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   "केंद्र इस बोझ को सह सकता है"
छठवें वेतन आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा के मुताबिक केंद्र के खजाने में अतिरिक्त वित्तीय बोझ झेलने की सामर्थ्य है। शांतनू गुहा रे से बातचीत में जस्टिस श्रीकृष्णा ने नई वेतन संतुस्तियों की और कई परतें खोली।
वेतन में इजाफा करके ऐसा लगता है कि सरकार, लोगों को निजी क्षेत्र से विमुख करके सरकारी नौकरियों की तरफ खींचने की कोशिश में है।
हां ये सही है। वेतन का स्तर काफी नीचे होने की वजह से लोग सरकारी क्षेत्र छोड़ कर निजी क्षेत्र की तरफ रुख कर लेते हैं। ये संभव नहीं है कि दोनों क्षेत्रों को पूरी तरह से बराबर कर दिया जाय लेकिन हमारी कोशिश है कि इस खाई को जहां तक हो सके पाट दिया जाय। इसका लक्ष्य विशेषकर युवा और पढ़ा-लिखा वर्ग है- उदाहरण के तौर पर शीर्ष स्तर के प्रबंधक, परमाणु विज्ञानी आदि। वे हमेशा बाहर चले जाते हैं और हमें उन्हें बाजार के हिसाब से सुविधाएं देनी होंगी।
वो कौन से अहम बिंदु थे जिन पर आपकी नज़र थी?
हमने बढ़ोत्तरी का एक बड़ा हिस्सा निचले स्तर के कर्मियों को देने की सिफारिश की है। इसमें उन लोगों के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं जो आम लोगों से सीधे जुड़े होते हैं- जैसे पुलिसवाले, फॉरेस्ट गार्ड आदि। पूर्व की 34 वेतन श्रेणियों को घटा के हमने इसे चार वर्गों में सीमित कर दिया है। हर वर्ग का उचित पे स्केल निर्धारित किया गया है। सैन्य सेवा में मिलने वाला अनुदान उन लोगों को भी मिलेगा जो विभिन्न सुरक्षा बलों में हैं।
आप सुरक्षा विभाग को इतना महत्वपूर्ण क्षेत्र क्यों मानते हैं?
होता ये था कि सुरक्षा कर्मियों को भी नागरिक सेवा के कर्मचारियों के साथ जोड़ दिया जाता था। एक आम शिकायत थी कि फील्ड में काम करने वाले दफ्तरकर्मियों के मुकाबले ज्यादा कठिनाइयों का सामना करते हैं। विदेशों में भी जैसे इंग्लैंड में सैन्य कर्मियों को मिलने वाला वेतन एक्स-फैक्टर पे कहलाता है।
सुरक्षाकर्मी ज्यादा मुसीबतों का सामना करते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक सैनिक हिमालय की चोटी पर बैठकर साल के सात से आठ महीने सीमाओं की रखवाली करता रहता है। उसे थोड़े से राशन में गुजारा करना पड़ता है। अब इसकी तुलना एक नागरिक कर्मचारी से करें जो दिल्ली के वातानुकूलित कार्यालय में कलम चलाता है। निश्चित रूप से वेतन को लेकर कुछ मायनों में उनकी जरूरतें अलग हैं। लिहाजा हमने अलग अलग स्तर के लोगों को अलग अलग वेतन पैकेज के जरिए संतुष्ट करने की कोशिश की है।
निदेशक स्तर के अधिकारियों को न्यूनतम वेतन वृद्धि क्यों मिली?
वेतन में बढ़ोत्तरी सबके लिए समान नहीं होगी। औसतन इसकी मात्रा करीब 28 फीसदी होगी। अगर आप इसकी तुलना पिछले वेतन आयोग से करें तो ये 40 फीसदी होगी लेकिन 12 फीसदी पहले ही 2004 में शामिल कर ली गई थी। तो प्रभावी रूप से ये करीब 28 फीसदी आएगा। अलग अलग मामलों में ये कम या ज्यादा हो सकता है।
क्या महिला कर्मचारी खुश हैं?
हमने मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाकर 180 दिन कर दी है। और साथ ही जब महिलाओं को अपने बच्चे की देखभाल करनी हो या फिर उनके बच्चों की परीक्षा हो, उस दौरान उनके काम करने के घंटों में छूट देने की सिफारिश भी की है।
न्यूनतम और अधिकतम वेतन अनुपात (1:12) की आलोचना पर क्या कहेंगे? ये दरार साल दर साल बढ़ती दिखाई दे रही है।
क्या अनुपात बाइबिल में दिया गया है? मुझे तो ये पूरी तरह उचित लगता है, लेकिन इसे 1:10 तक कम किया जा सकता है।
वेतनवृद्धि के कारण राजकोष पर 30,621 करोड़ रूपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, इसमें पहले साल पड़ने वाला 12,500 करोड़ रूपया भी शामिल है।
अगर संतुस्तियों को ईमानदारी से लागू किया गया तो पहले साल 12,500 करोड़ रूपए में से 4,500 करोड़ रूपए बच जाएंगे। तो कुल बोझ करीब 7,500 करोड़ के करीब होगा। हमने सभी पहलुओं की समीक्षा की है, इसमें पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। कर राजस्व में बढ़ोत्तरी के चलते इस जरूरत को पूरा कर लिया जाएगा। न्यूनतम कर वसूली भी निर्धारित लक्ष्य से बहुत ज्यादा आएगी। हमने राज्यों का वित्तीय विश्लेषण भी किया है। दो राज्यों को छोड़कर सभी राज्य काफी आरामदेह हालत में थे। सभी अपने लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।
उड़ीसा और बिहार जैसे गरीब राज्यों का क्या होगा? उनके ऊपर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ेगा।
पैसा देने का दायित्व राज्यों का नहीं है। ये सिफारिशें सिर्फ केंद्रीय कर्मियों के लिए हैं राज्य के लिए नहीं हैं?
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कुल टिप्पणियां: 2
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प्रेषक : Abhishekthe thought seems to be good, I would have failed to understand the reason for this pay hike had i not have read this article. there definitely was a need to make the salaries of security forces and polic etc more competent
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प्रेषक : Ramgopal jatReally its great for centre govt. employees, if its emplemented our countries developments and human development rate will be increased Thanks to all whos related to prepare this comissions repaort.
























