इन दिनों
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 चर्बी आप बढ़ाएं, खाना हम घटाएं
 
कहना मुश्किल है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने क्या सोचकर दुनिया भर में खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों का ठीकरा भारत और चीन के सिर फोड़ दिया. बुश का कहना था कि जीवनस्तर में बेहतरी के चलते भारत और ...
 कर्नाटक का चुनावी रंगमंच
 
पूरे कर्नाटक का चक्कर लगाने के बाद भी वहां चुनावों की कोई सरगर्मी नज़र नहीं आती। पार्टियों के झंडे, बैनर, पोस्टर और चुनाव सामग्री दूर-दूर तक नहीं दिखती। इस तरह के चुनावी अभियानों पर इस बार चुनाव आयोग ने शिकंजा ...
 अपना-अपना नजरिया
 
न तो नैतिकता का आडंबर और न ही त्रासदी का विलाप. कोलकाता के मशहूर या यूं कहें कि बदनाम लालबत्ती इलाके सोनागाछी के यौनकर्मियों के साथ बिताये कुछ दिनों ने लेखक दिलीप डिसूजा और फोटोग्राफर टॉम पीट्रेसिक का उनके प्रति ...
 पथरीली डगर, पथिक अग्रसर
 
अपने आलोचकों और सलाहकारों की अनदेखी कर वो वहां जा रहे हैं जहां शायद अब कोई नहीं जाता. वो कर रहे हैं जो शायद अब कोई नहीं करता. आम आदमी की तो बात ही क्या बड़े-बड़े राजनीति के धुरंधर भी इससे अचंभित ...
 सलीम बाबा का बाइस्कोप
 
कोलकाता के भीड़भाड़ भरे मार्किस स्क्वैयर की मलिन गलियों से निकल कर, 52 वर्षीय मोहम्मद सलीम अपनी गाड़ी पर प्राचीन प्रोजेक्टर लादे, तमाम और दूसरी गलियों की भूल भुलैया में दर्शकों और बारिश न होने की कामना लिए भटक रहे ...
 जागने से पहले ढल न जाए धूप
 
हिमालय के विशाल ग्लेशियरों से निकलकर पूर्वोत्तर के असम और अरुणाचल प्रदेश की सुदूर वादियों में बहने वाली कई नदियों में से एक है जिया भरोली. कुछ दिनों पहले इसकी धारा में 16 किलोमीटर तक राफ्टिंग के दौरान हमने तरह-तरह ...
 खुद के साथ प्रयोगों की शालाएं
 
अंतरंगता. उग्रता. नई पहचान, अभिनव प्रयोग और न जाने क्या-क्या और है जो लड़कियों के छात्रावासों के भीतर का जीवन दिलचस्प बनाता है। कुछ दिन यहां बिताने के बाद तुषा मित्तल इन्हें खुद के साथ प्रयोगों की अनोखी प्रयोगशालाओं जैसा ...
 नया नेपाल नयी चुनौतियां
 
नेपाल के जनादेश से सभी हैरत में हैं. काठमांडू के पंडित, मुख्य राजनीतिक पार्टियां और यहां तक कि भारत सरकार भी. इन सभी के आकलनों को धता बताते हुए नेपाल की जनता ने संविधान सभा के लिए हुए चुनाव में ...
 आखिर दूर हुई अस्पृश्यता
 
ऐसा विरले ही देखने को मिलता है कि 80 साल की उम्र में कोई नेता शिखर तक के कठिन सफर की एक नई शुरुआत कर रहा हो. मगर लालकृष्ण आडवाणी कोई आम नेता नहीं हैं. कैमरों की चमचमाती फ्लैशलाइटों के ...
 हवा-पानी-जमीन में घुला ज़हर
 
हमारे लोकतंत्र का एक चेहरा ऐसा भी है जो आपको सिर्फ तभी दिख सकता है जब आप 60 साल की एक ऐसी महिला से मिलें जो अपने सूजे हुए घुटनों की पीड़ा के साथ 800 किलोमीटर की यात्रा कर रही ...
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