राजनीति का हम्माम और नंगे हुक्काम
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   थप्पड़ की अनुगूंज

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दोनों के नाम उजड्डई का रिकॉर्ड है। पहले दो देशों के बीच बात होती थी तो 100 करोड़ लोग, धर्म बन चुके इस खेल के भगवानों के पीछे खड़े हो जाते थे। अब क्या होगा? एक पिछले दस साल से खेल रहा है तो दूसरा तीन सालों से इस खेल में देश का प्रतिनिधि है। लेकिन सार्वजनिक मंच तक पर खेल भावना के साथ मर्यादापूर्ण व्यवहार करना इन दोनों ने आज तक नहीं सीखा। बीते सालों में जितनी बार इन दोनों की अनुशासन के नाम पर पेशी हुई और मेहनताना कटा है वैसा किसी और के साथ नहीं हुआ। बहरहाल कभी एक साथ इस हुड़दंग में शामिल रहे दोनों की इस आपसी गुत्थमबाजी से किसी के सामने विकट समस्या पैदा हो गई है। 

खेल की गरिमा, आचरण तो छोड़िये सवाल अब ये है कि आगे दोनों एक साथ कैसे टीम इंडिया में शिरकत करेंगे। पेशे की जरूरतों के मुताबिक चेहरे पर मुस्कान भले ही फैल जाए दिल का कांटा कैसे खत्म होगा। और इस कारनामे ने तो बीसीसीआई के सामने भी दुविधा पैदा कर दी है। कभी इसी खिलाड़ी के सदाचरण की दुहाई देकर बीसीसीआई ने आईसीसी और ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड से पंगा लेने में परहेज नहीं किया। आज उसी खिलाड़ी ने पूरी दुनिया के सामने बीसीसीआई को बगलें झांकने पर मजबूर कर दिया है। अब देश और दुनिया को ये संदेश भी देना है कि हिंदुस्तान में हम ही क्रिकेट की सर्वशक्तिमान संस्था हैं लिहाजा भज्जी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। तथ्यों की जांच का भरोसा दिया जा रहा है। 

सवाल अब ये है कि आगे दोनों एक साथ कैसे टीम इंडिया में शिरकत करेंगे। पेशे की जरूरतों के मुताबिक चेहरे पर मुस्कान भले ही फैल जाए दिल का कांटा कैसे खत्म होगा।  

खैर ये सब तो बीसीसीआई की मजबूरी भी है। आखिर ऑस्ट्रेलिया वाले छूटते ही कह सकते हैं कि हमने तो दो महीने पहले ही कहा था कि हरभजन सही आदमी नहीं है। हमारी शिकायत पर आपने आसमान सिर उठा लिया था। कभी दौरे से वापस आने तो कभी सिडनी से कूच न करने की धमकी दी जा रही थी। अब उसी ने आप ही के एक खिलाड़ी को लप्पड़ मार दिया है। अब क्या कहेंगे आप? लिहाजा भज्जी के खिलाफ कार्रवाई हो या न हो उनके खिलाफ कठोर एक्शन लेने का भरपूर दिखावा तो किया ही जा सकता है। 

पर बीसीसीआई इतने भर से राहत महसूस न करे। आने वाले कुछ दिन उसकी इच्छाशक्ति और असल रूप की अग्निपरीक्षा साबित होने वाले हैं। शोकॉज नोटिस जारी करना अलग बात है लेकिन इस शो कॉज़ की लम्पट परंपरा का युगो-युगों से जो हश्र होता रहा है वो सबका देखा-भाला है। संस्थाएं दिए गए कॉज़ से संतुष्ट होती रही हैं, वैसा ही कुछ इस बार भी हुआ तो बीसीसीआई को अपनी साख पर लगे बट्टे को छुपाना मुश्किल होगा। जिस ठसके से आजतक वो आईसीसी से लेकर दुनिया भर के क्रिकेट संघों को धौंसियाता रहा है वो बार्गेन पॉवर जाती रहेगी। आगे से जब भी वो दुनिया के सामने अपने खिलाड़ी के पीछे खड़ा होने की कोशिश करेगा तब-तब दुनिया उसे इस एक उदाहरण से क्लीन बोल्ड कर देगी। 

इसलिए भी बीसीसीआई को जरूरत है कि वो आने वाले सालों-साल तक क्लीन बोल्ड होने की बजाय हरभजन को स्टंप करे। ये देश के क्रिकेट का सवाल है इसे बेलगाम सांड़ो की लड़ाई में बदलने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। खेल के मैदान में जीतहार, छेड़छाड़ तो होती ही हैं मगर सीमाएं सबको पता रहें तो ही बेहतर होगा। पाकिस्तान का उदाहरण सामने है बेलगाम शोएब को किनारे कर दिया गया है भले ही वो दुनिया के तीव्रतम गेंदबाज़ रहे हों।

अतुल चौरसिया

अपनी राय दें comment कुल टिप्पणियां: 1

  • प्रेषक : ठलुआ
    बहुत सही कही भैया...एक बात और मजेदार रही...ससुरे सोच रहे थे कि दुनिया भर के खिलाड़ियों में मैत्रीभाव पैदा करेंगे..यहां तो उलटे अपने ही शत्रुभाव पर उतर आए