क्रिकेट जीता रे...
आईपीएल में क्रिकेट जीत गया। जितने लोग मैदानों में अपने-अपने शहर की टीमों का मैच देखने आ रहे हैं उतने लोग तो भारतीय टीम के मैचो में भी नहीं देखे गए। खेल ही इतना रोमांचक और आकर्षक हो रहा है।
इतने लंबे टूर्नामेंट में अभी और भी मैच होने हैं पर लोगों का उत्साह बराबर बना हुआ है। दर्शकों का इतनी तादाद में मैदान में आना और सारे शहरों के मैदानों पर उत्सव सा माहौल रहना आईपीएल के लिए उत्सुकता और लोकप्रियता दर्शाता है। दर्शकों और खिलाड़ियों की सुविधा का ख़ास ध्यान रखा गया है ताकि लोग गर्मियों में ऑफिस के बाद क्रिकेट का आनंद ले सकें और परिवार को ‘एंटरटेन’ कर सकें। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से भरपूर आईपीएल ने क्रिकेट को नए आयाम दिए हैं और खेल में नया उत्साह जगाया है। आने वाले प्रतिभावान खिलाड़ी ब्रैंडन मैकलम के सबसे ज्यादा स्कोर और एडम गिलक्रिस्ट के सबसे तेज़ शतक का पीछा करेंगे।
इससे पहले टी-20 क्रिकेट आंकड़ों की कमी से जूझता रहा है। आईपीएल ने इसे नया आयाम दिया है। अभी तक टूर्नामेंट में पांच शतक लगे हैं और दो हैटट्रिक ली जा चुकी है। आंकड़े ही किसी उपलब्धि को बार-बार याद किए जाने में मददगार रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से भरपूर आईपीएल ने क्रिकेट को नए आयाम दिए हैं और खेल में नया उत्साह जगाया है। आने वाले प्रतिभावान खिलाड़ी ब्रैंडन मैकलम के सबसे ज्यादा स्कोर और एडम गिलक्रिस्ट के सबसे तेज़ शतक का पीछा करेंगे। वो सोहेल तनवीर के छह विकेट या फिर ग्लेन मैक्ग्रा की सटीक गेंदबाज़ी, बालाजी की हैटट्रिक और शोएब अख्तर की रफ्तार से प्रभावित होंगे। शताब्दी के महानतम स्पिन गेंदबाज़ शेन वार्न और जादूगर मुरलीधरन की गेंदबाज़ी देखकर भारतीय धन्य हुए हैं। टी-20 में भी अब आंकड़े हैं। इसमें भी कोई ब्रैडमैन, कोई सोबर्स, कोई डेनिस लिली, कोई शेन वार्न और कोई सचिन तेंदुलकर निकल कर आएगा। जीवन की तरह खेल भी अपने विभिन्न प्रकारों में पनपता रहता है।
जैसे बदलाव क्रिकेट में आया है वैसा ही बदलाव क्रिकेट देखने वालों में भी आया है। टीवी पर क्रिकेट के अलावा मन बहलाव, घर का आराम और रिप्ले की सुविधा ने दूर-दराज के मैचों का आनंद दिलाया है। आईपीएल में लोग मैदान पर भी खूब आ रहे हैं और खेल टीवी पर भी खूब देखा जा रहा है। 1983 के विश्व कप फाइनल की याद करें और 2008 के मैचों के टीवी प्रसारण देखें, ज़मीन आसमान का अंतर आ गया है। दो तीन दशक पहले लोग मैदान पर क्रिकेट देखने को एक सांस्कृतिक अनुष्ठान मानते थे। और आज लोग आईपीएल को मेलानुमा माहौल या रियलिटी शो मानकर मज़ा लेने मैदान पर आते हैं। खेल में मनोरंजन पहले भी था अब भी है।
खेल को टीवी के अनुकूल करने और मैदान के हर पहलू को समेटने के लिए कैमरे बढ़ाए गए। कैमरे बढ़ने से टीवी दर्शक वही देख पाते हैं जो दिखाया जाता है। इसलिए अपनी आंखों से मैच का आनंद उठाने के लिए लोग फिर से मैदानों पर उमड़ने लगे हैं। टीवी पर मैच देखने में सुविधा के मद्देनज़र कई लोग यह भी मानते हैं टीवी पर मैच ज्यादा अच्छा दिखता है। मैदान पर होना और टीवी पर दिखना अपने आप में एक यादगार पल होता है। टीवी पर लोग बैनर या झंडे मैदान पर लाकर अपनी टीम का उत्साह बढ़ाते देखे जा सकते हैं। आईपीएल टीमों ने अपने-अपने शहरों में जीत के लिए रोमांच और आवेग पैदा किया है।
क्रिकेट के पंडित टी-20 को बच्चों के लिए ग़लत मानते हैं। कुछ हद तक उनका डर सही है। इस विषय की गंभीरता को समझते हुए मैं मानता हूं कि इसका सबसे ज्यादा ग़लत प्रभाव भारत के बच्चों पर पडे़गा क्योंकि टी-20 की लोकप्रियता यहीं सबसे ज्यादा है। टी-20 से बच्चों का क्रिकेट सीखना ग़लत होगा। अब वक्त आ गया है कि भारतीय वातावरण के मुताबिक क्रिकेट कोचिंग पुस्तिका पर फिर से शोध हो. जैसे बच्चा पैदा होने पर पहले पांव रखना फिर चलना और उसके बाद दौड़ना सीखता है वैसे ही क्रिकेट सीखने के लिए बच्चे को पहले सीधा बल्ला चलाना सीखना होगा और फिर आड़ा। आने वाली पौध को समझाने के लिए अच्छे प्रशिक्षक तैयार करने का जिम्मा भारतीय क्रिकेट बोर्ड को लेना होगा।
आईपीएल के बारे में कहा जा रहा था कि ये बल्लेबाजों का खेल होगा मगर इसमें गेंदबाज़ो का भी बोलबाला रहा है। एकदिवसीय क्रिकेट में गेंदबाज़ का एकमात्र उद्देश्य रन रोकना होता है लेकिन टी-20 में कम ओवर होने के कारण गेंदबाज़ों का लक्ष्य रन रोकने से ज्यादा विकेट लेने में माना जा रहा है। आईपीएल में देखा गया है कि रन बनने तभी रुके हैं जब बल्लेबाज आउट होता है। यानी अच्छे गेंदबाज़ों ने आईपीएल में विकेट लेकर ही मैच जिताए हैं।
टेस्ट क्रिकेट में मैच जिताने वाले जहां गेंदबाज़ होते हैं वहीं एकदिवसीय में बल्लेबाज़ी पर ज़ोर होता है। लेकिन आईपीएल में एकतरफा खेल की बजाय बल्लेबाज और गेंदबाज़ दोनों का ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बल्कि कहें तो गेंदबाज़ों ने आईपीएल में ज्यादा रोमांच पैदा किया है।
जैसे-जैसे आईपीएल अंतिम पड़ाव पर आएगा, लोग टीम मालिकों के जमा-जोड़ नखरे और चीयर लीडर्स के लटके झटके भूलते जाएंगे। तब जो बचेगा वो खालिस क्रिकेट होगा।
संदीप जोशी
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प्रेषक : kaduvasach.blogspot.com20-20 क्रिकेट एवँ आई.पी.एल. पर आपकी समीक्षा निचोड है , यह दर्शकोँ के लिये एक उम्दा मनोरंजन का माध्यम है ।






















