कैसे मानें वो हैं हमारे?
जब बात चले हमारी, वो सोएं पांव पसारे.
                   पूरा पढें...

संकलन

Mo Tu We Th Fr Sa Su
1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031

  • print प्रिंट करें

   ड्रग, सेक्स, अपराध और गोवा

फॉन्ट आकार Decrease font Enlarge font
image

"गोरी लड़कियां आसानी से हमबिस्तर हो जाती हैं। वो यहां बंधनमुक्त मौज़ मस्ती के लिए आती हैं और मेरे जैसे आदमी उन्हें ये मुहैया करवाते हैं" कहते हैं रॉकी। रॉकी उत्तरी गोवा के मशहूर अंजुना बीच पर बने एक शैक (समंदर किनारे खाने-पीने के लिए बना झोपड़ीनुमा रेस्त्रां) में कैशियर का काम करते हैं। अंजुना गांव के नाम से जाना जाने वाला ये इलाका ड्रग्स, सेक्स और अपराध के लिए कुख्यात है और यहीं चार हफ्ते पहले ब्रिटिश किशोरी स्कारलेट को ड्रग्स देने के बाद उसका बलात्कार और फिर कत्ल कर दिया गया था। 

शैक्स की कतारों के पीछे एक चट्टान पर स्थित है नाइन बार। शनिवार शाम 9 बजे का वक्त है और संगीत की तेज धुनों के बीच तकरीबन 200 लोगों का हुजूम बास्केटबॉल के मैदान जितने आकार की जगह में तेज संगीत की धुनों पर थिरक रहा है। हवा में हशीश की गंध घुली हुई है। कुछ लोग एक पेड़ की आड़ में छिपकर तेज़ी से कोकीन सूंघ रहे हैं तो कुछ एक-दूसरे को नशे की गोलियां पकड़ा रहे हैं। नशे की खुमारी धीरे-धीरे लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है। 

मगर ये वक्त खुमारी का नहीं बल्कि होश में आने का है। 10 बजे के बाद संगीत बंद हो जाएगा और इस बहुरंगी भीड़ को भी तितर-बितर होना पड़ेगा। ऐसा हुआ है 18 फरवरी को बलात्कार के बाद कत्ल कर दी गई 15 वर्षीय किशोरी स्कारलेट की मां फियोना मैकिऑन द्वारा न्याय के लिए दिखाए गए जुझारूपन के चलते। फियोना की हिम्मत के चलते गोवा सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है। दिखावे के लिए ही सही, उसने ड्रग्स के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है और नाइन बार और इसके जैसे दूसरे ठिकानों को तय समयसीमा पर तेज़

यहां नशा और सेक्स पहले की ही तरह अब भी आसानी से उपलब्ध होते हैं। नशे के सौदागर बताते हैं कि इन दोनों चीजों की आपूर्ति कभी बंद नहीं हो सकती क्योंकि गोवा का पर्यटन उद्योग इन्हीं दो चीजों पर टिका है। 
संगीत बंद करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। 

फियोना का आरोप है कि गोवा के गृहमंत्री और पुलिस महानिदेशक वहां के फलते-फूलते ड्रग्स व्यापार और उनकी बेटी के हत्यारों को बचाने की कोशिश कर रहे है। मामला सुर्खियों में आने के बाद से ज्यादातर ड्रग्स ऑपरेटर कुछ समय के लिए सावधान हो गए हैं। गोवा के तटों के किनारे बने सैंकड़ों शैक्स में चार हफ्ते पहले तक जहां संगीत की धुनें और ड्रग्स की मस्ती अमूमन अलसुबह तक चलती थी वहीं स्कारलेट की हत्या के बाद हर कोई नियमों के मुताबिक चलने का दिखावा कर रहा है। नाइन बार अपने यहां किसी भी तरह के अवैध ड्रग या नशीले पदार्थ की बिक्री से इनकार करता है। ये अलग बात है कि बार के अहाते में इसके इस्तेमाल के सबूत अब भी दिख जाते हैं। यहां नशा और सेक्स पहले की ही तरह अब भी उपलब्ध हैं। नशे के सौदागर बताते हैं कि इन दोनों चीजों की आपूर्ति कभी बंद नहीं हो सकती क्योंकि गोवा का पर्यटन उद्योग इन्हीं दो चीजों पर टिका है। 

इस महीने की शुरुआत में इसी अंजुना बीच पर अलग-अलग घटनाओं में दो जापानी पर्यटक डूब गए थे। कहा गया कि ये भी ड्रग्स की अत्यधिक मात्रा या ओवरडोज के शिकार हुए थे। इस साल की शुरुआत से अब तक गोवा में 22 विदेशी पर्यटकों की मौत हो चुकी है। स्कारलेट उन 11 ब्रिटिश नागरिकों में है जिनकी यहां मौत हुई है और पिछले दो सालों में मरने वालों की सूची में ब्रिटिश नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा है। अंजुना के सेंट जोसेफ अस्पताल में ड्रग ओवरडोज़ का इलाज करवाने और सलाह लेने के लिए विदेशी पर्यटक नियमित रूप से आते रहते हैं। अस्पताल के निदेशक डॉ. जवाहरलाल हेनरिक बताते हैं, "इस सीज़न (अक्टूबर के बाद से) में सात बार ऐसा हुआ कि मुझे किसी पर्यटक का इलाज करने के लिए बुलाया गया जिसने नशे की ज्यादा मात्रा ले ली थी और जब मैं वहां पहुंचा तो सिर्फ ये कह पाया कि ये आदमी पहले ही मर चुका है"। हेनरिक आगे जोड़ते हैं, "बहुतायत में उपलब्ध ड्रग्स लोगों को मौत की नींद सुला रही हैं।" डॉ. हेनरिक पिछले साल की एक घटना याद करते हैं, जब इटली के एक हाई प्रोफाइल मरीज ने एक महीने तक उनके यहां इलाज करवाने के बाद अंजुना बीच पर सैर करने की इजाजत मांगी। हेनरिक कहते हैं, "अस्पताल के ठीक बाहर ही उसके द्वारा बिताए दस मिनट के दौरान पांच नशे के सौदागर उससे संपर्क कर चुके थे।

युवा महिला पर्यटक

 
अक्सर नशे की इतनी ज्यादा मात्रा ले लेती हैं कि अपनी सुरक्षा करने की हालत में ही नहीं रह जातीं। ऐसा ही स्कारलेट के मामले में हुआ। ड्रग्स की तरह ही यहां ड्रग्स से जुड़े अपराधों की अफवाहें भी आम हैं। जनवरी में एक यूरोपीय जोड़े की शादी के दौरान समारोह स्थल पर दो स्थानीय युवा जबर्दस्ती घुस गए और मेहमानों को एक्सटेसी मिली पानी की बोतलें देने की कोशिश कर रहे थे। एक जोड़े के मुताबिक वो एक ऐसी स्विस लड़की को जानता है जिसके साथ स्कारलेट की हत्या से एक हफ्ते पहले ही अंजुना बीच पर बलात्कार हुआ था। उसने बिना कोई रिपोर्ट दर्ज कराए ही तुरंत भारत छोड़ने में ही अपनी भलाई समझी। 

पेशे से डॉक्टर नंदिता डिसूजा कहती हैं, "हम गोवा के मध्यवर्ग से बनी अपनी ही दुनिया में सुरक्षित रहते हैं और ऐसा व्यवहार करते हैं कि जैसे ड्रग्स के गंदे धंधे का कोई अस्तित्व ही नहीं है।" गोवा में बच्चों के लिए एक एनजीओ चलाने वाली नंदिता आगे जोड़ती हैं, "पूरी रात चलने वाली शराब और ड्रग्स की संस्कृति गोवा की सबसे बड़ी समस्या है।" 

देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों का दसवां हिस्सा अकेले गोवा में आता है। इनमें सबसे बड़ी संख्या ब्रिटिश लोगों की होती है। इसके अलावा यहां आने वाले स्पेनिश, जर्मन, इज़राइली और रूसी पर्यटकों की तादाद भी लगातार बढ़ रही है। पिछले साल 380,000 विदेशी पर्यटक गोवा आए। उन्मुक्तता की खोज में आने वाले यूरोपियन यात्रियों के लिए गोवा, फ्रेंच रिविएरा और इबित्ज़ा का सस्ता एशियाई विकल्प बन गया है। 

इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि गोवा, खासकर उत्तरी गोवा के 25 किलोमीटर लंबे तटीय किनारे का चेहरा तेजी से बदला है। अब ये दुनिया के दूसरे मशहूर समुद्र तटों की तरह ही नजर आता है। शाम ढलने पर जहां ज़्यादातर गोवावासी अपने घरों में होते हैं वहीं बीच पर नज़र आते है बेशुमार पर्यटक। पहले इनमें अधिकांश विदेशी होते थे मगर अब युवा भारतीयों की संख्या भी बढ़ रही है जिनमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अधिकारी, डॉक्टर और यहां तक कि दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर के छात्र भी शामिल होते हैं। इनमें से ज़्यादातर का मकसद होता है शराब और ड्रग्स की मस्ती के बीच सप्ताहांत गुजारना। इसके अलावा बीच पर युवा गोवावासी भी नजर आते हैं मगर ये वो होते हैं जो पर्यटकों के जरिये पैसा बनाते हैं। खासकर अगर किसी गोरी मेम को वो पसंद आ जाएं तो उनकी चांदी हो जाती है। इसके बाद पूरे सीजन उन्हें अपने खर्च की चिंता नहीं करनी होती।

इस साल की शुरुआत से अब तक गोवा में 22 विदेशी पर्यटकों की मौत हो चुकी है। स्कारलेट उन 11 ब्रिटिश नागरिकों में है जिनकी यहां मौत हुई है और पिछले दो सालों में मरने वालों की सूची में ब्रिटिश नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा है।

एक तरफ पर्यटन बढ़ रहा है तो दूसरी ओर नारियल और चावल की खेती जैसे आजीविका के परंपरागत साधन यहां पर तेजी से लुप्त होते जा रहे हैं। खेती की जमीन बहुत मंहगी दरों पर व्यवसाइयों के हाथों बिक रही है। गोवा के समाचार पत्रों को देखने पर महंगी संपत्तियों के विज्ञापनों की भरमार नजर आती है। टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की एक डिवीज़न टाइम्स बिजनेस प्रॉपर्टीज़ ने इसी हफ्ते दिल्ली में दो दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया जिसमें हाईप्रोफाइल ग्राहकों को महत्वपूर्ण जगहों पर ज़मीनों के प्रस्ताव दिए गए थे। पेशे से कार्डियक सर्जन डॉ. फ्रांसिस्कों कोलाको कहते हैं, "सरकार और प्रॉपर्टी डेवलपर्स हमारे पहाड़ों को काट कर हमारे पारिस्थितिकी तंत्र और संस्कृति को खत्म कर रहे हैं।" 

कुछ समय पहले जब रीजनल प्लान 2011 की आड़ में राज्य सरकार ने सैंकड़ों एकड़ जमीन भूमाफियाओं को बेचने की कोशिश की थी तो स्थानीय लोगों ने इसका तीखा विरोध किया, जिसके बाद इसे रद्द करना पड़ा। मगर कंक्रीट का जंगल बनाए जाने की प्रक्रिया दूसरे कई रूपों में जारी है। धनी गुजरातियों और प्रवासी भारतीयों के लिए सियोलिम गांव के दो किलोमीटर के जंगली इलाके में सैकड़ों फ्लैट बनाए गए हैं। इसके लिए सैकड़ों पेड़ काट डाले गए। इससे यहां रहने वाले बंदरों का प्राकृतिक आवास खत्म हो गया और अब ये बंदर आस-पास की आबादी वाले इलाकों में घुस कर उत्पात मचा रहे हैं। तीन महीने पहले कलांगुटे के पास न्यूटन नाम का एक विशाल डिपार्टमेंटल स्टोर अस्तित्व में आया है। इस जगह पिछले साल तक आम के घने बाग हुआ करते थे।

गोवा एयरपोर्ट के आस पास खड़ी हो रही बहुमंजिला इमारतें मुंबई के उपनगरीय इलाकों का आभास देती हैं। दक्षिणी गोवा के कारमोना गांव के लोग यहां 800 फ्लैटों के निर्माण से काफी गुस्से में है। इस कॉलोनी में गेट बनाकर इसे पूरे गांव से अलग कर दिया गया है। "ये फ्लैट पूरी तरह से मानकों के खिलाफ हैं," कहते हैं गोवा के मशहूर आर्किटेक्ट डीन डिसूजा। वो आगे जोड़ते हैं "इस तरह के निर्माण से स्थानीय संसाधनों पर बोझ बढ़ेगा।" इस तरह के अनियोजित विकास के दुष्परिणाम सामने भी आने लगे हैं। प्रॉपर्टी मालिक अपने सीवेज का निपटारा खुले गड्ढ़ों में कर रहे हैं जिससे यहां का पानी प्रदूषित हो रहा है।

 

पुर्तगालियों के शासन के दौरान बनी व्यवस्था में गोवा की कृषि योग्य ज्यादातर ज़मीन का मालिकाना हक सामुदायिक था। बाद में ऐसी जमीनों पर होने वाली फसलों को बेचने का अधिकार नीलामी के जरिये स्थानीय बोलीदाताओं को दे दिया गया। गोवा के भारत में विलय के बाद भ्रष्ट और लालची अधिकारियों ने जमीन का मालिकाना हक भी इन स्थानीय लोगों के नाम कर दिया जिन्होंने फौरन इस जमीन को प्रॉपर्टी डेवलपर्स को बेचना शुरू कर दिया। अब ज्यादातर गोवावासी चहते हैं कि सरकार बाहरी लोगों के गोवा में ज़मीन खरीदने पर रोक लगा दे चाहे वो भारतीय हों या फिर विदेशी।

मगर ड्रग्स की समस्या गोवा की सभी समस्याओं में सबसे बड़ी है जिसे स्कारलेट की मौत से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अपने शैक में ड्रग्स के सेवन की इजाजत देने वाले एक रेस्टोरेंट मालिक, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और पहचान गुप्त रखने की शर्त पर तीन विदेशी पर्यटकों ने स्वीकार किया कि गोवा में नशीले पदार्थों का लेनदेन और उपयोग पीने के पानी जैसा है। उन्होंने बताया कि हशीश और मारिजुआना हिमाचल प्रदेश की कुल्लू-मनाली घाटी में उगाई जाती है। इसके खेतों पर मालिकाना हक अप्रत्यक्ष रूप से इजराइली नागरिकों का है जो कभी केवल साधारण पर्यटक भर हुआ करते थे. मगर अब हालत ये है कि गोवा के भी ड्रग्स व्यापार के कई हिस्सों पर उनका नियंत्रण है। कोकीन की आपूर्ति कोलंबिया से होती है। कुछ दूसरे नशीले पदार्थ स्वीडन से आयात किए जाते हैं। केटामाइन ऐसा केमिकल है जिसे फियोना ने इंगलैंड में घोड़ों के बंध्याकरण में उपयोग होते हुए देखा था। केटामाइन को कोकीन में मिलाकर यूरोप से भारत में इसकी तस्करी होती है। सबसे बढ़िया किस्म की हेरोइन, जिसके लिए ज्यादातर विदेशी अपने देश में तरसते हैं, यहां के शैक्स में आसानी से उपलब्ध होती है। गोवा के ड्रग व्यापार का कुछ हिस्सा अब रूसियों द्वारा भी नियंत्रित होने लगा है जो अपनी गतिविधियां अंजुना बीच के उत्तर में मोर्जिम नाम की जगह से संचालित करते हैं।

लेकिन एक बात साफ है कि कोई भी अवैध धंधा नेताओं और पुलिस के संरक्षण के बिना नहीं चल सकता। इस धंधे में भी क़दम क़दम पर इनकी हिस्सेदारी है। बीच के किनारे बने शैक्स को आधी रात के बाद बंद हो जाना चाहिए मगर नियमों में एक साधारण सी तब्दीली के बाद एक सीजन(अक्टूबर-मई) के लिए 12,000 रुपये की एकमुश्त रकम चुका कर वो सुबह के पांच बजे तक खुले रह सकते हैं। गोवा में छुट्टियां बिताने आई ब्रिटेन की एक महिला पुलिसकर्मी ने एनडीटीवी के कार्यक्रम वी द पीपुल की रिकॉर्डिंग के दौरान बताया, "मेरे पास शैक मालिकों से पैसा लेते पुलिसकर्मियों की तस्वीरें हैं। " कुछ ही देर बाद ये महिला उस जगह से गायब हो गई। उसके साथियों ने हमें बताया कि उसे अपनी बात पर खेद हो रहा है।

सबसे बढ़िया किस्म की हेरोइन, जिसके लिए ज्यादातर विदेशी अपने देश में तरसते हैं, यहां के शैक्स में आसानी से उपलब्ध होती है। गोवा के ड्रग व्यापार का कुछ हिस्सा अब रूसियों द्वारा भी नियंत्रित होने लगा है जो अपनी गतिविधियां अंजुना बीच के उत्तर में मोर्जिम नाम की जगह से संचालित करते हैं।

गोवा के ऊर्जा मंत्री एलेक्सियो सिकेरा स्वीकारोक्ति में कहते हैं, "ये सच्चाई है, गोवा में ड्रग्स की समस्या गंभीर है। वजह है इसकी रोकथाम में बरती गई लापरवाही। लेकिन अकेले गोवा पर आरोप लगाना ग़लत होगा क्योंकि ये समस्या दुनिया भर के सभी पर्यटन स्थलों की है।" एक पुलिस अधिकारी ने तहलका को बताया कि गोवा का एंटी नारकोटिक्स विभाग ड्रग माफियाओं के खिलाफ इसलिए कोई क़दम नहीं उठा पाता क्योंकि इन्हें नेताओं और पुलिस वालों का संरक्षण प्राप्त है। जब गोवा के गृहमंत्री रवि नाइक मैकिऑन के ऊपर ड्रग सप्लाई करने के आरोप लगाते हैं तो वो एक तरह से अपने राज्य में ड्रग्स के व्यापार की बात को भी स्वीकार करते हैं। हालांकि मैकिऑन इस आरोप को सिरे से नकारती हैं। प्रशासन के ही एक और सूत्र का कहना था कि एंटी नारकोटिक्स सेल में ड्रग सप्लायरों की जो सूची है दरअसल उसका इस्तेमाल सप्लायरों से संरक्षण के बदले धन वसूलने में किया जाता है। मापूसा के पूर्व उप ज़िलाधिकारी को एक बार रेव पार्टी के आयोजकों से धन लेने और उन्हें लाउडस्पीकर चलाने की अनुमति देने के आरोप में निलंबित किया जा चुका है।

ड्रग्स के खिलाफ सरकारी अभियान कभी-कभार चलते तो हैं मगर तभी जब ड्रग्स की खिलाफत कर रहे संगठन आवाज कुछ ज्यादा ही बुलंद करने लगते हैं. इन अभियानों के दौरान कई दिलचस्प घटनाएं भी होती हैं। उदाहरण के लिए एक पार्टी के दौरान छापा मारने पहुंची टीम को उल्टे नशे में धुत्त पर्यटकों ने दौड़ा लिया। संख्या में छोटी छापेमारी टीम अपनी जान बचाने के लिए भागी लेकिन नशेड़ियों ने उनका पीछा कर टीम के सदस्यों को पकड़ लिया और उन्हें घूस की रकम देकर ही माने। लोगों के दबाव में शैक्स और होटलों का बंद होना और मामला ठंडा पड़ते ही फिर से खुल जाना अब आम बात हो चुकी है। अंजुना बीच पर स्थित होटल हिलटॉप में रात भर चलने वाली पार्टियां सड़क के दूसरे छोर पर मौजूद एक मठ के लिए परेशानी का सबब बन गई थीं लिहाजा इसे बंद करने का आदेश दे दिया गया। लेकिन जल्द ही फिर से यहां रेव पार्टियां आयोजित होने लगी। स्कारलेट की हत्या के बाद फिर से इसे बंद कर दिया गया है।

ड्रग्स के खिलाफ लगातार चले अभियानों का असर बस इतना हुआ है कि पहले रेव पार्टियों में जहां हजारों की संख्या में लोग मौजूद होते थे वहीं इनका स्तर अब छोटा हो गया है। जैसा कि एक पुलिस अधिकारी कहते हैं, "अब ये उतनी बड़ी या खुली नहीं होती। अब इनकी सूचना आखिरी वक्त में दी जाती है और मौखिक रूप से ही इसे एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाया जाता है।"

गोवा की इस बदलती तस्वीर से गोवा के लोग निराश हैं। जाने-माने गायक रेमो फर्नांडिस याचना भरे सुर में कहते हैं, भगवान के लिए गोवा को गोवावालों के वास्ते छोड़ दीजिए.

मगर क्या ऐसा हो सकता है? जवाब है कि तब तक तो बिल्कुल नहीं जब तक ड्रग्स और सेक्स का आकर्षण लोगों को गोवा की तरफ खींचता रहेगा। और जब तक ऐसा होता रहेगा तब तक गोवा में अपराध का ग्राफ गिरने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती।

अजित साही

फोटो: शैलेन्द्र पांडेय 

फियोना मैकिऑन : दुखी, पर्ताड़ित लेकिन बेहद निडर

अपनी राय दें comment कुल टिप्पणियां: 6

  • प्रेषक : Mohd imran siddiquii
    नशा नाश की जड़ है।
  • प्रेषक : rakesh
    जो दिख रहा है उससे आगे और भीतर की जानकारी देता है ये लेख...
  • प्रेषक : praveen jakhar
    बेहतरीन लेख है, ऐसी जानकारी आम और खास तक जाए तभी कुछ खुलासे ठीक से हो पाते हैं. ये ख़बर तहलका के मानको पर खरी है. बहुत बहुत बधाई.
  • प्रेषक : Ramgopal jat
    Its really so shameful that we treat so cheaply with those visited here in our country from abroad, Goa is so blamed for it, We should take attention to avoid this spoiled drug culture, Really there is Foreigner also responsible for it, they try to get and injoy all those activities which are prohibited in their country. We should learn them that India is not a country where they can break laws . If we not prevent this they will spoile our culture and people. Ramgopal Jat KASUMBI, LADNUN' RAJASTHAN
  • प्रेषक : संदीप सिंह
    डॉक्टर हेनरिक का बयान, दहलाता है पर साल में गोवा की सैर पर आने वाले सैलानियों का तीन लाख के पार जाता आंकड़ा बताता है कि हालात अभी बदलने वाले नहीं। आजीविका के परंपरागत साधन नष्ट होना या फिर जमीन का मालिकाना हक पाने के बाद प्रापर्टी डेबलपर्स का पनपना, इजराइली और रूसी ड्रग पैडलर्स का बढ़ते जाना और सबकुछ आंखों के सामने होते हुए भी सरकार का आंखे मूंदे रहना। इस मजबूरी की वजह महज पर्यटन से होने वाली कमाई है इससे आगे भी सोचने को मजबूर होना पड़ता है। बेहद इनफार्मेटिव लेख के लिए बधाई सर।