आपको ये लेख कैसा लगा?
   सबसे बड़े लड़ैया
एक आईपीएल मैच के दौरान श्रीसंत को थप्पड़ मारने वाले हरभजन सिंह पर पांच वनडे मैचों का प्रतिबंध लग गया है. अपनी आक्रामकता की वजह से सुर्खियों का विषय बनना हरभजन के लिए नई बात नहीं है. मगर उनकी ये आक्रामकता भी नई नहीं है, बता रही हैं तुषा मित्तल.
जालंधर में स्पिनर हरभजन सिंह के घर में प्रवेश करते हुए आपको कई चीजें दिखाई देती हैं--एक पुरानी सिलाई मशीन, एक वंदे मातरम पेंटिग, लाहौर के गुरुद्वारा दुआ साहिब की तस्वीर और गाल पर तिरंगा बनाए हुए भज्जी की फोटो. थोड़ा और ध्यान से देखने पर मेज पर पड़ा हुआ अखबार दिखता है जिसका एक पन्ना खुला हुआ है और उस पर खबर लगी है: ‘हरभजन पर फैसला आज’. फिर नजर आती हैं भज्जी की मां जो टकटकी बांधे और माथे पर चिंता की लकीरें लिए एक समाचार चैनल देख रही हैं.
अपने 10 साल के करिअर में भारत के बेहतरीन ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है. हाल ही में एक मैच के दौरान श्रीसंत को थप्पड़ मारने और फिर औपचारिक रूप से उन्हें अपना ‘छोटा भाई’ बताकर माफी मांगने के बाद हरभजन ने अपनी मां अवतार कौर को फोन किया और कहा, “तीर कमान से निकल गया है, अब मैं क्या कर सकता हूं, दुबारा नहीं करुंगा.” मगर जैसे ही आप भज्जी के कमरे में घुसते हैं तो आपको कहीं से भी उस आक्रामकता का आभास नहीं होता जो उनके व्यक्तित्व के साथ आज जुड़ी नजर आती है.
हरभजन की मां असमंजस में हैं. उन्हें कभी ये नहीं लगा कि उनका बेटा इतना भी आक्रामक हो सकता है. हालांकि वो कहती हैं, “बचपन में वो बहुत जिद्दी था. वो पांच बहनों में अकेला भाई था. अगर डाइनिंग टेबल पर बहनों ने उसके लिए सीट नहीं छोड़ी तो वो उनसे बहुत लड़ता था. वो अपने सारे खिलौने तोड़ देता था और फिर हमें नए खिलौने लाने पड़ते थे.”
मगर जैसे ही आप भज्जी के कमरे में घुसते हैं तो आपको कहीं से भी उस आक्रामकता का आभास नहीं होता जो उनके व्यक्तित्व के साथ आज जुड़ी नजर आती है. यहां आपको नजर आते हैं दिल के आकार वाले नर्म खिलौने, आई लव यू लिखे टैडी बेयर्स, मोमबत्तियां, बचपन के फोटो और द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज की कुछ डीवीडीज़ जो भज्जी का पसंदीदा कार्यक्रम है.
करीबी दोस्त बताते हैं कि भज्जी दूसरों की नकल उतारने में माहिर हैं. वो याद करते हैं कि किस तरह जब स्थितियां तनावपूर्ण होती थीं तो भज्जी टीम का उत्साह बढ़ाते थे. मगर साथ ही वो ये भी कहते हैं कि भज्जी में प्रतिस्पर्द्धा की जबर्दस्त भावना है. जालंधर क्रिकेट एसोसिएशन के मुखिया सुरजित राय बिट्टा एक हालिया घटना को याद करते हैं जब वो हरभजन के साथ एक कार में बैठे थे, “हम रोवर में थे और अचानक एक इंडिका तेज रफ्तार से हमसे आगे निकल गई. इससे हरभजन को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने भी पूरी रफ्तार से गाड़ी भगाना शुरू कर दिया. बड़ी मुश्किल से मैंने उन्हें शांत किया.” बिट्टा एक दूसरा वाकया भी याद करते हैं जब भज्जी चेन्नई में आयोजित एक प्रशिक्षण कैंप में थे. जब कोच ने उनसे सख्ती से कहा कि उन्हें डाइट चार्ट का पालन करना है तो उन्होंने उस चार्ट के टुकड़े-टुकड़े कर दिए. हैरानी की बात नहीं है कि उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.
मगर कुछ लोग ये भी कहते हैं कि हरभजन हमेशा से इतने उग्र नहीं थे. पार्वती जैन स्कूल के खेल इंचार्ज रवि शर्मा बताते हैं, “स्कूल टीम में दूसरे लोग आक्रामक थे मगर हरभजन कमजोर और शर्मीला था.” एक इंटरस्कूल मैच के दौरान जब किसी ने कहा कि वो लेट में आने के कारण नहीं खेल सकता तो हरभजन का जवाब था, “अगर आप नहीं सोचते कि मुझे खेलना चाहिए तो ठीक है. मैं चला जाता हूं.”
मगर बाद में क्रिकेट की दुनिया में हरभजन ने जो मुकाम छुए उनसे कईयों को हैरानी हुई. ये स्वाभाविक भी था क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में तिकड़ी बनाने वाला ये पहला भारतीय अपनी स्कूल टीम के बेहतर खिलाड़ियों की गिनती में भी नहीं आता था. शर्मा कहते हैं, “दूसरे खिलाड़ी कहीं ज्यादा बेहतर थे मगर हरभजन की इच्छाशक्ति ज्यादा मजबूत थी.”
बिट्टा भी उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने हरभजन का कायाकल्प होते देखा है. एक कोच ने बिट्टा से एक बार उनके बारे में ये टिप्पणी की थी, “ये बहुत दुबला है, इसमें कोई जान नहीं है.” इसके बाद बिट्टा ने हरभजन के पिता से कहा कि वो अपने बेटे की खुराक पर ध्यान दें. इसके बाद राजमा-चावल, आलू के परांठे और मलाई भज्जी के नाश्ते की अनिवार्य चीजें हो गईं.
बिट्टा ये भी याद करते हैं कि हाईस्कूल की परीक्षा के दौरान जब भज्जी का राष्ट्रीय टीम में चयन हो गया तो वो बहुत घबराए हुए थे. ये घबराहट प्रदर्शन को लेकर नहीं बल्कि हवाई जहाज में उड़ने को लेकर थी. उन्होंने इससे पहले कभी हवाई जहाज से सफर नहीं किया था. बिट्टा कहते हैं, “वो अकेले जाने में बहुत डर रहे थे इसलिए मैं भी उनके साथ गया.”
हरभजन के दोस्त उनसे जुडा़ एक बेहद मजेदार किस्सा बयान करते हैं. ये उन दिनों की बात है जब हरभजन राष्ट्रीय टीम में आए ही थे. उन्हें कार चलाना सीखे ज्यादा वक्त नहीं हुआ था और वो लुधियाना-जालंधर हाईवे पर अपनी मारुति 800 दौड़ा रहे थे. अमरिंदर सिंह भी उनके साथ थे. कई बार हॉर्न देने पर भी एक बस ड्राइवर ने उन्हें साइड नहीं दी. काफी देर बाद आखिरकार हरभजन बस से आगे निकलने में कामयाब हो गए. ओवरटेक करते हुए उन्होंने जीत की खुशी में अपनी मुट्ठी बस ड्राइवर की तरफ लहराई. दुर्भाग्य से थोड़ा ही आगे टोल टैक्स बैरियर था जहां सभी गाड़ियों को रुकना पड़ रहा था. भज्जी और उनका हारा हुआ प्रतिद्वंदी अब फिर से साथ-साथ थे. हट्टा-कट्टा बस ड्राइवर नीचे उतरा और उसने भज्जी की गर्दन पकड़कर पूछा, “अब बताओ क्या कर रहे थे.” भज्जी तपाक से बोले, “पाजी मैं तो बस अपनी घड़ी एडजस्ट कर रहा था.”























