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   अहमदाबाद : नरसंहार की राजधानी
नरौदा, गुलबर्ग, कालूपुर और दरियापुर में हथियारों से लैस, खून की प्यासी भीड़ ने वो सब कुछ किया जो संघ परिवार चाहता था. जिन्होंने किया, उन्हीं की जुबानी
| तहलका के कैमरे में रेकॉर्ड रिचर्ड और राठौड़ के बयान के मुताबिक बीजेपी विधायक कोदनानी ने दिन भर नरौदा की गलियों में घूम-घूम कर भीड़ को मुसलमानों को ढूंढ-ढूंढ कर मार डालने के लिए उकसाता रही. |
मगर नरौदा अहमदाबाद में अकेला नहीं था कुछ ही दूरी पर कुछ दूसरे हिंदुत्व के अलमबरदार ऐसे ही एक और कारनामे को अंजाम दे रहे थे. जगह थी मेघानी नगर की गुलबर्ग सोसाइटी जिसमें रहने वाले सभी लोग मुस्लिम थे. तहलका ने हत्याकांड में शामिल जिन तीन लोगों को छुपे कैमरे में कैद किया उनके नाम हैं मांगीलाल जैन, प्रहलाद राजू और मदन चवल. तीनों छोटे-मोटे व्यापारी हैं और तीनों के ख़िलाफ़ दंगों में शामिल होने के लिए मुकदमा चल रहा है. उनका कहना है कि उन्हें और भीड़ के और लोगों का नेत्रत्व वीएचपी नेता अतुल वैद और भारत तेली कर रहे थे. इन दोनों के नाम FIR में तो शामिल थे मगर पुलिस द्वारा अदालत में दायर आरोप पत्र में इनको क्लीन चिट दे दी गयी. चवल ने पूरी तफसील से बताया कि कैसे उसने और उसके साथियों ने पहले जाफरी के शरीर के हिस्सों को एक-एक कर काटा और फ़िर कैसे उनका गट्ठर बनाकर उसमें आग लगा दी.
गुलबर्ग हत्याकांड में मरने वालों की आधिकारिक संख्या 39 बताई गई मगर आरोपियों ने तहलका को बताया कि एर संख्या इससे बहुत ज़्यादा थी. सोसाइटी के बाशिंदों के अलावा मरने वालों में आस-पड़ोस के इलाकों के लोग भी शामिल थे जो कि वहाँ शरण लेने के लिए आ गए थे. तहलका ने वीएचपी के दो नेताओं राजेन्द्र व्यास और रमेश दवे से भी मुलाक़ात की. इन दोनों ने अहमदाबाद के दो सबसे ज़्यादा साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाकों कालूपुर और दरियापुर में हमला करने की योजना बनाई थी. वीएचपी के अहमदाबाद शहर के अध्यक्ष व्यास ही साबरमती एक्सप्रेस के इंचार्ज भी थे. उनके मुताबिक, जिस दिन ट्रेन में जल कर 59 कारसेवकों की मौत हो गयी थी उस दिन उन्होंने वीएचपी के कार्यकर्ताओं से कहा " मुसलमानों ने एकदिवसीय मैच खेला है और हमें 60 का लक्ष्य दिया है. अब हमें टेस्ट मैच खेलना है और 600 बनाने से पहले नहीं रुकना है.
व्यास, जो कि कालूपुर में ही रहते हैं, ये कहते हुए कैमरे में कैद हैं कि उन्होंने ख़ुद 5 मुसलमानों को गोली मारी और उनके 9 घरों को भी आग के हवाले कर दिया.
रमेश दवे दरियापुर में वीएचपी की कमान संभाले हुए थे. उनका कहना था कि उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिल कर उन सभी मुसलमानों को मार डाला जो कि पिछले बीस सालों से उनकी निगाहों में थे--"चुन-चुन के मारा इस बार" . दवे का ये भी दावा था कि उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर 10 छोटे हथियारों का इंतज़ाम भी किया था.
आशीष खेतान
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कुल टिप्पणियां: 33
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प्रेषक : तुषार मुखर्जी।यह कैसी राजनीति का खेल खेला जा रहा है जो मेरी समझ से बाहर है?
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प्रेषक : shamshadyou are a great journalist you inspire me to become a journalist like you
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प्रेषक : krishn deomitra, 2002 riot me kuchh aur bhi dilkhej wakyat hue the...jiname musalmano ne hinduo ko aur hinduaon ne musalmano ki jaan bachahi thi...bad me main asise logo se jakar mila...lambi batchit ki...aur unaki kahaniya likhi..kahaniya ek hindi blog par aaye..kahen to pesh karun...wiase wo kahaniyaan ek documaentary film ka hissa hai..jo kabhi ban jaye shayad...
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प्रेषक : kaifmr. safir, what do u think the gujrat roit is an story. hw can our country make progress if you will put some ppl of your country in margin. and media is doing well its not bullshit, its brave work, but our gov. n court are not wrkng well thats y media have to expose the sprit.
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प्रेषक : ajanyah ek democracy per dag hoga becauce india mai freedom hai.























