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महिला आरक्षण का मूल
कौन समर्थक, कौन विरोधी, बात जाओ ये भूल. पूरा पढें... |
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   दिल्ली मयखाना हो गई है
ये तहलका-फुलका कोना रोज़मर्रा की पत्रकारिता से इतर तहलकाइयों की कोमल-कठोर, छुपी-उघड़ी हर तरह की भावनाओं को ज़ुबान देने का प्रयास है... |
इस गली से उस गली
इस सड़क से उस सड़क
बस जाम केवल जाम
ऐसा लगता है कि दिल्ली
मयखाना हो गई है...
संजय दुबे
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कुल टिप्पणियां: 2
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प्रेषक : menkaaapne is maikhane mein kitni shamein rangeen ki hai ?
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प्रेषक : Nehapadkar maza aa gaya.























