम और नंगे हुक्काम
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   बोलती चिचरी

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उसे छोटू बोलते हैं,

बिल्कुल छोटा सा है

ऐसे नाम परेमू है।

नहीं, नहीं! कोई प्रेम का बिगड़ा रूप नहीं

अरे प्रेम तो छोड़िए प्रेमू भी नहीं।

पढ़ना लिखना नहीं जानता

पन्ने पर कभी चिचरी भी नहीं पारी है उसने,

ये दीगर बात है कि

वो खुद बोलती चिचरी है।

यह 'हाल्ट' है,

नमकीन करारे का

अभी-अभी पाठ सीखा है छोटू ने,

, , ग... की जरूरत नहीं समझता

और न ही ये मुंह चिढ़ाते हैं,

पैसेंजर ट्रेन के रुकते ही,

दो-चार पैकेट नमकीन के निपटा देता है वो बस

पटरियों के बीच पड़े पत्थरों को

परेमू के नरम पांव रास आते हैं

और कुछ को उसका लप्प-लप्प बचपन

पांव भले ही धप्प-धप्प करते हों।

पर ये रास आना

ये लप्प-लप्प

ये घप्प-धप्प

कुछ ही दिनों में गायब हो जाते हैं।

घाम का माथा ठनका हुआ है

उसकी तेज़ी असर नहीं डाल पा रही

या असर छोड़ने से इनकार कर रही

या शर्मिंदा है?

कुछ समझ नहीं पा रही घाम

और पत्थरों को अब नसीब नहीं है

शुरुआती नरम-नरम साथ

फेर में पड़े हुए हैं-

हो क्या गया है?

दिखते तो पांव ही हैं

पर सख्त अपने बराबर,

अजब ठक-ठक होती है,

छोटा सा तो अब भी दिखता है,

कमबख़्त !

सन्न घाम को ठेंगा दिखाते

और मरुआए पत्थरों पर पैर मारता

छोटू दौड़ता जा रहा है,

मारे खीस में,

साला, चकचोन्हर कहीं का!

लवंडा समझता है

अब भी !

प्रवीण तिवारी  

(लेखक इंडिया ऑब्ज़र्वर पत्रिका में बतौर संवाददाता कार्यरत हैं। कविता लेखन का शौक रहा है। तमाम प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती है।)

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अपनी राय दें comment कुल टिप्पणियां: 6

  • प्रेषक : shreema Sarkar
    Kavi par hamey naaz hai.........
  • प्रेषक : SK Rai
    Guru------Divy hai!Bheeshan bhi!Aisi hi apeksha thi! Aasha hai ki is se bhi achchha aanaa abhi baanki hi hai!
  • प्रेषक : RK NIKHIL
    Dhanyavaad Praveen! Bahut hi shaandaar kavita hai1 Iski jitni bhi prashansaa ki jaye utni hi kam hai. Yeh kavita Hindi Sahitya ke nabh mandal me kayi naye aayaamon se saakshaatkaar karaa rahi hai. Harek drishti se yeh kavita adbhut lagi! Aashaa hai ki is tarah ki aur bhi kavitaayen padhne ko milti rahengi.
  • प्रेषक : MITHILESH JHA
    BOLTI CHICHIRI kavita bahut natural lagi. her shabd aur panktiyaan baihad majedaar lagi,kavita ka nayaa andaaj lagaa.
  • प्रेषक : mahendra
    mahanagaron main aise'chotoo' aam hain.yaha kavita sarkar ke'bal shram unmulan' ki pola kholati hai.