राजनीति का हम्माम और नंगे हुक्काम
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तहलका ने गुजरात नरसंहार की पीछे की सुनियोजित योजना और इसमें राज्य सरकार की भूमिका का पर्दाफाश किया तो तहलका के मकसद पर सवाल उठातीं बौखलाहट भरी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. 26 अक्टूबर को एक संवाददाता सम्मेलन में तहलका संपादक तरुण तेजपाल ने इन आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया.

गुजरात में 2002 में हुए दंगों पर तहलका की तहकीकात जनहित में की गई अच्छी पत्रकारिता का उदाहरण है और इस पर राजनीतिक खेल खेलने की बजाय तुरंत कार्रवाई किए जाने की जरूरत है. अपनी शुरुआत से ही तहलका ने बड़े और अहम खुलासे किए हैं. हर हफ्ते जारी इस अभियान को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराहना मिली है. जब रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ था तो कोई कार्रवाई करने की बजाय स्टिंग ऑपरेशन के टेप्स की प्रामाणिकता पर ही सवालिया निशान खड़े किए गए. लेकिन तीन साल तक एक ब्रिटिश लैब समेत कई जगहों पर हुए परीक्षणों में साबित हुआ कि टेप्स वही दिखा रहे थे जो सच था. इस बार भी ठीक इसी तरह सच पर कोई कार्रवाई करने की बजाय मुद्दे को ही टालने की कोशिश की जा रही है. हमने जनहित में जो काम किया उसे देखने की बजाय तहलका के मकसद पर ही सवाल उठाकर हमारे विरोध में ओछे स्तर की राजनीति की जा रही है. बेहतर होता अगर बीजेपी प्रतिक्रिया में ये कहती कि हम इस तहकीकात पर ध्यान देंगे और अगर इसमें कोई सच्चाई हुई तो कार्रवाई की जाएगी. लेकिन इसके बजाय निम्न स्तर की राजनीति की जा रही है. ये सिर्फ बीजेपी का ही हाल नहीं है. हर पार्टी की प्रतिक्रिया इस पर्दाफाश से हो सकने वाले राजनीतिक लाभ में दिलचस्पी के अलावा और कुछ नहीं दर्शाती.

आरोप लगाया गया कि हम कांग्रेस से मिले हुए हैं. मैं फिर से जोर देकर कहना चाहूंगा कि कांग्रेस हो और या कोई और पार्टी, तहलका ने लगातार निष्पक्षता और निडरता से लिखा –चाहे वो 1984 के दंगे हों या सतीश शर्मा मामला या फिर जेसिका लाल मर्डर केस. कोई भी अगर हमारे काम पर नजर डाले तो ये जान सकता है.

इस पर्दाफाश के समय के बारे में भी आरोप लगाए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस तहकीकात की ‘टाइमिंग’ गुजरात चुनावों पर असर डालने के लिए की गई है. हर पत्रकार जानता है कि हर खबर हमारा कुछ समय चाहती है. हमें ये तहकीकात पूरी करने में छह महीने लगे और जिस हफ्ते ये पूरी हुई हमने दिन-रात एक करके इसे जारी कर दिया. हमारे लिए ये बात कोई मायने नहीं रखती कि गुजरात में कौन जीतता है. यहां मुद्दा एक भयानक अपराध है--एक ऐसा वीभत्स अपराध जिसका पर्दाफाश उन्हीं लोगों की जुबानी हुआ जिन्होंने इसे अंजाम दिया. इस पूरे विषय को इसी नजरिये से देखा जाना चाहिए. हमारा काम संदेशवाहक का है और संदेश पर कार्रवाई के बजाय संदेशवाहक के साथ ही राजनीतिक खेल खेलने का काम बंद होना चाहिए.

आरोप ये भी लग रहे हैं कि तहलका की तहकीकात में गोधरा का कोई जिक्र नहीं है. तहलका मैगजीन पढने वाला कोई भी व्यक्ति  पाएगा कि 30 पन्ने गोधरा को ही समर्पित किए गए हैं. इनमें पर्दाफाश हुआ है कि प्रशासन ने गोधरा को आतंक की सुनियोजित साजिश साबित करने के लिए क्या-क्या किया. जबकि सच्चाई ये थी कि गोधरा में जो भी हुआ वो एक भीड़ की स्वत:स्फूर्त प्रतिक्रिया थी. दो ऐसे अहम लोगों--जिन्होंने बयान दिया था कि उन्होंने भीड़ में शामिल लोगों को 140 लीटर पेट्रोल बेचा था—ने तहलका को बताया कि ये बयान देने के लिए एक जांच अधिकारी द्वारा उन्हें 50,000 रुपये दिए गए थे. खुद को गोधरा का प्रत्यक्षदर्शी बता बयान देने वाले बीजेपी सदस्य कैमरे पर कह रहे थे कि जब गोधरा की घटना हुई तो वे अपने घर में सो रहे थे.

एक पल के लिए मान लेते हैं कि इस देश की हर समस्या के लिए तहलका जिम्मेदार है. पर क्या इससे उसकी अहमियत कम हो जाती है जो लोगों ने अपनी टीवी स्क्रीन पर देखा. हमने लोगों को अपने अपराध स्वीकार करते हुए देखा. ऐसे अपराध जिनमें हत्या, बलात्कार और जिंदा जलाने जैसे जघन्य कृत्य शामिल थे. ऐसे अपराध जिनमें राज्य की मशीनरी ने भी सक्रिय सहयोग दिया. लगभग ढाई हजार लोगों की जानें चली गईं और हजारों दूसरे पीड़ित जिंदगी भर न भूल सकने वाली भयावह यादें लेकर जीने को मजबूर हैं. अगर पत्रकारिता के इस उत्कृष्ट उदाहरण पर ऐसी प्रतिक्रिया आती है तो मुझे बड़ी निराशा होती है. मैं आशा करता हूं कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे का संज्ञान लेगा और शुरुआत गुजरात नरसंहार के मामलों को राज्य से बाहर भेजने से होगी...वहां जहां पीड़ितों के लिए न्याय की कुछ उम्मीद हो क्योंकि गुजरात में तो सरकारी वकील ही न्याय को तार-तार करने पर तुले हैं.  

अपनी राय दें comment कुल टिप्पणियां: 56

  • प्रेषक : babloo
    whaht u did shows u are honestly doing ur job...u respect ur job...just keep it up
  • प्रेषक : GIRI
    Tarunbhai and team after huge victory of modi and bjp please follow public and do not write gabage. Thanks
  • प्रेषक : ABDUL
    Tarunbhai aap prejudice and bias ho. Media people should be neutral.
  • प्रेषक : nirankar singh chauhan from kanpur
    what journalist has seen it comes honestly in front of people. truth is always hard thats way bjp feels her self in trouble. moti is playing with the sentiments of hindu by guiding them on the path of communilism. thanks again to tehelka team to be in wright path of journalism. efforts are honest than no one can easly bow you down. tehelka is mission not service hope this faith will always allive amoungs reader. second thanks for hindi edition
  • प्रेषक : india
    nargis hazaron saal apni be nuri par roti hai badi mushkil se hota hai chaman mein didwar paida...... really u r freedom fighter for modern indian and terrorist and thief for dirty hindutv supporter and idol worshippers.