किताबें
कुल रचनायें: 5 | प्रदर्शित: 1 - 5
 ‘लोकतंत्र का चमत्कार’
 
‘लोकतंत्र का चमत्कार’ यही वो शब्द हैं जो तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने तब कहे थे जब मायावती पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं. किसी राज्य की कमान संभालने वाली इस पहली दलित महिला ने पिछले ...
 एक नगरवधू की आत्मकथा
 
कभी-कभार कुछ घटनाएं एक सुखद आश्चर्य की तरह घटती हैं...रोजाना की आपाधापी में कुछ ऐसा हो जाता है जो क्षण भर ठहरने का मौका देता है। इस बार यह घटना एक किताब के रूप में आई और सच कहूं, अंग्रेजी ...
 एक कार्यकर्ता की सार्वजनिक डायरी
 
राजेंद्र रवि एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। गाहे-बगाहे उन्हें लेखक भी कहा जा सकता है और उनकी पहचान सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों में असंसदीय गलियारे में नारे लगाने वाले हजारों आम चेहरों में एक के रूप में भी की जा सकती है। आम ...
 “मैं ऑफिस में रोया करती थी”
 
तीन बार बिहार की मुख्यमंत्री रह चुकीं राबड़ी देवी ने जब जुलाई 1997 में पहली बार सत्ता संभाली थी तो शुरुआत में कई दिन उन्होंने ऑफिस में रोते हुए बिताए थे. एक कम पढ़ी-लिखी सीधी-साधी गृहिणी के लिए रसोई के ...
 दो भाइयों का आपसी चारा
 
काशीनाथ सिंह के नए-पुराने संस्मरणों का एक संकलन आया है घर का जोगी जोगड़ा। राजकमल प्रकाशन से छपी इस पुस्तक में सबसे अद्भुत बात यह है कि पुस्तक के कवर पर नामवर सिंह की तस्वीर प्रकाशित है। पुस्तक खोलने पर ...
कुल रचनायें: 5 | प्रदर्शित: 1 - 5



























