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   कि पैसा बोलता है...

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क्रिकेट का लीगकरण यानी काम करने की कॉरपोरेट शैली, ऊंची तनख्वाहें, और खेल के मैदान पर नाटकीय घटनाएं. मगर यही सब कुछ नहीं है. कॉरपोरेट शैली में खराब प्रदर्शन का मतलब है तुरंत सजा मिलना. पहली इंडियन प्रीमियर लीग के बीच में ही एक टीम के बॉस पर गाज गिरने से इसकी शुरुआत भी हो चुकी है. ये टीम है शराब व्यवसायी विजय माल्या की रॉयल चैलेंजर जिसके सीओओ चारू शर्मा थे. हालांकि पहले कहा गया था कि शर्मा ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है मगर बाद में उन्होंने खुद ही ये साफ कर दिया कि उन्हें निकाला गया है. सात मैचों में से पांच गंवा चुकी रायल चैलेंजर्स अंक तालिका में सबसे नीचे है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि गाज कोच वेंकटेश प्रसाद पर भी गिर सकती है. निकाले जाने से कुछ घंटे पहले ही शर्मा ने अपने समकक्ष कोलकाता नाइट राइडर्स के जॉय भट्टाचार्य को फोन कर पूछा था कि क्या उन पर भी शाहरुख खान या जय मेहता की तरफ से कोई दबाव पड़ रहा है. छह मैचों में से चार गंवा चुकी इस टीम का हाल रॉयल चैलेंजर्स से बस थोड़ा ही बेहतर है. 

शर्मा को बाहर का रास्ता दिखाए जाने से एक दिन पहले ही राजस्थान रॉयल्स के मीडिया मैनेजर अनंत व्यास को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. शेन वॉर्न-गांगुली विवाद को ढंग से संभाल न पाने के कारण टीम के सीईओ फ्रेज़र कैस्टेलिनो और वाइस चेयरमैन रवि कृष्णन ने व्यास को उनके पद से हटा दिया था. विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक वार्न ने इस मुद्दे पर टीम प्रबंधन को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी. इस तरह के हाईवोल्टेज आयोजन में, जहां पल में जीत और पल में हार तय होती हो, दबाव हमेशा रहेगा ही”, कृष्णन कहते हैं.

हालांकि रिलांयस समूह की मुंबई इंडियंस के कप्तान सचिन तेंदुलकर दबाव की बात से इनकार करते हैं. मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए सचिन का कहना था, मुकेश अंबानी की तरफ से करो या मरो जैसा कोई दबाव नहीं है.” 

निकाले जाने से कुछ घंटे पहले ही शर्मा ने अपने समकक्ष कोलकाता नाइट राइडर्स के जॉय भट्टाचार्य को फोन कर पूछा था कि क्या उन पर भी शाहरुख खान या जय मेहता की तरफ से कोई दबाव है. 

मगर भीतरी सूत्र दावा करते हैं कि मुंबई इंडियस के विज्ञापनों में दिखाई जा रही पंचलाइन दुनिया हिला देंगे हम से अंबानी परिवार खुश नहीं है. ये स्वाभाविक ही है क्योंकि टीम अब तक खेले गए सात मैचों में से चार में हार का मुंह देख चुकी है. 

बैंगलोर की टीम को खरीदने के लिए नीलामी में लगभग 11 करोड़ डालर की बोली लगाने वाले माल्या को राजाओं की तरह जिंदगी जीने का शौक है. इस तरह की जिंदगी में हार के लिए कोई जगह नहीं होती. मगर आईपीएल में उनकी टीम को मुंह की खानी पड़ी है. उन्होंने अपनी टीम के लिए महंगे विज्ञापन बनाए, शानदार पार्टियां दी और मैच दिखाने के लिए फिल्मी सितारों को अपने निजी विमान में यात्राएं करवाईं. मगर टीम का प्रदर्शन लचर रहा. पांचवीं हार के बाद माल्या का सब्र टूट गया. मैच के बाद आयोजित किंगफिशर पार्टी में उनकी टीम प्रबंधन को पिलाई गई झाड़ की खूब चर्चा रही. भीतरी सूत्रों का कहना है कि माल्या इसलिए भी नाराज थे क्योंकि शर्मा को उन्होंने टीम चुनने की खुली छूट दी थी और उन्होंने कुछ ज्यादा ही टेस्ट विशेषज्ञों को चुन लिया जिन्हें ट्वेंटी-20 का कुछ खास तजुर्बा नहीं था. कुछ तो ऐसे थे जिन्होंने कभी कोई ट्वेंटी-20 मैच ही नहीं खेला था. 

तो क्या क्रिकेट विशुद्ध व्यापार बनकर रह जाएगा? मुंबई इंडियंस के प्रवक्ता तुषार पनिया कहते हैं, बाउंड्री के भीतर ये क्रिकेट ही रहेगा मगर व्यापार भी खेल का हिस्सा होगा. ये सोचना मूर्खता होगी कि ये व्यापार नहीं है. मगर हम चीजों का घालमेल नहीं करते. सचिन और उनकी टीम के सदस्य मैच खेलेंगे और हम व्यापारिक पहलू संभालेंगे. मगर ये भी सच है कि व्यापार क्रिकेट पर ही निर्भर है इसलिए इन दोनों को इतनी सरलता से कैसे अलग किया जा सकता है. 

उधर, आईपीएल मैच कमिश्नर ललित मोदी मैदान के बाहर की इस उथल-पुथल पर तहलका से कहते हैं, एक सीईओ और मैनेजर का हटाया जाना ही आईपीएल में सब कुछ नहीं है. व्यापार को खेल से अलग करके देखिए और चीज़ें आपको कहीं ज्यादा साफ दिखाई देगी.

वैसे फ्रेंचाइजी मालिक जानते हैं कि टीम, जर्सियों और विज्ञापनों का मालिकाना हक उनके पास है.  फिलहाल जो स्थिति है उसमें टिकटों की बिक्री का बड़ा हिस्सा बोर्ड को जा रहा है. जर्सियों की बिक्री अभी अंधाधुंध नहीं है. इसलिए टीम मालिक विज्ञापनों का इंतजार कर रहे हैं. ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स में फुटबॉल प्रोड्यूसर जॉन डीक्स कहते हैं, अगर यूरोप का मशहूर फुटबाल क्लब आर्सनल लगातार पांच मैच हार जाए तो भी इंचार्ज आर्सेन वेंगर को ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है. ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां पर टीम से जुड़ा एक बिजनेस मॉडल काम करता है जिसके तहत स्टेडियम की सीटों, जर्सियों की बिक्री, प्रसारण अधिकार और विज्ञापनों से कमाई होती है.

आईपीएल टीमों को भी इसी तरह की कमाई की जरूरत है. जब तक ये स्थिति नहीं आती तब तक हो सकता है कि टीम मालिकों का अहं जीतने को ही सब कुछ माने.

शांतनु गुहा रे

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