वफादारी का मीठा फल
घाटे पानी सब भरे औघट भरे न कोय। औघट घाट कबीर का भरे सो निर्मल होय।।
हमने तुम्हें कितने अचंभे दिखाए और कैसी कैसी उलटबासियां सुनायी। लेकिन यह कांग्रेस तो गजब की पार्टी है साधो। इसे तो जितना देखो और जैसा देखो गजब ही गजब दिखाई देता है। यह देश की सबसे पुरानी पार्टी है। भारत में अगर लोकतंत्र है तो इसका दावा है कि इसके कारण है। इंदिरा गांधी ने भले ही इमरजेंसी लगा कर लोकतंत्र को इक्कीस महीने निलंबित रखा हो। लेकिन सन सतहत्तर के आम चुनाव तो उन्होंने करवाए और उनमें वो भले ही खुद हार गई हों चुनाव को अनिवार्य मानना तो उनके स्वभाव में था ही। पर मज़ा देखो साधो, इस पार्टी में अगर कोई सबसे बड़ी कसौटी है तो वह वफादारी की है। वफादारी विचारधारा से नहीं, लोकतांत्रिक विमर्श से नहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से नहीं। वफादारी पार्टी की सर्वोच्च नेता के प्रति। इस वफादारी के सामने और सारे गुण, अवगुण नाकुछ हैं। अगर कोई सर्वोच्च नेता का वफादार है तो वह मोक्ष का अधिकारी है। सबसे बड़ी और पुरानी लोकतांत्रिक पार्टी में सबसे बड़ी कसौटी नेता की वफादारी है। है ना अचंभा।कांग्रेस में समाजवाद की जितनी बातें इंदिरा गांधी ने कही उतनी न तो उनके पहले के किसी नेता ने कही थीं न ही बाद का कोई नेता कहता है। फिर भी वफादारी की सामंतवादी खूंटी वही गाड़ कर गई।
अब तुम्हें भी आधुनिकता और समाजवाद की हवा लगी हुई है साधो। इसीलिए तो कहते हो कि नेता के प्रति वफादारी सामंतवाद की सबसे बड़ी पहचान और अनिवार्यता है। लोकतंत्र के खुले मिजाज से उसका कोई मेल नहीं है। लोकतंत्र में तो जो विवेक और विचार की कसौटी पर खरा उतरे वही सर्वोच्च है और वही सर्वमान्य है। विचार और विवेक को छोड़कर जो नेता का ही वफादार हो उसे तो दरबार में ही मनसबदार की जगह मिलनी चाहिए। साधो, जिस जमात में तुम हो वह तो चलता फिरता लोकतंत्र है। तुम तो इस दास कबीर को भी एक सुट्टे में निपटा कर चलते बन सकते हो। लेकिन ज़रा उनकी सोचो जिन्हें राज चलाना है। तुम तो नंगे हो तुम्हारा क्या तो नहाना और क्या निचोड़ना। राज चलाने वाले को लवाजमा चाहिए। जिसका जितना बड़ा राज उतना ही बड़ा लवाजमा होता है। इस लवाजमें में हज़ारों रक्षक होते हैं। कौन रक्षक कब मार देगा इसका कोई ठिकाना नहीं। इसलिए वफादारी एकदम जरूरी है। राज राजा का हो या लोकतंत्र का। होता तो वह राज ही है।
लेकिन देखो साधो, जिस इंदिरा गांधी ने कांग्रेस में वफादारी को सबसे बड़ी कसौटी बनाया उसे उसी के घर में उसी के अंगरक्षकों ने मार दिया। कांग्रेस में समाजवाद की जितनी बातें इंदिरा गांधी ने कही उतनी न तो उनके पहले के किसी नेता ने कही थीं न ही बाद का कोई नेता कहता है। फिर भी वफादारी की सामंतवादी खूंटी वही गाड़ कर गई। और अब सोनिया गांधी के राज में भी उस खूंटी को कोई हिला नहीं सकता। बल्कि वह पहले से और मजबूत हो गई है। इंदिरा गांधी के वक्त कोई वफादार प्रधानमंत्री नहीं बना था। मनमोहन सिंह को वफादारी ने परम पद दिलवा दिया। नहीं तो उनकी क्या वकत है? पोटे की तरह गिरें तो मुट्ठी भर धूल भी नहीं उठाएंगे। पर देखो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री हो गए। और भी वफादार थे। सब टापते रह गए। वफादारी के अलावा जिसके पास कोई गुण-अवगुण न हो वही सबसे सफल वफादार होता है।
तुम समझ रहे होगे साधो कि हम अर्जुन सिंह की गत पर गंभीर हो गएं हैं। नहीं साधो, वे तो रीवां महाराज के छोटे मोटे सामंत के बेटे हैं इसे कौन नहीं जानता। लेकिन तुम्हारे मनमोहन सिंह तो गरीब किसान के बेटे हैं और विलायत में पढ़े हैं और विलायती मिजाज के खुले बाज़ार के आदमी हैं। आधुनिक नव उदार अर्थशास्त्र के महापंडित हैं। लेकिन कौन नहीं जानता कि वफादार नहीं होते और सोनिया गांधी की मेहरबानी नहीं होती तो कुछ नहीं हो सकते थे। यह भी देखो साधो कि सोनिया गांधी के लिए नरसिंह राव से कट मरे अर्जुन सिंह को तो बार-बार प्रमाण पत्र दिखाना पड़ता है। लेकिन तब जो नरसिंह राव का हुकुम बजाकर वित्तमंत्री थे वही मनमोहन सिंह अब प्रधानमंत्री हैं। है न अजूबा !
प्रभाष जोशी
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कुल टिप्पणियां: 1
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प्रेषक : Bhuwan JoshiUnfortunately congress sirf chaplooson ki parti ban kar rah gayi hai.. Aur ab to had bhi paar ho gayi.. However, I guess most of Indians have great respect for Dr. Man Mohan Singh. Let us hope that BJP would form next government and Adavani wound be our PM. We all want to see PM as a mass leader like Vajpayee or Indira ji.. A person like Adavni should be next PM now. Atleast last BJP government had taken major steps for Highway project, Nuclear test, formation three new states.. Present congress government seems to be useless.






















