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   खुरापाती मगज की उपज: सविता भाभी

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image दुनिया भर की वेबसाइटों का लेखा जोखा, उनकी लोकप्रियता का आंकड़ा पेश करने वाली वेबसाइट alexa.com पर इन दिनों एक वेबसाइट की लोकप्रियता का ग्राफ रॉकेट की तरह ऊपर जा रहा है। इंटरनेट के महाजाल पर इसका अवतार महज तीन महीने पुराना है मगर लोकप्रियता के मामले में इसने अच्छी-अच्छी वेबसाइटों को बगलें झांकने पर मजबूर कर दिया है। अमर चित्रकथा, चाचा चौधरी साबू, नागराज, ध्रुव जैसे कॉमिक्स के चरित्रों को अपने बचपन में जिस चाव से बच्चे पढ़ा करते थे उससे कहीं ज्यादा जुनून के साथ जवानों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक आज कॉमिक्स के इस साइबर अवतार को पढ़ रहे हैं। savitabhabhi.com अश्लील साहित्य, भड़कीले कॉमिक चरित्रों और इंटरनेट का अनोखा कॉकटेल है जिसे पर्दे के पीछे देखने और खुद को इस साइट में रजिस्टर कर इसका हिस्सा बनने की जैसे देश और विदेश में एक लहर सी चल पड़ी है। 

इंटरनेट पर फिलहाल मौजूद हेंताई या दूसरी पॉर्न सामग्री की अपेक्षा सविता भाभी पॉर्न का विशुद्ध देसी संस्करण है। कोई देशमुख (इससे ज्यादा जानकारी इन्होंने अपने बारे में नहीं दी है) इसके सर्वेसर्वा, लेखक, संयोजक हैं। मैट और डेक्सटर इनके दो सहयोगी हैं जो सविता भाभी समेत तमाम एनीमेशन और साज-सज्जा का काम देखते हैं। इन्ही तीन लोगों के मगज की उपज है सविता भाभी। साइट के मुखपृष्ठ पर

इस बात को जानते हुए कि दुनिया के इस हिस्से में (दक्षिण एशिया) आज भी इंटरनेट पर सबसे ज्यादा, देखा, बेचा और खरीदा जाने वाला सामान सेक्स है, देशमुख जी अपने उद्देश्यों में काफी हद तक सफल रहे हैं। 
इन्होंने जो संदेश लिखा है उसके मुताबिक सविता भाभी उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रह चुकी हैं। और उनकी काम पिपासा का देशमुखजी को बार-बार अनुभव हुआ है। इसी ने उन्हें सविता भाभी डॉट कॉम निर्मित करने की प्रेरणा दी। जिससे कि वो भाभी के साथ अपने यादगार अनुभवों को दुनिया के साथ बांट सकें और भाभी को एक अलग ही रूप में अमर बना सकें। 

बहरहाल ये तो बात देशमुखजी के श्रीमुख से निकली है लेकिन इसका सीधा साधा मकसद बाज़ार और व्यावसायिक उद्देश्यों से जुड़ा है। और इस बात को जानते हुए कि दुनिया के इस हिस्से में (दक्षिण एशिया) आज भी इंटरनेट पर सबसे ज्यादा, देखा, बेचा और खरीदा जाने वाला सामान सेक्स है, देशमुख जी अपने उद्देश्यों में काफी हद तक सफल रहे हैं। 

पश्चिमी दुनिया के उलट भारतीय समाज में भाभी के साथ हंसी-मजाक, छेड़छाड़ की सदियों पुरानी मान्यता रही है। इस लिहाज से वेबसाइट का नामकरण एक बेहद चतुराई भरा क़दम कहा जा सकता है। विशुद्ध भारतीयों की एक बड़ी जमात से जुड़ने का इससे बढ़िया ज़रिया क्या हो सकता है कि एक ऐसी पॉर्न कॉमिक का निर्माण किया जाए जो भारतीय होते हुए भी हर लिहाज़ से अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हो। मगर दुनिया के दूसरे कई देशों में भी इसकी लोकप्रियता दिन दूनी और रात चौगुनी प्रगति कर रही है क्योंकि हिंदी और पांच दूसरी भारतीय भाषाओं के अलावा ये कामोत्तेजक भाभी, अंग्रेज़ी में भी उपलब्ध है। अगर Alexa के ही आंकड़ो पर विश्वास किया जाए तो savitabhabhi.com जहां हिंदुस्तान की वेब साइटों में 142वें स्थान पर है तो वहीं बांग्लादेश और पाकिस्तान में ये क्रमश: 140 वें और 428 वें स्थान पर है। यहां ये भी उल्लेखनीय है कि ये नेट कॉमिक्स बंगाली और उर्दू में उपलब्ध ही नहीं है और हिंदुस्तान की सबसे लोकप्रिय वेब साइटों में से एक ndtv.com इससे तेरह पायदान पीछे यानी 155वें स्थान पर है। यहां तक कि इंग्लैंड और अमेरिका में भी ये तेज़ी से ऊंचाइयां दर ऊंचाइयां नापती जा रही है। 

savitabhabhi.com की सफलता के पीछे के सामाजिक कारणों पर समाजशास्त्री और 'फेमिली किनशिप एंड मैरिज इन इंडिया' की लेखिका पैट्रीशिया ओबेरॉय कहती हैं, "हिंदुस्तान में देवर-भाभी का रिश्ता हंसी-मज़ाक का होता है। देवर अपनी भाभियों के परंपरागत सहयोगी माने जाते हैं। रिश्ते का ये रूप सांस्कृतिक रूप से मान्यता पा चुका है। भाभी के प्रति इस तरह के रिश्तों का पश्चिम में कोई अस्तित्व ही नहीं है।

ये भी उल्लेखनीय है कि ये नेट कॉमिक्स बंगाली और उर्दू में उपलब्ध ही नहीं है और हिंदुस्तान की सबसे लोकप्रिय वेब साइटों में से एक ndtv.com इससे तेरह पायदान पीछे यानी 155वें स्थान पर है।

भारतीय समाज में इस रिश्ते को सिनेमा जैसे माध्यम भी खूब भुनाते रहे हैं। 90 के दशक के मध्य में आयी सुपर डुपर हिट फिल्म 'हम आपके हैं कौन' का 'दीदी तेरा देवर दीवाना' वाला गाना सालों तक शादी ब्याह के मौकों से लेकर गली-मुहल्लों तक में धमाल मचाता रहा। मगर savitabhabhi के उलट ज़्यादातर फिल्मों में देवर-भाभी के बीच के रिश्तों को मां-बेटे जैसा पवित्र ही दिखाया गया है और प्रकट ऱूप में भारतीय समाज में भी हमेशा इसे इसी तरह का बताया जाता रहा है। मगर देवर-भाभी के बीच इससे अलग तरह के आकर्षण और इस तरह के रिश्तों की सार्वभौमिकता पर प्रकाश डालते हुए कोलकाता के पत्रकार रंजन भट्टाचार्य कहते हैं, "साहित्य जगत में भी इस तरह के रिश्तों के तमाम दृष्टांत मौजूद हैं। गुरुदेव टैगोर का अपनी भाभी कादंबरी के साथ रिश्ता था। टैगोर की शादी होने पर उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।" 

सिनेमा, क्रिकेट, इंटरनेट के प्रभाव वाले इस दौर में अश्लील साहित्य के लिए जगह मुश्किल से ही बचती है। वैसे भी कामसूत्र और कोकशास्त्र की शिक्षाओं को छोड़ दें तो पॉर्न के मामले में जनसाधारण के लिए स्तरीय साहित्य का हमारे देश में हमेशा ही अभाव रहा है। इस तरह के साहित्य के नाम पर रेहड़ी-पटरी पर मिलने वाला लुग्दी लेखन जैसे कि मस्तराम ही एकमात्र विकल्प नज़र आता है। लेकिन इस पर फूहड़, दोयम दर्जे का और निम्नवर्गीय होने का ठप्पा मजबूती से चिपका है। इस लिहाज से सविता भाभी इरोटिका (यौन साहित्य) को मध्य और उच्चवर्ग तक पहुंचा रहा है। अब मस्तराम के यौन साहित्य से जुड़ा निम्न वर्ग वाला कंप्यूटर अशिक्षित तबका तो सविता भाभी को इतना लोकप्रिय नहीं कर सकता। उसकी तो कंप्यूटर तक पहुंच ही नाममात्र की है।

यौन साहित्य के फुटपाथी संस्करण पर नाक-भौं सिकोड़ने वाला तबका सविता भाभी के जरिए इसका भरपूर लुत्फ उठा रहा है और इसकी गवाही देता है तीन महीनों के भीतर इसकी लोकप्रियता में हुआ इजाफा। तीन महीने के छोटे से समय में सविता भाभी के 5000 से ज़्यादा पंजीकृत सदस्य हैं, और इसकी सदस्यता हासिल करने की एक लंबी लाइन है। सविता भाभी की कहानियां सास बहू धारावाहिकों की तर्ज पर धारावाहिक की शक्ल में ही नेट पर उपलब्ध कराई जाती हैं। और इन कहानियों के पात्र भी रंग-ढंग, साज सज्जा तड़क-भड़क के मामले में टीवी सीरियलों के पात्रों से कैसे भी कम नहीं दिखते। एक कहानी महीने भर में खत्म होती है। जिसे हर दिन एक-एक पेज करके आगे बढ़ाया जाता है। बीते महीने का विषय था ब्रा सेल्समैन। फिलहाल आईपीएल और क्रिकेट के जुनून को देखते हुए क्रिकेट की कहानी चल रही है और जून महीने की थीम है 'विजिटिंग कज़िन' जिसे शायद गर्मी की छुट्टियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

इंटरनेट पर कितनी ही अश्लील सामग्री मौजूद है और इसमें एक और का जुड़ना कोई खास मायने नहीं रखना चाहिए मगर इतने कम समय में सविता भाभी का इतना लोकप्रिय होना क्या हम भारतीयों और हमारी दमित इच्छाओं पर एक टिप्पणी नहीं करता? अब तक इस पर विरोधाभासी बातें कही जा सकती थीं क्योंकि मस्तराम या इस तरह की दूसरी सामग्री को लेकर कोई आंकड़े उपलब्ध नहीं थे मगर इंटरनेट पर तो सब कुछ साफ-साफ दिखता है।   

एनेस्टेशिया गुहा के साथ अतुल चौरसिया

अपनी राय दें comment कुल टिप्पणियां: 3

  • प्रेषक : aloksri
    This is one of the best sex site ,why so much noise
  • प्रेषक : samrat arora
    in western world sex comics are very popular concepts i think 90 % teenager reads cheap and vulger magazine rather than that if I have something good then I would prefer this site...
  • प्रेषक : shambhunath
    dekhiye ismein koee buraee nahin hai.ise aap smaj ke sudhar ke taur par hi dekhein.kaam pipasa yadi isi se shant hoti hai toh buraee kya hai