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   फिर चित्रपट पर चित्रांगदा

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तीन साल पहले जब फिल्म हजारों ख्वाहिशें ऐसी प्रदर्शित हुई थी तो फिल्म के साथ-साथ इसकी अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह की भी काफी तारीफ हुई थी. हजारों ख्वाहिशें... में गीता राव का किरदार लोगों को इतना पसंद आया था कि चित्रांगदा को अगली स्मिता पाटिल कहा जाने लगा था. पहली फिल्म से ही इतनी संभावनाएं जगाने वाली एक अभिनेत्री के लिए ये वास्तव में बड़ी बात थी क्योंकि कुछेक विज्ञापनों और गुलजार के एक म्यूजिक एलबम सनसेट प्वॉइंट को छोड़ दें तो उन्हें अभिनय का कोई अनुभव नहीं था. जैसा कि हजारों ख्वाहिशें...के निर्देशक सुधीर मिश्रा कहते हैं, उनसे बात करने से पहले मेरे दिमाग में ये बात थी कि मैं किसी बाल कलाकार से बात करने वाला हूं और बात खत्म होने के बाद मैं उनसे ऐसा व्यवहार कर रहा था जैसे वो नसीरुद्दीन शाह हों. 

तारीफों का सिलसिला जारी रहा और कुछ महीने बाद उनकी अगली फिल्म कल: यस्टरडे एंड टुमॉरो रिलीज होने की तैयारी में थी. इसके ट्रेलर टीवी चैनलों पर धमाल मचा ही रहे थे कि खबर फैली कि चित्रांगदा फिल्मों से संन्यास ले रही हैं. कल... के प्रीमियर के दौरान उनकी गैरमौजूदगी से इस खबर को बल मिला. देशभर में उनके प्रशंसक निराश हो गए. चित्रांगदा कि इस असमय विदाई पर कई तरह की चर्चाएं गर्म रहीं. कहा गया कि उनके पति एक राजसी परिवार से हैं और उनके परिवार को चित्रांगदा का फिल्मों में काम करना पसंद नहीं. कुछ ने ये भी कहा कि उनके गोल्फर पति उन्हें यातनाएं दे रहे हैं.

जब उन्होंने फिल्मों से संन्यास लेने का फैसला किया तो विशाल भारद्वाज और आशुतोष गोवारीकर ने उनके लिए स्क्रिप्ट तैयार करने की पेशकश की थी, चित्रांगदा कहती हैं, “आपको पता है मुझे ये तब पता चला जब मैं बॉलीवुड छोड़ चुकी थी. 

निराश प्रशंसक चित्रांगदा को फिल्मों में वापस देखना चाहते थे. मुंबई के जुहू में एक बिलबोर्ड लगाया गया जो ऊपरी तौर से तो कल का प्रचार करने के लिए था मगर असल में इसमें चित्रांगदा की विदाई पर दुख जताया गया था. इसमें उनके प्रशंसकों ने उनके लिए संदेश लिखे थे. फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर ने लिखा था, अगर वो वापस आती हैं तो मैं उन्हें अपनी फिल्म में भूमिका दूंगा.”  कल... बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी और धीरे-धीरे चित्रांगदा गुमनामी की उसी धुंध में गायब हो गईं जहां से वो आईं थी. 

फिर दिसबंर 2007 आया और खुसफुसाहट शुरू हुई कि चित्रांगदा वापसी कर रही हैं. अचानक ही उनके पास फिल्मों का ढेर था. मगर पति का क्या हुआ?  कहा गया कि चूंकि उन्होंने अपने परिवार को एक उत्तराधिकारी दे दिया था इसलिए अब परिवार को उनके फिल्मों में काम करने पर कोई एतराज नहीं था.

चित्रांगदा गुड़गांव की एक पॉश बहुमंजिला इमारत में रहती हैं. वो अभी-अभी मॉरीशस से वापस लौटी हैं जहां वो अपनी नई फिल्म सॉरी भाई के लिए शूटिंग कर रही थीं. इस फिल्म का निर्देशन ओनिर ने किया है जो इससे पहले 'माई ब्रदर निखिल` तथा 'बस एक पल` बना चुके हैं. वापसी के बारे में पूछने पर वो कहती हैं, मेरे पास अपने विकल्पों को तोलने के लिए काफी खाली वक्त था. मैं फिर से अभिनय के बारे में सोच ही रही थी कि लोगों के फोन आने शुरू हो गये. ओनिर दिल्ली आए हुए थे. मैंने उनकी स्क्रिप्ट पढ़ी और एक घंटे के भीतर ही फिल्म साइन कर ली.

चित्रांगदा पहले ही ये साफ कर चुकी हैं कि उनकी वापसी की वजह उनका बेटा जोरावर नहीं है. वो कहती हैं, बॉलीवुड में जब आप अपने फैसले लेते हैं तो सैकड़ों लोग आपको ये बताने के लिए मौजूद होते हैं कि आप गलत थे. मुझे ये बात बिल्कुल नहीं भाई. मुझे इस बात से कभी कोई फर्क नहीं पड़ा कि फिल्म का हीरो या डायरेक्टर कितना बड़ा है. मैं अपनी पसंद की भूमिकाएं करना चाहती थी. तब मुझे पता नहीं था कि आप इतने ईमानदार नहीं हो सकते. आप सीधे-सीधे ये नहीं कह सकते कि ये भूमिका अच्छी नहीं है.

वो आगे जोड़ती हैं, उस समय मैं जिन लोगों के साथ काम कर रही थी, मसलन कल...से जुड़े लोगों के साथ मेरे विचार नहीं मिल रहे थे. फिर जब मैंने फिल्म की पब्लिसिटी में हिस्सा नहीं लिया तो लोगों ने पति द्वारा टॉर्चर वाली बात कहनी शुरू कर दी. मैंने अपना बोरिया-बिस्तर बांधने का फैसला किया. मुझे लगा कि अगर मैं इस बारे में कुछ बोलूंगी तो कोई न कोई उस पर भी कुछ बोलेगा और मामला बढ़ता ही चला जाएगा. अचानक ही मुझे महसूस हुआ कि लोग बॉलीवुड के बारे में अगर ये कहते हैं, कि यहां लोग स्वार्थी हैं और अपने मतलब के लिए आपका इस्तेमाल करते हैं, तो वो ठीक ही कहते हैं.

हमारे याद दिलाने पर कि, जब उन्होंने फिल्मों से संन्यास लेने का फैसला किया तो विशाल भारद्वाज और आशुतोष गोवारीकर ने उनके लिए स्क्रिप्ट तैयार करने की पेशकश की थी, चित्रांगदा कहती हैं, आपको पता है मुझे ये तब पता चला जब मैं बॉलीवुड छोड़ चुकी थी. मुझे अंदाजा नहीं था कि मैं इतनी महत्वपूर्ण बन चुकी थी. जब मैंने उस बिलबोर्ड को देखा तो मुझे महसूस हुआ कि ये कितना बड़ा फैसला था. शायद तब मैं जरूरत से ज्यादा ही भावुक हो गई थी मगर उस वक्त मैं दिमागी सुकून चाहती थी.

इस दंपत्ति के संबंधों के बारे में जो कुछ भी उड़ता रहा है चित्रांगदा की बातें कहीं से भी उसकी कोई झलक नहीं देतीं. वो कहती हैं, “हमारी दोस्ती तब शुरू हुई जब मैं दिल्ली के लेडी इरविन कालेज में थी. उनका परिवार मेरा स्थानीय संरक्षक था. 

चित्रांगदा अपने पति और देश के चोटी के गोल्फर ज्योति रंधावा को तब से जानती हैं जब वो 14 साल की थीं. उनकी तरह रंधावा भी सैन्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं और वो चित्रांगदा के बड़े भाई दिग्विजय के दोस्त हैं. इस दंपत्ति के संबंधों के बारे में जो कुछ भी उड़ता रहा है चित्रांगदा की बातें कहीं से भी उसकी कोई झलक नहीं देतीं. वो कहती हैं, हमारी दोस्ती तब शुरू हुई जब मैं दिल्ली के लेडी इरविन कालेज में थी. उनका परिवार मेरा स्थानीय संरक्षक था. हजारों ख्वाहिशें...के लिए जब मैं ऑडिशन देने जा रही थी तो उस समय तक मेरी शादी हो चुकी थी. फिर मैंने कल में काम किया. अब फिर से मैं वापसी कर रही हूं. मैं साफ कर देना चाहती हूं कि ज्योति का मेरे फैसले से कोई लेना-देना नहीं है.

चित्रागंदा बताती हैं कि वो सप्ताहांत में ज्योति के साथ मछली पकड़ने और निशानेबाजी का आनंद लेती हैं. वो कहती हैं, खेल आपको मजबूती सिखाता है. मैदान में उतरकर आप खुद को परखते हैं. चित्रांगदा ये भी स्वीकार करती हैं कि बॉलीवुड का ग्लैमर आपको इसका आदी बना देता है और आप इसमें बने रहने की कोशिश करते रहते हैं.

अब एक बार फिर से निर्देशक चित्रांगदा के पीछे भाग रहे हैं. सॉरी भाई के निर्देशक ओनिर कहते हैं, मैंने हजारों ख्वाहिशें...देखी और महसूस किया कि वो बहुत शानदार अभिनेत्री हैं. जब हम अपनी फिल्म के लिए नामों पर विचार कर रहे थे तो उनका नाम भी हमारे दिमाग में था हालांकि तब तक हमें ये पता नहीं था कि वो वापस आ रही हैं.

सुधीर मिश्रा कहते हैं, हजारों ख्वाहिशें...उन सभी गीताओं को समर्पित है जिन्हें मैं जानता हूं. स्क्रीन टेस्ट के दौरान चित्रांगदा को देखते ही मैं जान गया था कि वो ही इस भूमिका के लिए सही रहेंगी. वैसे स्क्रीन टेस्ट तो बहुत ही खराब रहा था." वो आगे जोड़ते हैं, "मुझे नहीं लगता कि उसे अपनी क्षमताओं के बारे में पूरी तरह से पता है. उनकी भावनाओं का दायरा अविश्वसनीय है. आप जितना चाहें वो उतनी दूर तक जा सकती हैं. ये एक निर्देशक के लिए चुनौती बन जाता है. मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा. अक्टूबर में मिश्रा देवदास के अपने फिल्मी संस्करण की शूटिंग शुरू करेंगे. चित्रांगदा इसमें चंद्रमुखी का किरदार निभा रही हैं. मिश्रा कहते हैं,  जब उन्होंने बॉलीवुड छोड़ा था तो मैं भी ये सोच रहा था कि काश वो ऐसा नहीं करतीं.

चित्रांगदा थोड़े ही समय तक बॉलीवुड से दूर रही हैं. मगर इस दौरान ही फिल्म उद्योग में काफी ऐसे बदलाव आ गए हैं जिनके चलते चित्रांगदा का होना अवश्यंभावी हो गया है. अगर वो नहीं होती तो बॉलीवुड उनके जैसे किसी को खोज रहा होता. 

निशा सूजन

अपनी राय दें comment कुल टिप्पणियां: 1

  • प्रेषक : rajnesh reporter
    main inke bare mein janana chahata tha thanks for your news.reporter kaa salaam