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   शुरुआत में ही फेल पांचवीं पास...?
दर्शकों को अपनी तरफ खींचने के लिए क्या स्टार प्लस और शाहरुख खान के मेल से बेहतर कोई और फॉर्मूला हो सकता है? दुर्भाग्य से इस सवाल का जवाब है हां. बेहतर फॉर्मूला ये है कि किंग खान बने रहें और उनके साथ क्रिकेट का मेल कर दिया जाए. लोकप्रियता के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो ये फॉर्मूला यानी आईपीएल पहले वाले फॉर्मूले यानी ‘क्या आप पांचवीं पास से तेज हैं’ पर भारी पड़ गया है.
बताया जाता है कि शाहरुख ने पांचवीं पास... की लांच तारीख 18 अप्रैल को आगे खिसकाने के लिए स्टार प्लस से व्यक्तिगत अनुरोध किया था ताकि इसका सीधा टकराव प्रतिद्वंदी चैनल सेट मैक्स पर प्रसारित हो रहे आईपीएल से न हो. स्टार इसके लिए सहमत हो गया. फिर 28 अप्रैल को जब शो शुरू हुआ तो एक वेबसाइट के जरिये चैनल ने प्रचार किया कि शो ने ऊंची टीआरपी के साथ लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं. सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने भी इस बात पर हैरानी जताई है कि किंग खान की मौजूदगी भी दर्शकों को शो की तरफ नहीं खींच पा रही है.
मगर एक हफ्ते बाद जब रेटिंग्स आई तो नजारा दूसरा ही था. 28 अप्रैल यानी शुरुआत के दिन पांचवीं पास की टीआरपी 4.6 थी जिसे ठीक-ठाक ही कहा जा सकता है मगर इसके बाद ये लुढ़ककर 2.91 तक जा पहुंची. यहां तक कि स्टार प्लस के ‘पृथ्वीराज चौहान’ और ‘बा, बहू और बेबी’ की रेटिंग्स भी इससे ज्यादा थीं. उधर, आईपीएल हर तरह से हिट था. मीडिया एजेंसी द मीडिया एज की वाइस प्रेसीडेंट दिव्या राधाकृष्णन कहती हैं, “ पांचवीं पास की रेटिंग्स निश्चित रूप से निराशाजनक हैं.” चिंतित स्टार प्लस ने कुछ फौरी उपाय किए हैं मसलन सलेब्रिटीज को शो में लाया जा रहा है और रविवार को तीन कड़ियों का लगातार पुनर्प्रसारण किया जा रहा है.
पांचवीं पास...के प्रति दर्शकों की इस ठंडी प्रतिक्रिया ने प्रतिस्पर्धियों को नंबर एक मनोरंजन चैनल की आलोचना का मौका दे दिया है. यहां तक कि सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने भी इस बात पर हैरानी जताई है कि किंग खान की मौजूदगी भी दर्शकों को शो की तरफ नहीं खींच पा रही है. अपने ब्लॉग पर अमिताभ लिखते हैं, “मैं ये समझ पाने में असमर्थ हूं कि शाहरुख के होने के बावजूद शो में दर्शकों की दिलचस्पी क्यों घट रही है. क्या सवाल-जवाब वाले गेम शोज अपनी चमक खोते जा रहे हैं?”
हैरान होने वालों में बच्चन अकेले नहीं हैं. पांचवीं पास...के प्रायोजक भी हैरान व परेशान हैं और उन्होंने चैनल से इस शो के फॉर्मेट में बदलाव करने को कहा है. अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक प्रायोजकों को लगता है कि शो में कुछ खामियां हैं. दुनिया में दूसरी जगहों पर इस शो में ज्यादा जोर शिक्षा पर रहता है. ये बात अब तक भारतीय संस्करण में नहीं देखी गई है और यहां नाच-गाने और किंग खान की अति हो गई है.
स्टार प्लस ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. मगर एक तिहाई कड़ियों की शूटिंग निपटा चुका और विज्ञापनों के जरिये 140 करोड़ रुपये अपनी जेब में डाल चुका ये चैनल प्रायोजकों और विज्ञापनदाताओं को खुश रखने की भरसक कोशिश कर रहा है. शो के पुनर्प्रसारण के दौरान प्रायोजकों के विज्ञापन नि:शुल्क दिखाए जा रहे हैं. मगर आईपीएल की सफलता से पांचवीं पास... की तुलना है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि दोनों कार्यक्रमों के प्रायोजक भी आपस में प्रतिद्वंदी हैं. मसलन पांचवीं पास...का मुख्य प्रायोजक एयरटेल है तो आईपीएल का वोडाफोन.
यानी अब चुनौती है पांचवीं पास...को फेल होने से बचाने की.
शांतनु गुहा रे























