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   'अभी आरक्षण में आरक्षण क्यों नहीं है?'
महिला आरक्षण पर मिहिर श्रीवास्तव से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री रेणुका चौधरी का कहना था कि ऊंचे स्तर के जन प्रतिनिधि पंचायत स्तर के जन प्रतिनिधियों से ज़्यादा लैंगिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं...बातचीत के अंश...
महिला आरक्षण बिल से ज्यादा बड़ी चुनौती तो इसे संसद में पेश करना हो गया था?
वो सत्ता में हिस्सेदारी नहीं करना चाहते। वो पुरुषों के इस घिसे-पिटे विशेषाधिकार को जारी रहने देना चाहते हैं जो अब तक उन्होंने बड़े जतन से अपने पास रखा था। पर मैं भयभीत नहीं हूं और ना ही मुझे कोई आश्चर्य ही है। हमें ऐसा होने(राज्यसभा में बिल पेश करने के दौरान हुआ हंगामा) की पूरी उम्मीद थी। महिलाओं के साथ ऐसा ही होता है। उनका असल मकसद ही यही है। दरअसल पुरुष खुद को डरा हुआ महसूस कर रहे हैं।
तो इन रूढ़िवादी पुरुषों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
ये हमारा संवैधानिक अधिकार है और हम इसी की मांग कर रहे हैं।
क्या पुरुष सांसद इस बात से भयभीत हैं कि उन्हें अपनी सीटें महिलाओं के हाथ गंवानी पडेंगी या फिर बेहतर प्रदर्शन में वे उनसे बाज़ी मार ले जाएंगी?
रूढ़िवादियों को बदलना होगा। योजना और विकास में महिलाओं का नज़रिया भी शामिल होगा।
जहां तक महिला आरक्षण का सवाल है, क्या इस सरकार के पास जरूरी इच्छाशक्ति है?
हम उस अवस्था तक पहुंच चुके हैं जहां महिलाओं का मत भी कुछ मायने रखता है। ये अब एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान रखता है। हर स्तर पर इसे लेकर समझ बढ़ रही हैं, स्त्रीकरण हो रहा है। पुरुषों को समझ नहीं आ रहा कि इससे कैसे निपटें। इसलिए हम असल में पुरुषों को शिक्षित करने की प्रक्रिया में हैं।
तीन यादव बिल के वर्तमान स्वरूप के खिलाफ हैं। वो पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की मांग कर रहे हैं।
मैं थोड़ी दुविधा में हूं। हमने समाज के तमाम तबकों को आरक्षण दिया तो फिर उनमें महिलाओं के लिए आरक्षण क्यों नहीं है? किसने उन्हें महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने से रोका है?
क्या आप ये कहना चाहती हैं कि महिलाओं के आरक्षण के भीतर यदि जातिगत आरक्षण होना चाहिए तो फिर जातियों को दिए गए आरक्षण में महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए था?
बिल्कुल, आपको उनसे पूछना चाहिए। सरकार रहे या न रहे, महिलाओं की आवाज़ औऱ ऊंची होगी। और फिर हर कोई इसका फायदा उठाना चाहेगा। महिलाओं के वोट की अहमियत आज बढ़ गई है। होशियार लोग इसका श्रेय लेने की कोशिश करेंगे। जो भी इसका विरोध करेगा हम उसका मुकाबला करेंगे। मुझे नहीं लगता कि वे पचास फीसद आबादी के खिलाफ जाएंगे।
लोगों ने लंबे समय से बिल को लटकाए रखा है। उनमें से कुछ आपकी सरकार में भी शामिल हैं। संसद में बिल पेश करने से पहले आपने उन लोगों से संबंधित मुद्दों पर बातचीत क्यों नहीं की?
इसे पेश करने का मतलब ही ये है कि इसके दरवाज़े बहस के लिए खोल दिए गए हैं। इसीलिए उनके विरोध से मैं हैरत में हूं।
181 पुरुष सासंदों को अपनी सीटें गंवानी पड़ेंगी। क्या इस वजह से वो इसे पटरी से उतारने पर आमादा हैं?
ये तो हैरत की बात है। परिसीमन में एक पुरुष को अपनी सीट दूसरे पुरुष के हाथों गंवानी पड़ेगी। इस पर उन्हें आपत्ति नहीं है। तब मैंने किसी को इस तरह से प्रतिक्रिया करते, दौरे पड़ते या फिर आग निकालते नहीं देखा। पुरुषों ने तो पंचायत और ज़िला परिषद के स्तर पर भी महिलाओं के हाथ अपनी सीटें गंवाई हैं। लिहाजा इस समय सबसे बड़ा सवाल है- क्या शहरी जन प्रतिनिधि अपने ग्रामीण, निचले स्तर के समकक्षों के मुकाबले ज्यादा लैंगिक रूढ़िवाद से ग्रस्त हैं? ये सुनकर मुझे कुछ हद तक आश्वस्ति होती है कि ग्रामीण इलाकों के पुरुष महिलाओं को ले जाकर और उन्हें टिकट देने की वकालत करते हैं।
सरकार लोकसभा में सीटें बढ़ाने की सोच रही है ताकि पुरुषों को अपनी सीटों से हाथ न धोना पड़े।
इस बिल को पेश करने का मकसद ही ऐसी बहस को जन्म देना है। ये उनकी असुरक्षा, भय और कमियों को अभिव्यक्त करने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए ही तो है।
बिल को पेश करके जिस बेतुके तरीके से संसद का सत्र खत्म कर दिया गया, आपको नहीं लगता कि सरकार बहस को दरकिनार कर रही है?
इस सत्र के बारे में मुझे नहीं पता। लेकिन मानसून सत्र आने ही वाला है तब इस पर बहस कर ली जाएगी। मगर कोई इसे रोक नहीं सकता।
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कुल टिप्पणियां: 1
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प्रेषक : raomrxMdm is rightly said women must get reservation but which women? why only reservation in parliament? who is caring the child education in govt, school? Dominant women in politica shall prefer their own families member like going on in every parties. Sonia gandhi prefered his son and daughter not Varun gandhi,Karunanidhi want his own son, Advani his daughter,Sharad Pawar wants his daughter,every politician families involve in families matter and they are raising the petty issse just to fullfill their long dream. why they don,t raise the women voice in those matter where women get earn daily 50-55 rupee per day. why they don,t say she must get 200 rupee per day. Playing game on the name of the women's reservation.
























