जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी
"उन्होंने हमारे साथ वनडे खेला है, 60 रन का लक्ष्य दिया है हम 600 बनाएंगे"-राजेंद्र व्यास
व्यास साबरमती एक्सप्रेस में आ रहे कारसेवकों के इंचार्ज और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता हैं.
तहलका- कैसे ऑर्गेनाइज़ किया इतने छोटे टाइम में?
व्यास- मैं गोधरा की जो ट्रेन का इंचार्ज भी मैं था।
तहलका- जी मुझे बताया जयदीपभाई ने...
व्यास- और उस समय मैंने ये भी मैसेज दिया था आज तक वाले मेरे पास आए थे.. तो मैंने बताया देखो हमारा कंधा इतना मजबूत नहीं है... 59 लाशों का भार वहन कर सके... फिर भी दुख के साथ कहना पड़ता है कि हम जिसको साथ लेकर आए थे इधर छोड़ कर जा रहे हैं और दूसरी हमारी मजबूरी भी है कि हमारे पास 300 औरतें हैं वर्ना हम सारे गोधरा को जलाके राख कर सकें इतनी क्षमता रखते हैं...हमने चूड़ियां नहीं पहनी हैं..और दूसरी बात जो अपने को हिंदू कहलाता है वो युवा मित्रों जो हमारे साथ आए हुए हैं वो और देश के किसी भी कोने में बैठा हो सुन ले कि मुसलमानों ने हमारे साथ वन डे खेला है... वनडे से आप परिचित हैं... उसने हमको साठ रन का टारगेट दिया है ये मैच हमको जैसे भी करके जीतनी है...तो 600 रन करो वहां तक रुकना मत... ऐसा करके मैंने बोला था...तो उस समय उसका डीजी दीपक स्वरूप करके पंचमहल का उसने मुझे बताया आप अच्छा नहीं कर रहे हैं...इसका परिणाम अच्छा नहीं आएगा...हमने इतने मुसलमानों को भाषा में बात कर ली थोड़ा गाली भी बोली मैंने मतलब... तो नरेंद्र भाई मोदी अपने मुख्यमंत्री भी थे वो भी हंसने लगे... क्या उसने तो काट दिया... उसकी वजह से मुसलमान के लोग इधर पे.. जो मैं मुस्लिम एरिया में रहता हूं मेरा मकान मुस्लिम एरिया में हैं... ये मकान जो है... दीवार मुसलमान की है... ये मुसलमान की है औऱ सारा ही सारा मुहल्ला मुसलमानों का है... आप आए इतने ही सिर्फ दो फुट का जो दरवाजा है ना वो ही सिर्फ हिंदू रहते हैं...मैं दादागिरी से रहता हूं...
तहलका- मुझे एक चीज बताइए आप ने उस दिन नरेद्रभाई मोदी के साथ में थे गोधरा में जो ट्रेन जली... नरेंद्र भाई मोदी की पहली प्रतिक्रिया क्या थी।
व्यास- एज़ अ मुख्यमंत्री वो ऐसा तो नहीं बोल सकता कि मुसलमान को मार दो.... मेरी बात समझिए आप... वो तो ऐसा तो कह सकते नहीं... मैं जो विश्व हिंदू परिषद का था.. ऐसा बोला... मेरी बात समझिए आप... वो प्रवीनभाई तोगड़िया बोल सकते हैं... वो नहीं बोल सकते है ना... मगर कहने का हमारा मकसद क्या है उसमें... जैसा बोला ना कि आ खड़ा कान कधे आपने (गुजराती कहावत)... मतलब उसने छोटा दौर दे दिया है कि तुम जो करना है करो और मुसलमानों से हम त्रस्त थे. छोटा दौर बोले तो ... इसकी वजह से हुआ.. पुलिस भी अपने साथ थी... मेरी बात समझिए इसलिए मैं बोलता हूं पुलिस भी अपने तरफ थी और सारा हिंदू समाज... भाई वो चौकन्ना रह गया था कि साला ऐसा कैसे हो गया तब जाकर ऐसा हुआ था... मेरी बात समझिए आप ... वर्ना पुलिस उसकी ओर होती..
तहलका- हां हां तब तो ... कांग्रेस की गवर्नमेंट होती तो 2-4 हज़ार हिंदुओं को मार दिया होता...
व्यास- नहीं नहीं कहने का मतलब... तो उल्टा परिणाम आने वाला था... उसकी वजह से नानावती पांच वाले ने मेरे ... तीन दफे मेरे इंटरव्यू... मेरे को बुलाया....जुबानी ली...हां... प्रतिबाधित करना चाहते हैं कि तुम्हारी वजह से ये तूफान हुआ है... क्योंकि मैं उसका इंचार्ज था.. हम तो डरने वाले हैं नहीं जो करना है वो करो...
तहलका- जब गोधरा हुआ उस समय लोगों को कैसे संगठित किया...लोग कैसे संगठित हुए इसके बाद?
व्यास- मेरी बात करो... ये जो मेरे लड़के की वाइफ है.. उसके ऊपर उधर अटैक हुआ था जबर्दस्त... उसके ऊपर एसिड डाला तो सारा का सारा मुंह जल गया.. 15 दिन तो उसको हॉस्पिटलाइज़ किया... वो अपना मकान देखो... वो अभी जाली अंदर रखी है जलाने की कोशिश किया मगर हमने इतना प्रतिकार किया... हमने इसका नौ मकान जला दिया...कितने?
तहलका- नौ
व्यास- और चार का कंपलीटली मर्डर कर दिया... तब जाके वो चुप ... और उसके लिए मेरे वो जो चार्ज फ्रेम हुआ हम निर्दोष... हमने साबित कर दिया पुलिस की गोली... और जब पुलिस की गोली होती है तभी जाकर हम फायरिंग करते हैं।
तहलका- ये तो एक आपका एरिया हो गया..
व्यास- नहीं हम डरते नहीं है इसलिए
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“मुसलमानों को मार के मैं खुद को राणा प्रताप समझ रहा था”-बाबू बजरंगी
बजरंग दल के इस नेता के दिमाग में सिर्फ हत्या और वो भी मुसलमानों की हत्या घूमती है।
बजरंगी- हम लोग... काम ये था कि हमने पटिया कांड में जो किया उसमें हम प्रथम थे और वहां के लोग स्थानिक हम लोग सब साथ में... पटिया हमारे बाजू में ही पड़ता है थोड़ा ही... आधा किलोमीटर दूर है हमारे घर से... तो इनको जो पहला काम हुआ... गोधरा कांड हुआ तो गोधरा कांड में हम गए थे... वहां देखा नही गया हमारे से। दूसरे दिन हमने जवाब दे दिया... उसके बाद
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बजरंगी-गोधरा कांड में तो देखने जैसा... कोई भी आदमी देखे तो ऐसा हो जावे कि अभी का अबी सबको मार डालो या काट डालो... परिस्थिति ऐसी थी
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बजरंगी-हां था न मैं साथ में... तो गोधरा कांड हुआ जो उस दिन देखा फिर तो बस फिर यहां नरोदा में आके हमने उसका प्रतिकार दे दिया...
बजरंगी- छोटे... हम तो रात को ही सब इकट्ठा कर लिए थे... हमारी 29-30 जन की टीम हमने इकट्ठा कर लिया... इनके पास बंदूक है तो पहुंच गए रात को की भाई तुम्हारी बंदूक दो हमको... बोले नहीं देता हूं... कल तुमको गोली मारेंगे भले ही हिंदू हो.... कल नहीं दिया... तो लोगों ने ले जाओं जितने कारतूस हैं बंदूक है ले जाओ... हमने ऐसे करके 23 इकट्ठा किया रिवॉल्वर और फिर ये सब रिवॉल्वर से कोई नहीं मारा फिर... ये क्या हुआ कि डराते धमकाते डराते धमकाते एक बहुत बड़ा गड्ढा था उसमे ये सब जाकर छुप गए तो चारो बाजू से घेर लिया और जो था वो छांट-छूंट के पूरा कर दिया... उस टाइम फिर हमने बोल दिया सात बजे...
तहलका- वहां पटिया में... पटिया कहते हैं न उसको...
बजरंगी- पटिया पटिया...
तहलका- पटिया में... बताइए न पटिया किस तरह का है...
बजरंगी- पटिया एक एसटी... का वर्कशॉप है उसके बाजू में एक दीवाल है उसके बाजू में पटिया है... तो उसको... पटिया के सामने मस्जिद है... उसके साथ में एक गड्ढा़ भी है बहुत बड़ा... तो वहां मैदान में सबको मारा वारा... हमने सात बजो फोन करके गृहमंत्री को बता दिया था और जयदीप भाई को भी बता दिया था कि इतने लोग मारे हैं आप अब संभाल लेना...इनहोंने कुछ भी किया नहीं साम्ला की क्या हुआ... रात को ढाई बजे मेरे नाम का एफआईआर हो गया... और एफआईआर हो के.. हो गया भी देखो वहां था...ऑर्डर भी दे दिया कमिश्नर ने...
तहलका- नरेंद्र जी ने?
बजरंगी- हां ... कमिश्नर ने दे दिया...छारा और हम लोगों ने जा के वहां कांड किया था... उसके बाद हम लोग सब जेल में गए... जेल में जाने के बाद में पब्लिक ने खूब रुपया दिया... हम तो पैसे वाले हैं चिंता नहीं है पर जिसके पास पैसा नहीं है गरीब है उन लोगों को भी विहिप वालों ने ही संभाला तो मैं जेल में से ही कहता था साहब इनके घर संभालों कुछ भी करो कुछ नहीं पांच सात महीना ज्यादा से ज्यादा 4-5-7 महीना किट दिया इन लोगों ने उसके बाद में सब बंद कर दिया
तहलका- वादे किए होंगे... फिर उससे मुकरे कैसे?
बजरंगी- जैसे कि वादे उन्होंने किए कि तुम्हारे केस हम लड़ेंगे... आज दिन तक केस में कुछ लड़ा नहीं...
तहलका- ये प्रवीणभाई ने कहा था?
बजरंगी- प्रवीणभाई ने खुला कहा था न... और उसके बाद प्रवीण बाई ने बोला कि बोला कि आपके घर में कोई तकलीफ हुई नुकसान हुआ... और पैसे भी इकट्ठे करके इन्होंने कहां डाले वो मालुम ही नहीं न ...
बजरंगी- किसी को दिया नहीं पैसा तो... 5-7 महीना किट दिया वही दिया बाकी तो कुछ दिया ही नहीं ना...
तहलका- खाली जयदीप भाई इनसे बात कर रहे थे बस...
बजरंगी- मेरे विश्वहिंदु परिषद जयदीप भाई बात कर रहे थे खाली...
तहलका- जिस दिन मुसलमानों को काटा है...
बजरंगी- और जयदीप भाई से 11-12 मेरी बात हुई... और हमने तबियत से काटा... हल्दीघाटी बना दी थी...और हमको गर्व है ऐसा एक बार दो बार मौका आ जावे और भी तो और मारते, मारते और तो देखते जावे।
तहलका- जयदीप भाई बता दीजिए कहां बैठे थे?
बजरंगी- जयदीप भाई अपने जो धनवंतरी जो... जयदीपभाई हैं न खाली धनवंतरी कार्यालय... धनवंतरी अपना दवाखाना है... जो प्रवीणभाई का दवाखाना है वहां बैठे हुए थे।
तहलका- उस पटिया में प्रवीण भाई का एक दवाखाना है...प्रवीणभाई तोगड़िया
बजरंगी- पटिया नहीं... पटिया से बहुत दूर बापू नगर में... बहुत दूर वहां ये बैठे हुए थे और हमने इनको पूछा भी नहीं था कि ये करने जाने वाले हैं... और हमने नरोदा में... नरोदा और नरोदा पटिया में मीयां की एक दुकान नहीं छोड़ी थी सबको जला दिया था। और इनको सबको जलाया था काटा था....ये काम किया था... जबतक इनको मालुम नहीं था और जब इनको मालुम पड़ा कि इतने कट-वट गए तो ये लोग डरने लग गए थे आधा किलोमीटर का डिस्टेंस हां... नरोदा और नरोदा गांव में... तो दोनों में हमने खूब-खूब... कोई शंका.. कम से कम वहां नहीं काटा होगा साहब नरोदा और नरोदा पटिया में... फिर उन्होंने लाशे उठा उठा कर फेंक दिया, कूआं एक था कूएं में डालकर धरप दिया... पहले तो मैं इनसे बात ही नहीं कर रहा था ये पहली बार मेरे मिले न साहब तो मैं बोला ये कहीं... हमारे यहां बहुत पत्रकार और जैसे तैसे आदमी आते हैं तो मेरे को पूछते हैं आप पटिया कांड में.... बोला मैं पटिया कांड था ही नहीं मैं तो बहुत दूर हॉस्पिटल में दाखिल था...
तहलका- गोवर्धन झड़पिया ने... आप मालूम ही उन्होंने बगावत कर दी है... उस दिन बताइए जिस दिन पटिया कांड हुआ उस दिन गोवर्धन झड़पिया से आपकी बातचीत हुई तो क्या उन्होंने बोला?
बजरंगी- मेरी बातचीत हुई गोवर्धन झड़पिया से.. मैंने बोला साहब ऐसा-ऐसा हो गया है... बोले तुम भाग जाओ गुजरात छोड़ दो... मैं बोला ये क्या हुआ तो बोले तुम भाग जाओ बोले... तुम ये भी मत बोलना कि मेरे से बात हुई है।
तहलका- बताइए न इसे फिर कैसे?
बजरंगी- उनकी ही न थी साब... ये घर में घुसे तो यहां से ही सिलिंडर लिया और मारी धड़प...फूटे... रिवॉल्वर तो थी हमारे पास... उस टाइम तो हमने मजा ही और था साब... और हमारे चार कार्यकर्ता मर गए उसमें... और उनकी भी कोई सुनवाई नहीं है
तहलका- मैं उनके घर हो के आया...
बजरंगी- विश्व हिंदु परिषद के नाम पर प्रवीण तोगड़िया खड़ा रहके बाज़ार में कुछ भी करें साहब दो सौ आदमी उसके साथ में आज लगने वाले नहीं है और चैलेंज के साथ बोलते हैं कि विश्व हिंदु परिषद ने यदि कोई भी कार्यक्रम वहां देना चाहे कुछ भी कार्यक्रम नहीं होवे...
तहलका- इन लोगों.. मस्जिद पर चढ़के सुअर बांधा...
बजरंगी- हमने पूरी टैंकर है ना नरोदा पटिया की टैंकर वो टैंकर भरी हुई थी..... वो जगह पे उसके अंदर धुसेड़ दी थी
तहलका- टैंकर उसका पेट्रोल का था ना?
बजरंगी- डीज़ल... डीज़ल का टैंकर पूरा घुसेड़ दिया फिर आग लगाई थी...
तहलका- मतलब पटिया में उस टैंकर से आग लगाई?
बजरंगी- मस्जिद में...
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"हमने जाफरी को टुकड़े-टुकड़े करके जला दिया"- मदन चवाल
चवाल गुलबर्गा सोसाइटी पर हमला करने वाली भीड़ में शामिल था और उसने मिलकर जाफरी की हत्या की.
मदन- जैसे उस दिन हम थे साथ में... अक्खे दिन साथ मे दौड़े... जाफरी साहब को लाए हम वहीं खड़े थे.... तोड़ा पकड़ा... पीछे से लात मारी उनको... वो काटने वाले...
तहलका- पूरा बताइए...विस्तार से कैसे शुरुआत हुई क्या हुआ?
मदन- ये साढे़ आठ नौ बजे मतलब ये जैसे वीएचपी वाले आए थे बंद करवाने के लिए तो जिस टाइम पे हम थे दुकान पे तो उस टाइम पे एक साढ़े नौ... नौ साढ़े दस बजे एक दुकान जली थी हमारे दुकान के सामने मतलब थोड़ा उस साइड में आग लग रही थी तो उसको देखा कि हो गया चलो...
तहलका- मुसलमान की दुकान?
मदन- हां मुसलमान की दुकान थी वो जल रही थी तो हमने देखा हो गया चलो तो फिर फटाफट लोग दौड़े तो फिर पापा ने बोला तुम दुकान बंद करो... हमारी दुकान चालू थी तो कोई बोलना .... क्योकि वहां ठाठ से अपने वहां रहते तो अच्छा ही वो अपना रीज़न है... इसके लिए किसी ने बंद कराई तो कोई बोला नहीं... फिर हमनो हाथों से ही बोला अच्छा नहीं लगेगा। खोटा धर्म का है तो उसके लिए बंद करना भी बहुत जरूरी है... पिताजी ने बोला बंद कर दो आज चलो फिर घर पे जाते हैं... पिता जी और वो लोग हम घर गए.... फिर ऐसे ही साढे़ दस ग्यारह बजे मैं वहां से निकला .... जैसे निकला टोली के अंदर शामिल हुए... जैसे पब्लिक के साथ में हो हल्ला होता रहा...कम से कम दो ढाई तीन घंटे उन लोगों ने परेशान किया...
तहलका- टोली का आह्वान कौन कर रहा था?
मदन- टोली तो पूरी पब्लिक ही थी.. पूरी आ गई थी टोटल वो जैसे एक दुकान जली न उसके साथ में...
तहलका- तो उसमें अपने वीएचपी वाले थे टोली में...
मदन- सब सब
तहलका- अपने वीएचपी के कौन-कौन लोग ... नेता थे?
मदन- नेता तो हम इतने तो उनको पहले से पहचानते नहीं थे... आपना परिचय भी नहीं था क्योंकि अपने बिजनेस वाले तो अपने बिजनेस के हिसाब से... बाकी इतना जानते थे कि जैसे अतुल भाई को बाद में मुलाकात हुई तो बोला हां देखा था।
तहलका- अतुल वैद्य थे...
मदन- अतुल वैद्य थे फिर वो एक भरत भाई तेली वो भी था टोली में फिर ये दो चार जो लड़के थे जो बड़े-बड़े .... वो उनको जो जब आए हमको छुड़ाने के लिए जब आते थे हमारी मुलाकात को लेते थे.... यहां पे चौकी पे आते थे ... वहां सेंट्रल में नहीं आए... पुलिस चौकी पर जब रीज़न लेते थे तब आते थे हमको देखते थे.... फिर हमको लगने लगा कि हां ये भी थे....
तहलका- ये भी थे...
मदन चवाल- तो ये इनका जैसे हम सोचते थे साला इनका नाम क्यों नहीं आया... हम क्यों अंदर चले गए...
तहलका- जैसे अतुल वैद्य का नाम क्यों नहीं आया भरत तेली...
मदन- अतुल वैद्य... भरत तेली का क्यों नहीं आया... अपना नाम आया... उसको भी हम कुछ नहीं मानते थे.. चलो कुछ नहीं ये लोग बाहर हैं न तो अपने को छुड़ा सकें कुछ अपने लिए कर सकेंगे। तो हमने कभी ये मुंह से खोल कर ये कभी कहीं बात नहीं चलाई.. भाई ये थे वो लोग थे... किसी ने भी नहीं... 40-40 जितने भी लड़के अंदर थे उन्होंने...
तहलका- सबको मालूम ही था...
मदन- मालूम ही था.. तो कभी हम ये बताचीत वो करते भी नहीं थे कि क्या हुआ था.. वहां तो जेल में यही कहते थे हमें तो कुछ पता नहीं है हम तो खोटे-खोटे फड़ा के आ गए हैं... मेरे पूरा रोल जो चला तब तक उसमें पहली जो चार्जशीट थी उसमें मेरे को केरोसीन डाल कर जलाते दिखाया था। उस चार्जशीट में क्या हो गया था कि मेरे को गोली लग गई थी शाम को साढ़े छह सात बजे जब इर्दा साहब ने बोला था
तहलका- कैसे गोली लग गई।
मदन- इर्दा साहब ने बोला था...कि वो पूरा रीजन इर्दा साहब... आपको दिखाया न.. इर्दा साहब सेड दैट... तो उसी टाइप जब हम खड़े थे 8-10 जना खड़े थे हम लोग उनके पास में तो साहब ये क्या कर रहे हो इनको बचाके कैसे लेकर जा रहे हो
तहलका- ये आपने इर्दा साहब से कहा...
मदन- पब्लिक हम 8-10 जन खड़े थे... उनको बोला आप ये क्या कर रहे हो ?
मदन- कहां ले जा रहे हो... फिर उन्होंने हमको रीजन दिया....
तहलका- तो उन्होंने क्या कहा था?
मदन- कि तुम इस टाइप से करना... यहां आएगी गाड़ी.. हमारा कांस्टेबल भाग जाएगा... पूरी गाड़ी को जला देना... पूरी वार्ता यहीं फिनिश हो जाएगी तो किसी का केस भी बना के कोई हिसाब नहीं रहेगा... पूरी पिक्चर यहीं समाप्त हो जाएगी...तो फिर उन्होंने जैसे ही ये बोला तो बोले ठीक है तो फिर जो बागड़ी लोग होते हैं उन्होंने ऐसा सोचा अब ये साले अब इनको लेके जाएंगे... फिर अपने को मरवाएंगे वापिस... फिर ये जुबानी सब देंगे... अपने लोग के छोकरे सब मारे जाएंगे तो उन्होंने इर्दा साहब पे ही पत्थर मार कर दिया... जब इर्दा साहब पे पत्थर मार किया तो मैं वहां से भाग गया तो भाग रहा था तो पीछे से उसने रिवॉल्वर... जोर से ऐसे चिल्लाकर बोला था... एक बाजू थाई जा... मैं एक बाजू से निकलने गया तो मेरे साथ मेरे भाई का लड़का था उसको मैंने जैसे ही खींचा न गोली उन्होंने मारी वो गोली....
तहलका- गलती से लग गई...
मदन- गलती से लग गई.. जैसे ही वो गोली मारी हाथ पे लगी तो इंजर हुआ था कोई दवाखाना चालू नहीं था सब बंद था... उस टाइम हॉस्पिटल टोटल... तब सिविल में गया... तो सिविल में भी मतलब वो कोई ध्यान में था नहीं की ऐसे जुलूस में कभी आए नहीं थे... उस दिन नाम पूरा सही नाम लिख दिया था उसके हिसाब से...
तहलका- तो उस दिन सुबह आपने जाफरी को कैसे मारा?
मदन- जाफरी को तो... मतलब जैसे उन लोगों ने... जैसे वो लोग पकड़ के ले गए तो हमने पीछे से जैसे लात मारी वो खींच के लेके गए फिर जैसे खींच के लेक गए... जाफरी... गिरा... वो नहीं खेंच उनके हाथ में था न... पांच छह जन पकड़ लिए थे फिर उसको जैसे पकड़ के खड़ा रखा फिर लोगों ने किसी ने तलवार मारी... हाथ काटे.. हाथ काटके फिर पैर काटे फिर सब काट डाले... फिर टुकड़े करके लगाए थे जो लकड़े उसपे रख फिर जला डाला... ज़िदा जला डाला...
तहलका- तो जब लोगों ने इसको जाफरी को काटा तो वो इर्दा बचाने तो नहीं आया?
मदन- नहीं किसी ने कुछ...उस टाइम पे इर्दा साहब थे भी नहीं... वो गाड़ी लेकर वहां चले गए थे मेघानीनगर चले गए थे... उसको मालूम नहीं था कि जाफरी साहब को काट रहे हैं... उस टाइम पे इर्दा साहब वहां मौजूद भी नहीं था वो राउंड में यूं घूम के चला गया था... एक डेढ़ बजे के करीबन कि ये वार्तालाप हुई ती उस टाइम।
तहलका- लेकिन उसके घर के... जाफरी के बाकी लोग बच गए?
मदन- नहीं बचे... उसकी औरत ही खाली बच के चली गई थी... ये जो हिंदू बन के निकली है...
तहलका- लेकिन लड़कियां बच गई न उसकी कुछ?
मदन- नहीं कोई नहीं बचा...उस टाइम पे उसके घर पे कोई फेमिली नहीं बची...
तहलका- अच्छा जो यहां पे था नहीं बचा....
मदन- यहां नहीं बचा... जो बाहर थे वो लोग बचे उसकी औरत भी बोली की मैं काम करने वाली हूं.... मैं तो हिंदू हूं पतरेवाली चाली में रहती हूं... मैं तो नौकरानी हूं.. मुझे क्यों मार रहे हो और अपने ही हिंदू की वेशभूषा पहन के फिर निकली है तो कायदे से हिंदू बनके निकली है...
तहलका- तो आप पहचानते नहीं थे उनको?
मदन- तो ये तो किसी को वो तो कभी ऐसा मतलब था ही नहीं किसी को मिलने का उसके पास जाने का किसको ऐसी जरूरत पड़ती थी कि जाफरी साहब से .... वो थे कोई चार आना जो उनके पास काम हो तो जावे... अपन ऐसे किसी को काम रखते भी नहीं थे... हम तो ताल्लुक ही नहीं रखते पहली बात....
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कुल टिप्पणियां: 2
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प्रेषक : RajWell the truth has been brought out, Perhaps these criminals may not get right justice here on earth but in heaven, it is sure. Saint Kabir said, "Garib aadmi ki aah se laha bhi bhasam ho jata hai" This will come true. Finally, The Bible says, "Those who use swords, will be killed by swords." Whoever it is They will get the punishment. Thanks for this Great Work.
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प्रेषक : RajanIt is so disgusting.Now Narendra Modi and his bhagwa brigade must be arrested and put behind the Jails somewhere in the South Indian State,and a fresh time bound independent impartial inquiry be conducted.






















