कैसे मानें वो हैं हमारे?
जब बात चले हमारी, वो सोएं पांव पसारे.
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   अमेरिका में इंडिया शाइनिंग?

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मानव संसाधन मंत्रालय में राज्य मंत्री डी पुरंदेश्वरी इन दिनों काफी खुश हैं। तमाम मुसीबतों, हद दर्जे के अक्षम सहयोगियों के बीच भी उनका प्रदर्शन पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है। भला हो उनके अथक अभियान का, आज नासा के 36 प्रतिशत वैज्ञानिक भारतीय हैं. इसी तरह से अमेरिका के 38 फीसदी डॉक्टर भी हिंदुस्तानी हैं। ये आंकड़े उन्होंने राज्य सभा के सामने पेश किए जैसा कि आधार टाइम्स ऑफ इंडिया में 11 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया था। दिल थाम के बैठें या लेट कर पढ़ रहे हों तो लेटें क्योंकि ऐसी खुशनुमा ख़बरें अभी और भी हैं। मसलन माइक्रोसॉफ्ट के 34, आईबीएम के 28, इंटेल के 17 और ज़ेरोक्स के 13 फीसदी कर्मचारी भारतीय हैं। दुर्भाग्य से मैं वरिष्ठजनों की इस सभा(राज्यसभा) में मौजूद नहीं था इसलिए मुझे ये नहीं पता चला कि उनकी इस पर प्रतिक्रिया कैसी रही। मेरा अनुमान है कि कुछ ने मुठ्ठियां भींची होंगी, कुछ ने तालियां बजाई होंगी और ज्यादातर ने ऊंघते-ऊंघते सर हिला कर खुशी जताई होगी। अंतत: नासा अपना हुआ। 

अमेरिका में रहने वाले भारतीय अपने बारे में भारतीय मीडिया में आने वाली इस तरह की ख़बरों के प्रति अभ्यस्त हो चुके हैं और वो इसे हल्के-फुल्के मज़ाक के तौर पर लेते हैं। भारतीय समाचार पत्रों के जरिए हमें जानकारी मिलती रहती है कि हमने सिलिकॉन वैली पर कब्जा कर लिया है, और अमेरिकी फुरसत के दौरान ज्यादातर समय इस चिंता में गुजारते हैं कि किस तरह से भारतीयों ने उनके देश पर कब्जा कर रखा है। हम इसका खंडन करने की भी ज़रूरत नहीं समझते और कभी कभी तो अमेरिका में भारत के प्रति धारणा और इस धारणा के बारे में भारत में जो धारणा है उस खाई को और चौड़ा करने का ही काम करते हैं। 

मुझे झटका सा लगा। क्या मेरी सोच और निगाह भोंथरी हो गई है जो मैं, शोध विज्ञानी के तौर पर इतने साल नासा में गुजारने के बाद भी इतने सारे भारतीयों को नहीं पहचान सका 

चूंकि ये आंकड़े "सरकारी सर्वेक्षण" की उपज थे  और एक मंत्री की तरफ से पेश किए गए थे, लिहाजा मुझे झटका सा लगा। क्या मेरी सोच और निगाह भोंथरी हो गई है जो मैं, शोध विज्ञानी के तौर पर इतने साल नासा में गुजारने के बाद भी इतने सारे भारतीयों को नहीं पहचान सका- दस में से चारजिनसे आते जाते में ज़रूर कहीं न कहीं टकराता ही होऊंगा? क्या मैं गुप्ता, वेंकट, सिंह और श्रीनिवासनों के झुंडों को देख कर पहचान नहीं सका था? 

ज़ाहिर था कि अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप मंत्री महोदया ने नासा के सभी केंद्रों से आंकड़े इकट्ठा किए ही होंगे। ऐसे में मैंने वहां जाने का फैसला किया जहां से सरकारी सर्वेक्षणों के उलट बिना पैसा किए ऐसी जानकारियां मिल सकती थीं--http://nasapeople.gov/workforce/default.htm. यहां जब मैंने  डेमोग्राफिक इंफॉर्मेशन लिंक पर जाकर क्लिक किया तो नासा में काम करने वाले लोगों की पूरी सूची सामने मौजूद थी। अमेरिकी संस्थानों में "भारतीय" के लिए कोई अलग से श्रेणी नहीं होती है। सामान्यत: श्रेणियां, गोरे, काले, हिस्पैनिक और एशियन(पूर्वी एशिया से आने वाले), मूल अमेरिकी, पैसिफिक आइलैंडर्स और अन्य के नाम से मिलती हैं। भारतीय आम तौर पर 'अन्य' वाले बॉक्स में निशान लगाते हैं। कुछ संस्थान दक्षिण एशियन या ईस्ट-इंडियन श्रेणियां भी रखते हैं लेकिन ऐसे बहुत कम हैं। ज़्यादातर उन सॉफ्टवेयर कंपनियों में भी ऐसा नहीं होता जहां वास्तव में 36 फीसदी इंजीनियर भारतीय हों।

अन्य की जगह नासा "अनस्पेसीफाइड" श्रेणी का इस्तेमाल करता है। लिहाजा मैंने नासा के सभी केंद्रों की विज्ञान एवं इंजीनियरिंग श्रेणी सिलेक्ट करके सर्च किया। मगर अनस्पेसीफाइड कर्मचारियों की संख्या यहां शून्य निकली। इसका मतलब शायद ये है कि भारतीय खुद को एशियन या फिर पैसिफिक आईलैंडर्स की श्रेणी में रखते होंगे। 

नासा के कुल 11,157 कर्चारियों में इनकी गिनती है 886, जिनमें 34 बहुजातीय कर्मचारी भी शामिल हैं--डी पुरंदेश्वरी ने निश्चित तौर पर उन लोगों को भी अपने दावे में शामिल किया होगा जिनका एक ही अभिभावक भारतीय हो। इस तरह से ऐसे नासा के वैज्ञानिकों में से ऐसों की संख्या 8 फीसदी के करीब हो जाती है जिनमें से कई भारतीय हो सकते हैं। अगर आप अपनी खोज को थोड़ा सीमित कर केवल पीएचडी धारी कर्मचारियों पर ही नज़र डालें तो ये संख्या 1,919 में से कुल 293 बैठती है। जो कि करीब 15 फीसदी है। 

निश्चित रूप से ये आंकड़े असली तस्वीर पेश नहीं करते हैं। नासा के ज्यादातर कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर होते हैं, जैसे कि मैं था। इन्हें यहां का कर्मचारी नहीं माना जाता। बहरहाल इन सभी को भी अगर शामिल करके भारतीय कर्मचारियों का कोई बहुत ही उदार अनुमान लगाया जाय तो भी ये आंकड़ा कुल कर्मचारियों के 3 से 6 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होगा। इनमें से बहुत से भारतीय निश्चित रूप से अमेरिकी नागरिक भी होंगे। लेकिन डी पुरंदेश्वरी इतनी गहराई में जाने की ज़हमत ही नहीं उठातीं। 

नासा में भारतीयों की एकदम सही संख्या का कोई आंकड़ा उपलब्ध ही नहीं है सिवा उस भारतीय सरकारी सर्वेक्षण के जो शायद कैलीफोर्निया के उस थियेटर के बाहर खड़ा हो के पूरा किया गया होगा जहां "जोधा अकबर" चल रही है. हर आने जाने वाले से पूछा गया होगा कि क्या आप नासा में वैज्ञानिक हैं?

अब आप पूछ सकते हैं कि डी पुरंदेश्वरी ने एक बेमतलब के आंकड़े के पीछे अपनी दुर्गति क्यों करवायी। इसका जवाब उनके सर्वे में दिए गए शानदार आंकड़ों की तुलना में निराश करने वाला है। वो भारत में उच्च शिक्षा पर होने वाले व्यय को उचित ठहराने के लिए नासा के पूर्व भारतीयों को भी आंकड़ों में शामिल कर रही थीं।

सुजीत सरफ

सरफ नासा में कुछ सालों तक शोध विज्ञानी के रूप में काम कर चुके हैं.

अपनी राय दें comment कुल टिप्पणियां: 1

  • प्रेषक : abhinav kumar
    मुझे तो अचानक उस उक्ति की याद हो आई जो मजाकिया ही सही उस मानसिकता की याद दिला जाती है - "सौ में पचास बेईमान , हमारा भारत महान । "