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महिला आरक्षण का मूल
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   दुखी, प्रताड़ित लेकिन बेहद निडर
17 फरवरी की शाम को करीब पौने आठ बजे ब्रितानी नागरिक फियोना मैकिऑन अपनी 15 साल की बेटी स्कारलेट को केरल हाइवे से फोन करती हैं. “हम तुम्हारे भाई को देखने घर जा रहे हैं.” फियोना कहती हैं. “जी”, स्कारलेट जो कि गोवा में हैं खुश हो जाती है. “लव यू मॉम... मैं कल आप से मिलती हूं.” अपने 9 में से 6 बच्चों और एक साथी रॉब के साथ फियोना केरल घूमने जा रही थीं लेकिन इंगलैंड में अपने सबसे बड़े बेटे के एक्सीडेंट की खबर सुनकर उन्हें अचानक लौटना पड़ता है. “मैं सारी रात सो नहीं सकी”, फियोना कहती हैं. “मैं 5 बजे उठकर जाने के लिए तैयार थी.” ठीक उसी वक्त, जब स्कारलेट के साथ बलात्कार कर उसे मरने के लिए गोवा के अंजुना तट पर छोड़ दिया गया था”
10 घंटे बाद फियोना को अपने सेलफोन पर एक संदेश मिलता है. “जितनी जल्दी हो सके कॉल करें. ये बहुत ज़रूरी है ” संदेश गोवा के एक गाइड जूलिया लोबो ने भेजा था जिसके साथ फियोना, स्कारलेट को गोवा में छोड़ कर आई थीं. फियोना ने सोचा कि संदेश स्कारलेट ने ही भेजा है क्योंकि वो अक्सर लोबो के फोन का इस्तेमाल किया करती थी. लेकिन बात करने पर बदहवास लोबो स्कारलेट की मौत के बारे में बताता है. अपने टूटे हुए घर को 15 साल की उम्र में छोड़ने वालीं, 17 साल की उम्र में खुद से छेड़छाड़ करने वाले को चाकू मार कर एक साल जेल में बिताने वालीं और चार पुरुषों से बिना शादी के हुए 9 बच्चों की 44 वर्षीय मां, फियोना अपने जीवन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही हैं.
अपने टूटे हुए घर को 15 साल की उम्र में छोड़ने वालीं, 17 साल की उम्र में खुद से छेड़छाड़ करने वाले को चाकू मार कर एक साल जेल में बिताने वालीं और चार पुरुषों से बिना शादी के हुए 9 बच्चों की 44 वर्षीय मां, फियोना अपने जीवन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही हैं. वे गोवा के गृहमंत्री रवि नाइक और पुलिस पर गोवा के ड्रग माफियाओं को बचाने के लिए अपनी बेटी के कत्ल की जांच में बाधा डालने के आरोप लगा रही हैं. शरीर पर कई टैटू और नंगे पैरों घूमने वालीं फियोना किसी हिप्पी जैसे कपड़े पहनती हैं. अगर उनकी लड़ाई में उन्हें दुनिया भर से सहयोग मिल रहा है तो अपनी 15 वर्ष की नाबालिग बेटी को केवल एक महीने के परिचित गाइड के पास छोड़ने के लिए लोग उनपर लानतें भी भेज रहे है. लेकिन फियोना कहती हैं कि वे लोगों पर विश्वास करना नहीं छोड़ेंगी. वो लोबो का भी बचाव करती हैं जिसने उनके मुताबिक उस काली रात को स्कारलेट को ढ़ूंढ़ने के हरसंभव प्रयास किए थे.
फियोना को ड्रग एडिक्ट और इसका व्यापार करने वाला बताया जा रहा हैं “अगर ऐसा होता तो मेरे पास बहुत पैसा नहीं होता?”, वो पूछती हैं. अफवाहें उड़ाई जा रही हैं कि वो कई बार गोवा आकर स्वीकृत समय से ज़्यादा रुकी हैं. सच ये है कि उन्हें पहली बार यात्रा के लिए सबसे ज़रूरी दस्तावेज़, दस वर्षीय पासपोर्ट, साल 2007 में ही मिला है जिसके तुरंत बाद ही वो, अक्सर गोवा आने वाले अपने साथी, रोब के साथ यहां आईं थीं. “इतने बढ़िया माहौल के साथ अंजुना इतना ![]() |
गोवा प्रवास के दौरान स्कारलेट कीलिंग |
स्कारलेट की खबर सुन कर जब फियोना गोवा लौटीं तो अंजुना के पुलिस अधिकारी नेर्लॉन एल्ब्यूकुर्क--जिन्होंने स्कारलेट की मौत को डूबने से हुई लगने के लिए बड़ी जल्दबाज़ी में उसका पोस्टमॉर्टेम कराया था—ने उन्हें तीन घंटे इंतज़ार कराया. नेर्लॉन ने स्कारलेट से पहले फियोना को दूसरे चार डूब कर मरे लोगों की तस्वीरें दिखाईं और उन्हें स्कारलेट के शरीर को उस दिन देखने ही नहीं दिया. “मैं शुरू से ही मुझसे झूठ बोलने की वजह से भारत की पुलिस से बहुत निराश हूं”, फियोना तहलका को बताती हैं. “मैंने उनपर वैसा ही विश्वास किया था जैसा मैं इंग्लैंड की पुलिस पर करती हूं.”
मुर्दाघर में स्कारलेट की चोटों को देखकर फियोना को तुरंत ही शक हो गया कि दाल में कुछ काला है. इसके साथ ही स्कारलेट के पैर की एक अंगूठी भी गायब थी. लेकिन पुलिस बार-बार इसे डूबने से हुई मौत ही बता रही थी. फियोना का शक तब और भी गहरा गया जब वो अगले दिन अंजुना तट पर ‘लुई’ नाम के शैक के पास घटनास्थल पर पहुंचीं. “ये जगह ठीक तट पर स्थित है और ये विश्वास कर पाना असंभव है कि स्कारलेट वहां डूब सकती थी.”, वो दृढ़ता के साथ कहती हैं. एक प्रत्यक्षदर्शी ने फियोना को बताया कि स्कारलेट के शरीर पर बिकिनी का नीचे वाला हिस्सा था ही नहीं और ऊपर का हिस्सा भी उसके वक्षस्थल से ऊपर की ओर खिसका हुआ था. स्कारलेट ने इर्द-गिर्द का इलाका छान मारा और तब उन्हें बिकिनी का गायब हिस्सा लुई के ठीक पिछले हिस्से में वहां मिला जहां अब बताया जा रहा है कि स्कारलेट के साथ बलात्कार किया गया था. एक प्रत्यक्षदर्शी ने फियोना को बताया कि स्कारलेट के शरीर पर बिकिनी का नीचे वाला हिस्सा था ही नहीं और ऊपर का हिस्सा भी उसकी छाती से ऊपर की ओर खिसका हुआ था. स्कारलेट ने इर्द-गिर्द का इलाका छान मारा और तब उन्हें बिकिनी का गायब हिस्सा लुई के ठीक पिछले हिस्से में वहां मिला...
अब तक फियोना की समझ में आ चुका था कि पुलिस पर भरोसा करना बेकार है. आस-पास पूछने पर उन्हें एक स्थानीय वकील विक्रम वर्मा के बारे में पता चला जिन्होंने उनकी हर संभव सहायता की. उनकी सलाह पर फियोना ने ब्रिटिश प्रेस से संपर्क किया और तब कहीं जाकर स्कारलेट का दुबारा शवपरीक्षण किया गया जिसने उसके साथ हुए रेप और कत्ल की पुष्टि कर दी.
मामले को अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियां मिलने और जनाक्रोश के चलते पुलिस को मजबूरी में लुई के एक पार्टनर सैम्सन डिसूज़ा को स्कारलैट को नशीली दवाएं देने और उसके साथ बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार करना पड़ा. मामले से जुड़े पुलिस अधिकारी नेर्लॉन को भी निलंबित कर दिया गया. “मैंने उस पर इतना भरोसा किया कि उसे स्कारलेट की डायरी तक दे दी.”,फियोना अफसोस भरे स्वर में बताती हैं. मगर पुलिस ने इसके चुने हुए हिस्से एक ब्रितानी टैबलॉइड को दे दिए जिन्होंने मरी हुई किशोरी को ड्रग एडिक्ट की तरह से पेश कर दिया.
पिछले दो सप्ताहों के दौरान फियोना, वर्मा और उनके कुछ और साथी ऐसे योद्धाओं के तौर पर उभरे हैं जिन्होंने व्यवस्ता के साथ लोहा लेने का हौसला दिखाया है. पिछले सप्ताह फियोना ने गोवा के गृहमंत्री नाइक और पुलिस महानिदेशक बीएस ब्रार पर मामले की लीपापोती में शामिल होने का आरोप लगाया है. फियोना ने पूछताछ के लिए बाल मामलों से संबंधित पुलिस के पास पूछताछ के लिए जाने से ठीक पहले दुनिया भर के मीडिया के सामने ये इल्जाम लगाए. नाइक ने स्कारलेट की मौत पर अब तक सहानुभूति का एक शब्द तक नहीं कहा है उल्टे फियोना पर ही ज़हर उगला है. उधर ब्रार ने पत्थरों वाली चुप्पी साध रखी है.
गत सोमवार को फियोना ने इस जघन्य अपराध के एक चश्मदीद गवाह को दुनिया के सामने लाने की एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की—ब्रिटिश पर्यटक माइकल ‘मसाला’ मैनियन ने रात को तीन बजे नशे की हालत में स्कारलेट को लुई में जाते देखा था. मैनियन का दावा है कि एक तीसरा आदमी मुरली--जो कि पास के ही एक शैक कर्लीज़ में काम करता है—सुबह पांच बजे स्कारलेट के साथ बाहर निकला. वो दिवंगत को लोबो के घर छोड़ने की बात कह रहा था. कुछ देर बाद जब मैनियन शैक के पिछवाड़े पहुंचा तो उसने सैम्सन को स्कारलेट के साथ छेड़छाड़ करते पाया.
स्कारलेट की मृत्यु ने एक बार फिर इस सच को रेखांकित किया है कि भारत की बीमारू व्यवस्था किसी लाचार के लिए तब तक नहीं हिलती है जब तक उसे झिंझोड़ने की हिम्मत रखने और हार न मानने वाला कोई फियोना जैसा सामने नहीं आता. दुख की बात ये है कि सिस्टम उसकी मदद करने की बजाय उसे ही ठिकाने लगाने पर लगा हुआ है. नाइक ने पहले ही केन्द्र से फियोना का वीज़ा—जो कि 4 मई तक वैध है--न बढ़ाने की सिफारिश करने तक की धमकी दे डाली है. लेकिन फियोना ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए कमर कस रखी है.
“स्कारलेट एक बहुत ही अच्छी बड़ी बहन और बेहद आकर्षक लड़की थी.”, फियोना अपनी सबसे बड़ी बेटी के बारे में बताती हैं जो अगर इस दुनिया में होती तो आने वाली 17 जून को सोलह साल की सपनीली उम्र में प्रवेश कर गई होती, अपनी मृत्यु के ठीक चार महीने बाद.
अजित साही
























