बे की बेतुकी
कुल रचनायें: 5 | प्रदर्शित: 1 - 5
 हाथ मलता रह जाएगा
 
आहट तो आ गई है सुना है जल्द वो भी आएगामगर आने फिर उसके जाने में कुछ नहीं तू पाएगाउसके आने की आहट है उससे हसींउसी का ले मज़ा वरना हाथ मलता रह जाएगाइस वर्ग की सभी रचनाएं
 तेरी चार करोड़ पहचान
 
कल तक थे देश और देशवासियों की शान अब करेंगे ताताथैय्या जब पैसे वाले छेड़ेंगे तान पहले सारे थे खिलाड़ी और एक था कप्तान अब तेरी एक तेरी दो और तेरी चार करोड़ होगी पहचानइस वर्ग की सभी रचनाएं
 जीतने के लिए लड़ो
 
उनके जैसा बनो लेकिन मतलब विकास से नहीं जीतने के लिए लड़ो फिर गिरें हज़ारों लाश ही सही वो दूसरों के थे हमारे नहीं, ऐसा हमने कहा था कभी? मगर आज सब गुलो-गुलज़ार है वो हैं साथ में तभीइस वर्ग की सभी रचनाएं
 कैसा अड़ंगा लगाया
 
उन्हें तो न मिलना था न हीं मिल पाया पर खुश हैं बहुत उनके में कैसा अड़ंगा लगाया मगर दिखाने को, निभाने को रसम थोडा मुंह बनाया काहे नहीं मिला हमारे उनको समझ में न आयाइस वर्ग की सभी रचनाएं
 मदिरालय का क्या होगा
 
अगर एक दिन गंगा उल्टी बह निकली तो फिर हिमालय का क्या होगा इतने खून के प्यासे हो गए हम तो मदिरालय का क्या होगाइस वर्ग की सभी रचनाएं
कुल रचनायें: 5 | प्रदर्शित: 1 - 5




























