कालजयी लेखन
कुल रचनायें: 5 | प्रदर्शित: 1 - 5
 कामायनी- उपभोक्तावाद की काव्यात्मक आलोचना
 
किसी भी साहित्यिक रचना को कालजयी होने के लिए आवश्यक है कि वो हर युग की समस्याओं से किसी न किसी रूप में मुठभेड़ करने की क्षमता रखती हो। जयशंकर प्रसाद की "कामायनी" एक कालजयी कृति के रूप में समादृत ...
 हिंद स्वराज्य : एक हमलावर किताब !
 
बमुश्किल 70 छोटे पन्नों में समा जाने वाली एक पतली किताब सौ साल का सफर पूरा करने जा रही हो और इस सफर में वह लगातार ‘मोटी’ भी हो रही हो तो उसे अनदेखा करना मुश्किल है. इसलिए हिंद स्वराज्य ...
 एक अकालजयी पुस्तक - आज भी खरे हैं तालाब
 
ऐसी विरली ही पुस्तकें होती हैं जो न केवल पाठक तलाशती हैं, बल्कि तलाशे पाठकों को कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में तराशती भी हैं. अपनी प्रसन्न जल जैसी शैली तथा देश के जल स्रोतों के मर्म को दर्शाती एक ...
 रंगभूमि : पात्र बदल गए हैं
 
कोई 81 बरस पहले लिखा गया उपन्यास ‘रंगभूमि’ आज फिर हमारी भूमि पर अपना एक-एक पन्ना खोल रहा है. प्रेमचंद ने इसे उस समय लिखा था जब औद्योगीकरण बस अपना कदम उठा ही रहा था. आज वह सबको रौंद रहा ...
 सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा
 
मोहनदास करमचंद गांधी सच पूरा पर कथा अधूरीआत्मकथाएं कौन लोग लिखते हैं? जो लोग कुछ अच्छे कामों के कारण समाज का प्यार पाते हैं या फिर जो बुरे कामों के कारण बदनाम हो जाते हैं. एक तीसरी श्रेणी ऐसे लोगों ...
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