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   अस्सी वर्षीया कैटरीना कैफ और रिंगटोन
सार्वजनिक मूत्रालय के अंदर का सीन था। कई लोग थे। अचानक ओम जय जगदीश हरे होने लगी। किसी के मोबाइल की घंटी जय जगदीश हरे की टोन में बजी।
जहां धाराएं बह रही थीं, वहां भक्ति धारा प्रवाहित होने लगी।
ओम जय जगदीश हरे की ऐसी गत पहले कभी नहीं देखी। इसे मोबाइल की प्रगति भी कह सकते हैं।
विकट सीन हो लिये हैं जी।
कुछ दिनों पहले शवयात्रा में शामिल हुआ। शव जिस गाड़ी में रख कर ले जाया जा रहा था, उसके ड्राइवर के मोबाइल से आवाज आने लगी-आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा।
मैंने डांटा ड्राइवर को-अबे नसीब फूटें, जो तेरी गाड़ी में बैठे। और तू रिंगटोन से इनवाइट कर करके बुला रहा है-आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा।
बड़ी कांव कांव हुई।
इसी शवयात्रा में आगे फूंका फांकी के दौर में एक की रिंगटोन बज उठी-अरे ये तो बता, देखता है तू क्या।
अब ऐसे में कोई क्या देखे।
रिंगटोन्स विकट डेंजर हो लिये हैं।
अभी एक अस्सी वर्षीय कवि से मिलने गया। देवानंद की पुरानी फिल्मों के,उनके गानों के फैन हैं। बात चल ही रही थी कि उनका मोबाइल जानी मेरा नाम फिल्म का हिट गीत गाने लगा-हुस्न के सात रंग, कौन सा रंग देखोगे।
मैंने कहा बुजर्गवार से-अपने आप को क्या कैटरीना कैफ समझते हैं।
बुजुर्गवार ने बताया-ये रिंगटोन मैंने नहीं मेरे पोते ने डाली है।
पर पोते ने बताया कि ये धुन डाली तो उसने ही है, पर दादाजी की डिमांड पर ।
रिंगटोन्स के मामले में यह बदमाशी अलग चल रही है, सारी अगड़म बगड़म बातें यूथ के खाते में डाल दी जा रही हैं।
वैसे मैं सोच रहा हूं कि मनमोहन सिंह को जब भी प्रकाश करात फोन करते होंगे, तो मनमोहन सिंह के मोबाइल से क्या रिंगटोन उभरती होगी-चैन से हमको कभी, जीना तो जीने ना दिया.......।
वैसे मनमोहन सिंह अनारकली नहीं हैं, और प्रकाश करात भी मुगले आजम नहीं हैं, पर प्रकाश करात को जब मनमोहन सिंह फोन करते होंगे, तो रिंगटोन में वह यह डायलाग सुनते होंगे-अनारकली हम तुझे जीने नहीं देंगे, और हम ही तुझे मरने नहीं देंगे।
भाजपा, बसपा, कांग्रेस, सपा कौन किसके साथ कालोबोरेशन कर ले, पता नहीं। ऐसे संक्रमणकाल में इनके नेताओँ के फोन की रिंगटोन कुछ यूं होती होगी-तुम अगर मुझको ना चाहो, तो कोई बात नहीं। तुम किसी गैर को चाहोगी, तो मुश्किल होगी।
विकट सीन है जी।
वैसे खबर है कि प्रेजीडेंट के चुनावों से पहले अमेरिका में बुश की पार्टी की जो गति हो रही है, उसे देखते हुए बुश के फोन की रिंगटोन यह हो गयी है-हम छोड़ चले हैं महफिल को........।
आलोक पुराणिक
























